इसलिए होते हैं सड़क हादसे, मचता है मौत का तांडव, देखें वीडियो

  इसलिए होते हैं सड़क हादसे, मचता है मौत का तांडव, देखें वीडियो
Deadly overloading in auto

सवारी वाहनों में क्षमता से कई गुना ओवरलोडिंग, नियम 4 सवारी का बैठे हैं 21 लोग, हैरान करने वाली जिम्मेदारों की अनदेखी

जबलपुर। शायद यह बात आप सभी को पता होगी कि आटो में सिर्फ 4 सवारी ही बैठाने का नियम है। आपने इससे दोगुने या फिर अधिकतम 10 से 12 लोग बैठे देखें होंगे। हम जो आपको दिखाने जा रहे हैं उसे देखकर आप हैरान रह जाएंगे। पत्रिका द्वारा ओवर लोडिंग पर किया गया स्टिंग न सिर्फ प्रशासनिक अधिकारियों की जिम्मेदारी का पोल खोल रहा है बल्कि यह प्रमाण भी दे रहा है कि ऑटो चालको के जहन में पुलिस, यातायात व परिवहन विभाग का तनिक भी खौफ नहीं है। इस तरह की जानलेवा ओवरलोडिंग देखकर यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि इसके लिए जिम्मेदारों की सह प्राप्त है।


एक आटो में 21 यात्री
परिवहन विभाग के अनुसार टैक्सी परमिट के रूप में पंजीकृत ऑटो में मात्र 4 सवारी बैठाकर ही तय गंतव्य तक ले जाया जा सकता है। लेकिन इस आटो में 4, 8, 10 नहीं बल्कि 20 से अधिक सवारी बैठी हुई है। भूसे की तरह आटो में लोगों को बैठाया गया है। इसमें न तो उनकी जान का ख्याल रखा गया और ना ही किराए में रियायत। हैरत की बात तो यह है शहरी क्षेत्र में आटो का परमिट होने के बाद भी ग्रामीण क्षेत्रों में फर्राटे भर रही हैं। ओवर लोडिंग का यह नजारा आटो क्रमांक एमपी 21 आर 3778 का है।

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ऐसे जमाई गई थी सवारी
इस वीडियो को देखकर आप साफ अंदाजा लगा सकते हैं कि कैसे सवारी भरी गई है। इस ऑटो में 4 लोग पीछे लटके हुए हैं और 4 यात्री सामान रखने वाली डिग्गी में सेट हैं। जिस स्थान पर 4 लोगों को बैठाकर ले जाने का नियम है वहां पर 5 से 6 यात्री सेट किए गए हैं। इसके अलावा सीट के सामने वाली पट्टी में 4 लोग फंसे हुए हैं। बची चालक की सीट। तो यहां पर भी कोई कसर नहीं छोड़ी गई। चालक अपने आजू-बाजू एक-एक यात्री को लटकाए हुए है।

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ऐसे सामने आया ओवरलोड का सच
यह वीडियो पत्रिका द्वारा शूट किया गया है। वीडियो कटनी जिले के बड़वारा से बसाड़ी मार्ग का है। रोहनिया गांव में जब पत्रिका टीम ने आटो में लटकी सवारी को देखा तो हैरान रह गई। आटो में जिस हिसाब से लोग टंगे, फंसे, ठुंसे दिखे उसे देखकर तो यही लगा की रुपयों की लालच में चालक ने लोगों की जान से खिलवाड़ किया है। यह सिर्फ एक नहीं बल्कि इस क्षेत्र में दौड़ रही हर आटो का यही नजारा है।

हर समय हादसे की आशंका
यह समस्य सिर्फ कटनी में ही नहीं अपितु हर क्षेत्र में बनी हुई है। स्थानीय निवासी चंद्रभान राय ने बताया कि दिनभर इसी तर्ज पर ऑटो चलते हैं। कई बार हादसे भी हो चुकेक हैं, बावजूद इसके जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे। नगर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में जमकर ओवरलोडिंग हो रही है। तिपहिया, चौपहिया वाहनों में क्षमता से अधिक सवारियां ढोई जा रही हैं। वाहनों में क्षमता से तीन से चार गुना तक ज्यादा सवारी बैठाई जा रही है। इस सबके बावजूद पुलिस की निगाह ऐसे वाहनों पर नहीं पड़ रही।

