सरकारी अस्पताल में डॉक्टरों के आधे से ज्यादा पद खाली, मरीज बेहाल

सरकारी अस्पताल में डॉक्टरों के आधे से ज्यादा पद खाली, मरीज बेहाल

By: abhishek dixit

Published: 01 Mar 2020, 04:02 PM IST

जबलपुर . जिले के सरकारी अस्पतालों में बिस्तर बढ़ाने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों के स्वास्थ्य केन्द्रों में प्रसव सहित उपचार की सुविधाओं में विस्तार की कवायद हो रही है। ये अस्पताल पहले ही डॉक्टरों की कमी से जूझ़ रहे हैं। उपचार कराने के लिए आने वाले मरीज बेहाल हैं। समय पर चिकित्सकों का न परामर्श मिल पा रहा है, न ही गंभीर मर्ज की स्थिति में उनका समय पर ऑपरेशन हो पा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की भर्ती की कवायद के बीच एक वर्ष में पचास से ज्यादा डॉक्टरों को ऑफर दिया गया। लेकिन इक्का-दुक्का डॉक्टर नेही ज्वॉइन किया। सुविधाओं में विस्तार के बीच डॉक्टरों के आधे से ज्यादा पद खाली होने से मरीजों को बेहतर उपचार मिलना मुश्किल हो रहा है।

विशेषज्ञों की भारी कमी
सरकारी अस्पतालों में स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की भारी कमी है। एक अनुमान के मुताबिक जिले में विशेषज्ञों के करीब 70 फीसदी पद खाली हैं। इसमें ज्यादतर शहरी अस्पताल के साथ ही अन्य प्रशासनिक कार्य में लगे हैं। अस्पताल में भर्ती मरीजों की निगरानी के लिए भी चिकित्सक नहीं हैं। गाइडलाइन के अनुसार अस्पताल में भर्ती सात मरीज पर एक चिकित्सक होना चाहिए। लेकिन यहां एक-एक चिकित्सक पर दो से ज्यादा वार्ड देखने की जिम्मेदारी है। विशेषज्ञों के साथ-साथ चिकित्सा अधिकारी के कमी से मरीजों को बेहतर उपचार मिलना मुश्किल हो रहा है।

विस्तार के साथ बढ़ रही समस्या
विक्टोरिया जिला, एल्गिन सहित सिविल अस्पतालों में चिकित्सकों के पद अस्पताल की स्थापना के समय की बिस्तर क्षमता के अनुसार स्वीकृत हुए थे। मौजूदा स्थिति जिले में अस्पतालों की बिस्तर क्षमता दोगुनी हो चुकी है। अस्पतालों में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसके अनुरूप चिकित्सकों के नए पद सृजित नहीं किए जाने से स्वास्थ्य सुविधा सम्बंधित समस्या विकराल रूप ले रही है। चिकित्सकों की कमी से अस्पतालों की ओपीडी से लेकर इनडोर पेशेंट के उपचार की व्यवस्था लडखड़़ाई हुई है। निगरानी के अभाव में सरकारी स्वास्थ्य सेवा दम तोड़ रही है।

सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों के खाली पद है। यह जानकारी में आते ही डॉक्टरों की नियुक्ति के प्रयास शुरू कर दिए हैं। अस्पतालों से जानकारी मांगी गई है। इस समस्या को दूर करने की प्रक्रिया चल रही है।
तुलसी सिलावट, स्वास्थ्य मंत्री

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