National seminar : नकल से नहीं, मौलिक साहित्य के अध्ययन से बदलाव संभव

National seminar : नकल से नहीं, मौलिक साहित्य के अध्ययन से बदलाव संभव
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Tarunendra Singh Chauhan | Updated: 14 Jul 2019, 03:12:04 PM (IST) Jabalpur, Jabalpur, Madhya Pradesh, India

गवर्नमेंट महाकोशल कॉलेज में राष्ट्रीय संगोष्ठी

जबलपुर. वर्तमान दौर में होने वाली रिसर्च किसी बड़े परिणाम को सामने नहीं लाती, सिर्फ डिग्री लेने तक की सीमित रह गई है। रिसर्च करने वाले लोग सिर्फ पीएचडी की उपाधि लेने के लिए काम कर रहे हैं, जबकि उन्हें अपने शोध से सामाजिक तौर पर बड़े परिवर्तन लाने का काम करना चाहिए। यह कहना था उन वक्ताओं का जो कि राष्ट्रीय संगोष्ठी में शामिल हुए थे। शनिवार को गवर्नमेंट महाकोशल कॉलेज में अंतरराष्ट्रीय रिसर्च मैग्जीन शोध नर्मदा के अंतर्गत तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ किया गया। विषय शोध प्रविधि के मूलतत्व था। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ. आनंद प्रकाश त्रिपाठी, एचओडी डॉ. हरिसिंह गौर यूनिवर्सिटी सागर ने किया। उन्होंंने कहा कि शोध केवल पंरपरा का अन्वेषण ही नहीं है। आज अनुसंधान न होकर नकल की जा रही है जो वर्तमान शोध कार्य को कटघरे में चिंहित कर रही है। विमर्शों पर शोध के लिए समाजशास्त्रीय अध्ययन एवं मौलिक साहित्य के अध्ययन की अनिवार्यता होनी चाहिए।

शोध की समस्या और चुनौतियों पर बात
कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. आभा पाण्डेय प्रभारी प्राचार्य ने की। संगोष्ठी संयोजक डॉ. अरुण शुक्ल ने रूपरेखा पर प्रकाश डाला। संगोष्ठी के द्वितीय सत्र में डॉ. अरुण मिश्र, शिक्षाविद् द्वारा शोध की समस्या, चयन और परिकल्पना के साथ चुनौतियों पर प्रकाश डाला गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. ब्रजेश श्रीवास्तव ने किया। इस मौके पर डॉ. सारिता पाण्डेय, डॉ. गीता सरकार, डॉ. मुकेश शाह, डॉ. किरण जैन, डॉ. राजीव मिश्र, डॉ. रश्मि टंडन, डॉ. राजेन्द्र सिंह राजपूत, डॉ. शुभांगी धगट, डॉ. भावना तिवारी आदि उपस्थित थीं।

शोध व योजना से ही विकास सम्भव
विकास बिना योजना के संभव नहीं है। संपोषीय विकास ही विकास का मूल्य आधार होना चाहिए। यह बात राष्ट्रीय संगोष्ठी में युवा आर्थिक परिषद के अध्यक्ष डॉ. देवेन्द्र विश्वकर्मा ने कही। उन्होंने कहा कि शोध, योजना और विकास ही व्यक्ति का मूल आधार होना चाहिए। सामाजिक विज्ञान परिषद एवं विक्रमादित्य महाविद्यालय द्वारा शोध एवं विकास विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में डॉ. दिलीप सिंह हजारी ने कहा कि योजना के बिना सफलता मिलना मुश्किल है। संगोष्ठी में दिनेश सिंह, नितिन पटेल, अर्जुन शुक्ला, विजय अहिरवार आदि मौजूद रहे।

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