दिखावा बने प्रीपेड बूथ, यात्रियों को नहीं मिल रहा फायदा

ट्रैफिक पुलिस द्वारा मुख्य स्टेशन और अधारताल में संचालित किए जा रहे हैं बूथ

जबलपुर, टै्रफिक पुलिस द्वारा मुख्य रेलवे स्टेशन और मदन महल स्टेशन प्रीपेड बूथ का संचालन तो किया जा रहा है, लेकिन ये दिखावा मात्र बनकर रह गए है। रोजाना मुख्य रेलवे स्टेशन पर 25 से 35 हजार यात्रियों का आना जाना होता है, लेकिन प्रीपेड बूथ एक सैकड़ा यात्रियों को भी यह सुविधा मुहैया नहीं करा पाता। इतना ही नहीं मदन महल से भी रोजाना पांच से सात हजार यात्री यात्री करते हैं, लेकिन यहां प्रीपेड बूथ की सेवा आधा सैकड़ा यात्रियों तक को नहीं मिल पाती। इसके पीछे की मुख्य वहज अफसरों द्वारा बूथों की नजरअंदाजगी और यहां तैनात कर्मियों की मनमानी है।
प्रीपेड बूथ क्रमांक एक
स्थान:- मुख्य रेलवे स्टेशन प्लेटफॉर्म क्रमांक छह
जिम्मेदार थाना:- घमापुर यातायात
24 घंटे में बुकिंग:- 80 लगभग
वहां से संचालित होने वाले कुल ऑटो:- 900
यह है हालात:- सुबह से शाम तक यहां चंद यात्री पहुंचते हैं। रात के वक्त आंकड़ा थोड़ा बढ़ता है। 24 घंटे में औसतन रोजाना 70 से 80 यात्री ही यहां बुकिंग कराते हैं। ऑटो चालकों की मनमानी के आगे यह बूथ यात्रियों के काम नहीं आ पा रहा है।
सिस्टम, फिर भी रहते हैं मौन
दोनों प्रीपेड बूथ में एलाउसमेंट के लिए सिस्टम लगाए गए हैं। जवानों को पूर्व में हिदायत दी गई थी कि ट्रेनों के आने के वक्त लगातार प्रीपेड बूथ के बारे में एलाउंस किया जाए, लेकिन चंद रोज तो यह एलाउसंमेंट चला, इसके बाद यह मनमर्जी का हो गया। आलम यह है कि अब तो यहां तैनात कर्मचारी एलाउसंमेंट तक की जहमत नहीं उठाते, जिस कारण यात्रियों को प्रीपेड बूथ होने की जानकारी ही नहीं लगती।
प्रीपेड बूथ क्रमांक दो
स्थान:- मदन महल स्टेशन प्लेटफॉर्म क्रमांक तीन
जिम्मेदार थाना:- मालवीय चौक यातायात
24 घंटे में बुकिंग:- 20 लगभग
वहां से संचालित होने वाले कुल ऑटो:- 300
यह है हालात:- यहां रोजाना औसतन 15 से 20 यात्री ही ऑटो बुक कराते हैं। रात में ट्रैफिक जवान की तैनाती की जाती है, लेकिन जैसे ही रात गहराती है, तो यहां तैनात जवान बूथ में लगे तखत पर बिस्तर डालकर सो जाते हैं। कई बार तो रात में यहां जवान तक नहीं रहते।
यहां नहीं है बूथ
मुख्य रेलवे स्टेशन प्लेटफॉर्म क्रमांक एक
मदन महल रेलवे स्टेशन प्लेटफॉर्म क्रमांक एक
गढ़ा रेलवे स्टेशन
अधारताल रेलवे स्टेशन
बल तैनात होता है:- तीन शिफ्ट में
तैनाती होती है:- एक पुलिस जवान की
रात में बाहरी यात्रियों के लिए था उपयोगी
खासकर बाहर से शहर आने वाले यात्रियों के लिए रात के वक्त यह बूथ काफी उपयोगी साबित हो रहा था। यात्री के मोबाइल नंबर और नाम के साथ ऑटो चालक और उसका नंबर भी ट्रैफिक पुलिस के पास होता था, लेकिन उचित प्रचार प्रसार के आभाव में बाहरी यात्रियों को इसका पता नहीं चल पाता और ऑटो चालक उनसे मनमाना किराया वसूलते हैं।
यह हैं कमियां
- यात्रियों को प्रीपेड बूथ होने की जानकारी न होना।
- ट्रैफिक पुलिस द्वारा प्रचार प्रसार न करना।
- प्लेटफॉर्म के भीतर से यात्रियों को ऑटो चालकों द्वारा बुक करना।
- बूथ होने के बावजूद सभी ऑटो का बूथ में रजिस्टे्रशन न होना।
- ट्रैफिक पुलिस के जवानों के भरोसे बूथ, अफसर करते हैं नजरअंदाज।
- रात के वक्त बूथ से ट्रैफिक जवानों को नदारत रहना।
- ऑटो चालकों पर ट्रैफिक पुलिस द्वारा सख्ती न करना।

virendra rajak
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