पुलिस कांस्टेबल पद की भर्ती में फंसा ये पेंच

पुलिस कांस्टेबल पद की भर्ती में फंसा ये पेंच

Lalit kostha | Publish: Aug, 12 2018 11:21:14 AM (IST) | Updated: Aug, 12 2018 11:23:44 AM (IST) Jabalpur, Madhya Pradesh, India

पुलिस कांस्टेबल पद की भर्ती में फंसा ये पेंच

जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने दो टूक लहजे में कहा है कि अपराधिक प्रकरण से बरी होना अच्छे चालचलन का प्रमाणपत्र नहीं है। इस वजह से किसी उम्मीदवार को सरकारी नौकरी के अयोग्य ठहराने के निर्णय में हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता। चीफ जस्टिस हेमंत गुप्ता व जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की डिवीजन बेंच ने सरकार की अपील मंजूर कर सिंगल बेंच का वह आदेश निरस्त कर दिया, जिसमेें पुलिस कांस्टेबल ड्राइवर पद के अभ्यर्थी को अयोग्य ठहराने का आदेश खारिज कर दिया गया था।

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हाईकोर्ट ने कहा: पुलिस आरक्षक पद पर नियुक्ति के उम्मीदवार का मामला
सरकार की अपील मंजूर, कोर्ट ने कहा बरी होना अच्छे चरित्र का प्रमाणपत्र नहीं

यह है मामला
सिवनी जिले के गणेशगंज निवासी मोहम्मद अकरम ने हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर कहा था कि उसने पुलिस आरक्षक(ड्राइवर ) के पद के लिए विज्ञापन के अनुसार आवेदन दिया। चयन प्रक्रिया के बाद चरित्र सत्यापन के दौरान 12 सितंबर 2017 को उसे यह कहते हुए अयोग्य ठहरा दिया गया कि उसके खिलाफ भादंवि की धारा 294,239 के तहत एक प्रकरण दर्ज हुआ था। अयोग्य ठहराने के आदेश को उसने इस याचिका में चुनौती दी थी। कहा गया कि इस प्रकरण में समझौता होने के चलते वह 15 मई 2017 को बरी हो गया था। इसके बावजूद उसे अयोग्य करार देना अनुचित है। याचिका का निराकरण करते हुए हाईकोर्ट ने 21 नवंबर 2017 को अयोग्य करार देने वाला 12 सितंबर का आदेश निरस्त कर दिया था। इस आदेश को राज्य सरकार की ओर से अपील के जरिए डिवीजन बेंच में चुनौती दी गई।

यह कहा कोर्ट ने
राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता अमित सेठ द्वारा पेश तर्कों से सहमति जताते हुए कोर्ट ने कहा कि पुलिस मुख्यालय की स्कू्रटिनी कमेटी ने अकरम को अयोग्य ठहराने का निर्णय विचार के बाद लिया था। इस निर्णय को रिट के जरिए कोर्ट पुनरीक्षित नहीं कर सकती। बेंच ने कहा कि सिर्फ बरी हो जाने से कोई सरकारी नौक री के योग्य नहीं हो जाता। बहुत से ऐसे उम्मीदवार नियुक्त होने के लिए प्रतीक्षारत हैं, जिन पर कभी कोई अपराधिक आरोप तक नहीं लगा। इसी के साथ कोर्ट ने सिंगल बेंच का आदेश निरस्त कर दिया। अनावेदक का पक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता टीएस रूपराह व एके पांडे ने रखा।

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