इस थैरेपी से दौडऩे लगता है टूटी हड्डी वाला, रेंगने वाला हो जाता है खड़ा

इस थैरेपी से दौडऩे लगता है टूटी हड्डी वाला, रेंगने वाला हो जाता है खड़ा

Lalit Kumar Kosta | Publish: Sep, 08 2018 02:04:50 PM (IST) Jabalpur, Madhya Pradesh, India

इस थैरेपी से दौडऩे लगता है टूटी हड्डी वाला, रेंगने वाला हो जाता है खड़ा

जबलपुर। हड्डी की जकडऩ और दर्द से राहत देने वाली फिजियोथैरेपी का रोल दिनों दिन बढ़ता जा रहा है। मॉडर्न मशीनों और नए तरीके के प्रयोग से लाइफ सेविंग में थैरेपी ज्यादा कारगर हो गई है। मेडिकल साइंस की तरह ही पैरामेडिकल की इस थैरेपी नए-नए बदलाव हो रहे हैं। आईसीयू में भर्ती, वेंटीलेटर के सहारे सांस ले रहे मरीजों को नई जिंदगी देने में फिजियोथैरेपी की मदद ली जा रही है। फिजियोथैरेपी का पहले मुख्य रोल ऑर्थोपेडिक डिपार्टमेंट में था। हड्डी, मांसपेशी के जकडऩ, दर्द या विकलांगता कम करने में इसकी उपयोगिता थी लेकिन अब गॉयनिक, न्यूरो, डेंटल के मरीजों में भी इसका प्रयोग फायदेमंद साबित हो रहा है। मेडिकल कॉलेज एवं शासकीय चिकित्सालयों के अलावा निजी अस्पतालों में फिजियोथैरेपी का क्रेज बढ़ा है। यूथ अब फिजियोथैरेपी को अपना कॅरियर बनाने में रुचि ले रहे हैं।

news facts- वर्ल्ड फिजियोथैरेपी डे

लाइफ सेविंग में कारगर बनी फिजियोथैरेपी
अब हड्डी और मांसपेशियों के दर्द तक सीमित नहीं है फिजियोथैरेपी
आईसीयू में कोमा के मरीजों को होश में लाने में भी उपयोगी

इन प्राब्लम्स में रोल
आईसीयू, वेंटीलेटर- आईसीयू में भर्ती मरीजों को सांस लेने में तकलीफ होने पर बॉयो मैकेनिकल करक्शन एवं पाश्चरल ड्रेनेज से बलगम बाहर निकाला जाता है।
कोमा के गंभीर मरीज- बेहोशी के मरीजों को होश में लाने में फिजियोथैरपी उपयोगी है। एराइजल टेक्निक से नेत्र में प्रकाश, जीभ पर रसायन, कानों में ध्वनि के माध्यम से चैतन्यता लाते हैं।
न्यूरो के मरीजों को फायदा- चोट या झटका लगने से शरीर के अंगों को लकवाग्रस्त एवं शून्यता आने पर फिजियोथैरपी से बिना दवा के ठीक किया जा रहा है। इसमें मशीनों का उपयोग कारगर हो रहा है।
जबड़े को ताकत देने में- चेहरे की प्लॉस्टिक, सर्जरी या दांत निकालने पर जबड़े की मांसपेशियों में कमजोरी होने पर फिजियोथैरेपी कराई जाती है। मोबलाइजेशन एवं मैनुअल थैरेपी की जाती है।
हड्डी की जकडऩ, दर्द- हड्डियों के टूटने या मांसपेशियों में खिचाव पर जकडऩ या दर्द शुरू हो जाता है। गर्दन, कूल्हा व अन्य जोड़ों के बीच जटिलताएं दूर करने में फिजियोथैरेपी का बड़ा रोल है।
गॉयनिक प्राब्लम में- फिजियोथैरपी से नार्मल डिलेवरी की संभावना बढ़ जाती है, गर्भावस्था के दौरान दर्द कम होता है। वहीं डिलेवरी के बाद मांसपेशियों में ताकत बढ़ाने में थैरेपी कारगर होती है।
स्टूडेंट को दिए थैरेपी के टिप्स- रीजनल स्पाइनल इंज्युरी सेंटर स्थित फिजियोथैरपी सेंटर में फिजियोथैरेपी डे के मौके पर फिजियोथैरेपिस्ट डॉ. मयंक वैद्य ने फिजियोथैरेपी छात्र-छात्राओं को मैटलैंड थैरेपी के टिप्स दिए। उन्होंने मैनुअल थैरेपी के प्रयोग कर दर्द एवं जकडऩ दूर करने के तरीके बताए।

बनता है शारीरिक संतुलन
मेडिकल कॉलेज के ऑडीटोरियम में शुक्रवार को शुरू हुए दो दिवसीय फिजियोथैरेपी कांफ्रेस साइनेप्स में मुम्बई से आई फिजियोथैरेपिस्ट प्रियंका पीटर ने थैरेपी की जानकरी दी। पीटर ने बताया, रीढ़ की हड्डी के चारों ओर कोर मांसपेशी होती है, इससे शारीरिक संतुलन बनता है। मांसपेंशियों में लचीला बनाने या उसमें ताकत बढ़ाने में इस थैरेपी से जल्दी फायदा होता है। डॉ. महेश स्थापक ने कृत्रिम अंगों के बारे में जानकारी दी।

फिजियोथैरपी का नाम भौतिक चिकित्सा है, इसका उपयोग गहन चिकित्सा से शुरू होता है। लाइफ सेविंग सपोर्ट से सांस लेने वाले मरीज या कोमा मरीजों को जल्द ही स्वस्थ्य करने में थैरेपी कारगर हो रही है। इसमें बिना दवा के प्रयोग के ही आराम मिल रहा है।
- डॉ. अजय फौजदार, एसोसिएट प्रोफेसर, मेडिकल कॉलेज

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