#Patrika key-note 2018: जब-जब आई आपदा तो सेना ने किया ये... वीडियो में सुनिए ले. जनरल साहनी की जुबानी live

#Patrika key-note 2018: जब-जब आई आपदा तो सेना ने किया ये... वीडियो में सुनिए ले. जनरल साहनी की जुबानी live

Premshankar Tiwari | Publish: Sep, 06 2018 01:48:58 PM (IST) Jabalpur, Madhya Pradesh, India

पत्रिका की-नोट माय सिटी कार्यक्रम जबलपुर

जबलपुर। प्राकृतिक या अन्य आपदा के दौरान वक्त बहुत कम होता है। जान-मान की सुरक्षा सबसे बड़ा व पहला लक्ष्य होता है। सेना के जवान इसी लक्ष्य पर काम करते हैं। आपदा के समय सेना के जवान जिस मनोयोग से अपने काम में जुटते हैं, वह अनुकरणीय है। इससे स्थानीय प्रशासन को सीख लेनी चाहिए और आपदा के समय उसी के अनुरूप बचाव व राहत कार्य में जुटना चाहिए। ये मानना है भारतीय सेना के पूर्व जनरल ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ लेफ्टिनेंट जनरल अरुण कुमार साहनी का। श्री साहनी गुरुवार को यहां वेटनरनरी यूनिवर्सिटी के ऑडिटोरियम में आयोजित पत्रिका के की-नोट माय सिटी 2018 कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे।

प्रोजेक्टर के माध्यम से बताए कार्य
भारतीय सेना के पूर्व जनरल ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ लेफ्टिनेंट जनरल अरुण कुमार साहनी ने कहा कि आपदाताओं के समय राहत कार्य बेहद चैलेंजिंग होता है। ऐसे में धैर्य और अनुशासन बेहद आवश्यक होता है। उन्होंने हाल ही में केरल में आई आपदा का जिक्र करते हुए प्रोजेक्टर के माध्यम से बताया कि सेना के जवानों ने वहां कितने संयम के साथ कार्य किया और लोगों को राहत पहुंचाई। उन्होंने कहा कि किसी बच्चे के बोरिंग में गिरने की बात हो, बाढ़ हो, कोई प्राकृतिक आपदा हो या फिर आतंकवाद, इनमें सेना की राहतकारी गतिविधियों से सभी को सीखना चाहिए।

आम लोगों के लिए भी जरूरी
साहनी ने कहा कि बचाव और राहत कार्य के तरीके सीखना जितना प्रशासन के अमले के लिए आवश्यक है। उतना ही जरूरी है कि आम लोग भी इसके बारे में जानें। उन्होंने कहा कि जब आपदा आती है तो आम लोग ही सबसे पहले उसका सामना करते हैं। यदि वे बचाव के तरीकों में पारंगत होंगे तो केवल पीडि़तों तत्काल राहत मिल सकेगी, बल्कि नुकसान की संभावना भी कम हो जाएगी।

कश्मीर पर यह बोले
कश्मीर के हालातों पर लेफ्टिनेंट जनरल ने कहा, शांति जरूरी है। वहां के युवाओं को रोजगार का विकल्प मिलना चाहिए। यदि उन्हें व्यस्त रखा जाता है तो हालात जल्दी नियंत्रित होंगे। यह तभी हो सकता है जब घाटी का जुड़ाव देश के अन्य हिस्सों से हो सकता है। अभी बर्फबारी या बारिश में यह प्रदेश देश के दूसरे हिस्सों से कट जाता है, इसलिए अधोसंरचना का विकास किया जाए। इस काम में तेजी आई है। हालंाकि, लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) की परेशानी दूसरी है। उसका निराकरण राजनीतिक रूप से हो सकता है।

चीन की रणनीति घातक
आर्मी के शीर्ष अधिकारी रहे साहनी ने चीन और भारत के बीच डोकलाम विवाद पर साहनी ने कहा, यह मामला शांत जरूर हुआ है, लेकिन यह कभी भी उभर सकता है। चीन जिस तरह से भूटान को ऑफर दे रहा है, उससे विवाद खड़ा हो सकता है, इसलिए देश की कनेक्टिविटी भूटान के साथ-साथ बांग्लादेश के साथ हो। यदि भूटान के रास्ते चीन रणनीति बना रहा है तो वह हमारे लिए घातक होगी, क्योंकि वह जिस तरह की अधोसंरचना बनाएगा, उससे वह ऊंचाई पर पहुंच जाएगा। इससे देश की फौज पर खतरा बढेग़ा, इसलिए हमें अपनी सीमा तक सडक़ और दूसरी अधोसंरचना के निर्माण का काम तेज करना होगा।

ये रहे उपस्थित
कार्यक्रम के शुभांरभ पर पत्रिका जबलपुर के जोनल हेड अवधेश जैन व यूनिट हेड अजय शर्मा ने साहनी व अन्य अतिथियों का स्वागत किया। स्थानीय संपादक गोङ्क्षवद ठाकरे ने कार्यक्रम की रूपरेखा से अवगत कराया। ठाकरे ने कहा कि भारतीय सेना के पूर्व जनरल ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ लेफ्टिनेंट जनरल साहनी द्वारा दिए गए टिप्स एक तरह से महामंत्र जैसे हैं। स्थानीय प्रशासन का अमला इन्हें अपना ले तो न केवल आपदाओं के समय होने वाला नुकसान कम होगा, बल्कि पीडि़तों को त्वरित राहत भी मिलेगी। कार्यक्रम में विधायक ईश्वरदास रोहाणी, कर्नल वैद्य, वेटरनरी यूनिवर्सिटी के प्राध्यापक गणों समेत अनेक प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।

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