यात्री भी उठाते हैं जोखिम
इस ओवर लोड आटो को देखकर यह भी साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि यात्री परिवहन के संसाधनों की कमी, जल्दी पहुंचने की होड़ या फिर चंद रुपए बचाने का लालच में अपनी जान को जोखिम में डाल देते हैं। जल्दी पहुंचने की होड़ में जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। आटो के बोनट पर 5 से 6 यात्री जहां लटके हुए हैं तो वहीं 15 से अधिक सवारी अंदर बैठी हुई है। ग्रामीण क्षेत्र में इस तरह के वाहन ज्यादा फर्राटे भर रहे हैं। हैरत की बात तो यह है कि कि ये वाहन पुलिस, प्रशासनिक अधिकारियों और आरटीओ की नजरों के सामने से गुजरते हैं, लेकिन इस जानलेवा ओवरलोडिंग पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।


कुछ इस तरह मचती है होड़
जानकारी के मुताबिक शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में सवारी के लिए ऐसी होड़ मचती है चाहे भले ही कोई दुर्घटना क्यो न हो जाए। आटो ड्रायवरों के बीच इस बात को लेकर भी होड़ मचती है कि कौन कितनी अधिक सवारियां बिठाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में जानवरों से भी बद्तर हालात में सवारी बैठाकर आटो सहित अन्य निजी वाहन दौड़ाए जा रहे हैं।

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पुलिस से बढिय़ा तालमेल
सूत्रों की मानें तो इन आटो चालकों का ट्रैफिक सहित स्थानीय पुलिस से बढिय़ा तालमेल होता है। एक आटो चालक ने नाम न छापने की शर्त पर जो खुलासा किया वह वाकई चौकाने वाला है। चालक ने बताया कि हफ्ते में एक बार चालान कटाओ और फिर जमकर ओवलोडिंग करो। पकड़े जाने पर चालान दिखा दो। क्यों यदि चालानी कार्रवाई ठोस होती और पुलिस का डर इन आटो चालाकों के सिर होता तो फिर इस तरह की जानलेवा ओवरलोडिंग कतई नही होती।

रफ्तार बनती है हमेशा घातक
अभी हाल ही के कुछ दिनों पूर्व चरगवां में एक ओवरलोड तेज रफ्तार वाहन पलटने के कारण एक दर्जन से अधिक लोगों की मौत हो गई थी, बावजूद इसके रफ्तार पर लगाम लगती नहीं दिख रही है। आटो चालक मनमाफिक सवारी बैठाकर हवा से बातें करते चलते हैं। स्थिति यह रहती है कि ड्रायवर खुद की आधी सीट भी सवारियों के हवाले कर देता है और खुद किनारे लटक कर वाहन चलाता है। ऊपर से बोनट पर सवारियां होने के कारण सामने की स्थिति ठीक तरह से नहीं दिखती। लिहाजा यह सवारियों के साथ ही आम जनता के लिए भी घातक बन जाता है।

यातायात विभाग व पुलिस कर रही अनदेखी
शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में यात्रियों की आवाजाही होती है। इसी के चलते चालकों की मनमानी सबाब पर है। एक ओर जहां चालकों की मनमानी साफ दिख रही है तो यातायात पुलिस, स्थानीय पुलिस सहित आरटीओ विभाग की नाकामी साफ नजर आ रही है। यातायात विभाग सिर्फ रस्म अदायगी के कुछ भी करता नहीं दिखा रहा है। इसका खामियाजा लोगों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ रहा है। सवारी वाहन यातायात नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाते देखे जा सकते हैं। क्षमता से अधिक सवारियां बिठाने व तेज गति से वाहन दौड़ाने वाले इन चालकों को न तो हादसों का खौफ है और न ही यातायात नियमों की परवाह।

आटो में यह नियम जरुरी
- आटो में मात्र 4 सवारी बैठनी चाहिए
- आटो में चालक का नंबर अंकित होना चाहिए
- आटो में किराया सूची चश्पा होना चाहिए
- आटो चालक यूनीफार्म में हो
- आटो चालक नेम प्लेट लगाए हुए हो
- आटो में पुलिस व सुरक्षा नंबर अंकित होना चाहिए
- ओटो का दाहिना हिस्सा जाली से बंद होना चाहिए
- चालक के पास लायसेंस होना अनिवार्य
- वाहन में परमिट व फिटनेस आवश्यक
- चालक की सीट पर सवारी नहीं बैठी हो
- आटो की लाइट और इंडीगेटर सही हों
- आटो में रूट निर्धारण होना होना चाहिए
- आटो में मीटर लगा होना चाहिए
- आटो का टैक्सी परमिट होना अनिवार्य

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