बड़े अस्पताल की करतूत, मुर्दे को जिंदा बताकर करते रहे इलाज

बड़े अस्पताल की करतूत, मुर्दे को जिंदा बताकर करते रहे इलाज
nurses dirty work

Lalit Kumar Kosta | Updated: 04 Jun 2019, 01:20:41 PM (IST) Jabalpur, Jabalpur, Madhya Pradesh, India

बड़े अस्पताल की करतूत, मुर्दे को जिंदा बताकर करते रहे इलाज

 

जबलपुर। अक्षय कुमार की फिल्म गब्बर इज बैक में एक सीन बहुत फेमस हुआ था, जब वह एक मुर्दे को भर्ती कराने के लिए प्राइवेट हॉस्पिटल में ले जाता है। जहां डॉक्टरों व स्टाफ द्वारा उससे लाखों रुपए ले लिए जाते हैं, अंत में उसे मुर्दा घोषित कर और पैसों की मांग की जाती है। जबकि वो व्यक्ति पहले ही मर चुका होता है। ये तो रही फिल्म की बात, जबलपुर में एक ऐसा ही मामला सामने आया है। जहां एक व्यक्ति के इलाज में लापरवाही बरतने और मौत होने के बाद भी उसे वेंटिलेशन में घंटों रखने के मामले में खुलासा हुआ है।

news facts-

- इलाज में लापरवाही से मौत
- दस लाख रुपए हर्जाना दे अस्पताल
- उपभोक्ता फोरम का अहम आदेश

 

hospital ka ganda khel

ये है पूरा मामला-

जिला उपभोक्ता फोरम ने अहम फैसले में शहर के निजी अस्पताल को मरीज की मौत के लिए इलाज में की गई लापरवाही को वजह माना। फोरम अध्यक्ष केके त्रिपाठी व सदस्य योगेश अग्रवाल की कोर्ट ने अस्पताल के मैनजिंग डायरेक्टर व इलाज के लिए जिम्मेदार डॉक्टर को आदेश दिए कि वे इसके एवज में मृतक के परिजन को दस लाख रुपए हर्जाना अदा करें। केस खर्च का दस हजार रुपए भी परिवादी को प्रदान किया जाए।


गोलछा अपार्टमेंट, साउथ सिविल लाइंस जबलपुर निवासी तृप्ति श्रीवास्तव, उनकी पुत्री चित्रांकिता व युयुत्सा की ओर से परिवाद दायर किया गया। कहा गया कि तृप्ति के पति अमूल्य चौरसिया एचडीएफसी इंश्योरेंस में क ार्यरत थे। 20 अगस्त 2012 की रात को लो ब्लड प्रेशर की शिकायत होने पर उन्हें दो नम्बर पुल नागरथ चौक के पास स्थित सिटी हॉस्पिटल ले जाया गया। अस्पताल में अमूल्य को

 

 

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आइसीयू में भर्ती कर दिया गया। रात में तबीयत अधिक बिगडऩे पर इलाज कर रहे डॉक्टर उमेश अग्रवाल को फोन कर बुलाया। लेकिन, उन्होंने कहा कि वे अगली सुबह आएंगे। 21 अगस्त 20172 को सुबह 9.30 बजे अमूल्य को फिर सांस लेने में दिक्कत हुई। बार-बार कहने के बावजूद एक घंटे बाद उनका इलाज शुरू किया गया। लेकिन, कुछ ही देर में मौत हो गई। इसके बाद भी अस्पताल प्रबधन ने शव वेंंटिलेटर पर रखवा दिया। अंतत: 12.30 बजे मृत घोषित किया गया।

अंतिम सुनवाई के बाद कोर्ट ने माना कि अनावदेकों की ओर से इलाज में की गई घोर लापरवाही की वजह से अमूल्य की मृत्यु हो गई। यह कृत्य उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत सेवा में कमी है। इसलिए अस्पताल प्रबंधन व डॉ. उमेश अग्रवाल परिवादियों को क्षतिपूर्ति बतौर 10 लाख रुपए दो माह के अंदर अदा करें। कोर्ट ने आदेशित किया कि परिवादियों को वाद-व्यय का दस हजार रुपए भी चुकाया जाए। अन्यथा 8 फीसदी ब्याज भी देना होगा।

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