खेल मैदानों का हुआ कबाड़ा

खेल मैदानों का हुआ कबाड़ा
खिलाडि़यों को नहीं मिल रहा खेल वातावरण, पेयजल-बैठक-खेल सामग्री का अभाव

Manoj Verma | Updated: 15 Apr 2019, 07:28:22 PM (IST) Jabalpur, Jabalpur, Madhya Pradesh, India

राइट टाउन, रानीताल, खमरिया, जीसीएफ, विद्यानगर, रादुविवि, जेएनकेविवि आदि जगहों में खेल सुविधाओं ठप्प, खिलाडि़यों को नहीं मिल रहा खेल वातावरण, पेयजल-बैठक-खेल सामग्री का अभाव, प्रशिक्षक भी कर रहे खानापूर्ति

जबलपुर । खेल मैदानों में खिलाडि़यों को दी जाने वाली सुविधाओं के नाम पर तगड़ा खेल चल रहा है। खेल एेसा है, जिसमें खिलाडि़यों को सुविधाएं भी नहीं दी जा रही है और सरकार को सुविधाएं भी दिखा दी जा रही है। इससे हो यह रहा है कि शहर के खिलाडि़यों को नेशनल और इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म नहीं मिल पा रहा है। शहर के विभिन्न खेल मैदानों की हालत देखी तो यह थी कि यहां खाली मैदान के अलावा सुविधाएं नगण्य थीं। मैदान का भी रखरखाव नहीं था, जिससे खेल विभाग दावा कर सके कि वे यहां स्टेट टूर्नामेंट या बड़ी प्रतियोगिताएं करवा सकते हैं। खेल मैदानों की हकीकत बयां करती एक्सपोज की रिपोर्ट...।
राइट टाउन, रानीताल, खमरिया, जीसीएफ, विद्यानगर, रादुविवि, जेएनकेविवि,शिवाजी आदि जगहों में खेल सुविधाएं ठप्प हैं। इनमें से मात्र रानीताल खेल मैदान ही है, जिसमें तीरंदाजी सिखाई जा रही है। शेष जगहों पर खेल समितियों ने अपना अधिकार जमा रखा है। जानकारों के मुताबिक शासकीय खेल मैदानों में कीड़ा अभ्यास लगभग समाप्त हो चुका है। यहां मात्र दौड़ का अभ्यास और सुबह-शाम की सैर ही शेष बची है। इन मैदानों में 'गली क्रिकेटÓ खेला जा रहा है लेकिन बड़ी प्रतियोगिताएं अपनी जगह नहीं बना सकी।
खिलाडि़यों के लिए कोच नहीं

खेल से जुड़े वरिष्ठ खिलाडि़यों की दलील है कि यहां विभिन्न खेलों के प्रशिक्षक नहीं है। इससे यहां खिलाड़ी भी एकत्र नहीं होते हैं। खेल के अभ्यास के लिए खिलाड़ी निजी क्लब आदि में जा रहे हैं ताकि उनका खेल के प्रति रूझान समाप्त न हो। खेलों में तीरंदाजी, वॉलीबॉल और तैराकी ही एेसे सिगमेंट हैं, जिसमें कोच मिल रहे हैं। शेष खेलों में खानापूर्ति की जा रही है।
मैदान पर पेयजल, खेल सामग्री का अभाव

खेल मैदानों पर खिलाडि़यों के लिए पेयजल, डिं्रक्स सहित खेल सामग्री का अभाव है। यहां खेल संबंधित कोई भी सामग्री नहीं मिलती है। इससे यहां खिलाड़ी भी नहीं पहुंच रहे हैं। बताया जा रहा है कि बॉक्सिंग के लिए किट, जूडो-ताइक्वांडो के लिए गद्दे, पहलवानी के लिए मशीनें, हाईजंप के लिए मिट्टी और स्टैंड, लॉन्ग जम्प के लिए मिट्टी ट्रैक आदि मैदान पर नहीं है।
मुख्य स्टेडियम रनिंग ट्रैक तक सीमित

मुख्य स्टेडियम में खिलाडि़यों के लिए व्यवस्थाओं के नाम पर सिर्फ रनिंग ट्रैक ही बचा है। यहां रनिंग के लिए खिलाडि़यों को जगह मिल रही है लेकिन कुशल प्रशिक्षक उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। इससे यहां खिलाड़ी नियमित अभ्यास के लिए आ रहे हैं। यहां पीने के पानी के लिए एक नल लगाकर रखा हुआ है, जिसे ओवरहेड टैंक से जोड़ा गया है।
मैदान में घास तक नहीं

खमरिया, जीसीएफ, विद्यानगर, रादुविवि, साइंस कॉलेज, जेएनकेविवि, शिवाजी आदि मैदानों की हालत खराब है। इन मैदानों में हरियाली समाप्त हो गई है। हरियाली समाप्त हो जाने से यहां फुटबाल जैसे खेल भी नहीं हो पा रहे हैं। हॉकी के लिए बनाए गए साइंस कॉलेज के सामने मिनी ग्राउंड में अभ्यास किए जा रहे हैं। इसके अलावा निजी क्लब शिवाजी ग्राउंड में छोटे टूर्नामेंट करवा रहे हैं।
सीधी बात

सुनील पटेल, जिला खेल अधिकारी
जिले में खेल की स्थिति क्या है?

अभी तो ठीक है।
किस खेल में अभी खिलाड़ी आगे खेल रहे हैं?

अभी तैराकी, तीरंदाजी में खिलाड़ी आगे तक पहुंचे हैं।
इसके अलावा अन्य खेलों में पिछड़ क्यों रहे हैं?

एक तो यहां सुविधाएं कम हैं और फिर पढ़ाई की वजह से खिलाड़ी उतना समय नहीं दे पा रहे हैं, जितना उन्हें देना चाहिए।
इसे लिए तो खिलाडि़यों के पालकों से भी बातचीत की जा सकती है?

कई बार बातचीत की है लेकिन खिलाड़ी का कैरियर को देखते हुए पालक तैयार नहीं होते हैं, जिससे वे पिछड़ रहे हैं।
यहां खेल मैदानों पर भी व्यवस्थाएं नहीं हैं आखिर एेसा क्यों है?

यहां रानीताल, मुख्य स्टेडियम में तो व्यवस्थाएं हैं। लेकिन अन्य मैदानों पर सारी व्यवस्थाएं नहीं की जाती है।
क्या शासन से फंडिंग नहीं आती है?

शासन से फंडिंग आती है और खिलाडि़यों को सुविधाएं भी दी जाती है। लेकिन रूचि नहीं होने की वजह से सारी सुविधाएं दम तोड़ रही हैं।
लेकिन यहां खेल मैदान तो सूने पड़े हुए हैं, एक्का-दुक्का ही खिलाड़ी नियमित रूप से आते हैं?

जी, हां। यह सच है लेकिन हम क्या करें, जब उनके पालक ही नहीं भेजते हैं। नियमित रूप से खिलाड़ी आएं तो ही सुविधाओं का रखरखाव हो सकेगा अन्यथा उन्हें समाप्त होने में समय नहीं लगता है।

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