सावधान: बिजली चोरी की जांच कर सकती है पुलिस

हाईकोर्ट ने कहा, खंडवा विशेष न्यायाधीश का आदेश निरस्त, आरोपी को कोर्ट में पेश होने के निर्देश

जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में अभिनिर्धारित किया है कि बिजली चोरी की शिकायत की जांच कर पुलिस अधिकारी अदालत में प्रकरण प्रस्तुत कर सकता है। इस अभिमत के साथ हाईकोर्ट ने विशेष न्यायाधीश विद्युत अधिनियम द्वारा दिए गए उस फैसले को निरस्त कर दिया, जिसमें पुलिस अधिकारी की जांच को स्वीकार करने से मना कर दिया गया था। कोर्ट ने प्रकरण को मूल रूप में पुनस्र्थापित कर आरोपी को 30 जनवरी को खंडवा जिला अदालत के समक्ष उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं।

यह है मामला-
राज्य विद्युत मंडल की ओर से पुनरीक्षण याचिका दायर की थी।  कहा गया था कि खंडवा जिले के बिजली विभाग के सहायक इंजीनियर रमाकांत केलकर ने 30 मार्च 2014 को पेठिया निवासी इमरान खां के खिलाफ बिजली चोरी की शिकायत जावर थाने में की। इस पर टीआई जावर ने  जांच के बाद विद्युत अधिनियम के तहत प्रकरण विशेष विद्युत न्यायाधीश खंडवा की अदालत में पेश किया। कोर्ट ने इसे यह कहते हुए खारिज कर दिया कि पुलिस अधिकारी को विद्युत अधिनियम के तहत जांच व प्रकरण प्रस्तुत करने का अधिकार नहीं है। इस आदेश को याचिका में असंवैधानिक बताते हुए चुनौती दी गई। सुनवाई के बाद कोर्ट ने कहा कि सीआरपीसी के तहत पुलिस अधिकारी को यह अधिकार है। लिहाजा प्रकरण अपने मूल नंबर पर यथावत किया जाए।
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Lali Kosta
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