scriptReadymade clothes industry jabalpur,salwar suits | देशभर में जबलपुर के गारमेंट इंडस्ट्री की चमक | Patrika News

देशभर में जबलपुर के गारमेंट इंडस्ट्री की चमक

हर के कारखानों में तैयार हो रहे बच्चों और बड़ों के कपड़े

 

 

जबलपुर

Published: October 23, 2021 11:41:25 am

जबलपुर@ज्ञानी रजक. शहर में बने रेडीमेड कपड़े अब महानगरों के शोरूम और दुकानों की शोभा बढ़ा रहे हैं। इससे गारमेंट इंडस्ट्री चमकने लगी है। यहां बने बच्चों एवं महिला और पुरुषों के कपड़ों को खूब पसंद किया जा रहा है। दीपावली को लेकर इनकी मांग भी बढ़ गई है। कुर्ता-पैजामा, शर्ट-जींस से लेकर कुर्तियों का मार्केट दिल्ली और नागपुर जैसे शहरों तक पहुंच गया है। करीब सवा सौ गारमेंट निर्माताओं ने अपने ब्रॉन्ड बनाएं हैं। इनका टे्रड मार्क लेने से लेकर रजिस्टर्ड भी कराया है।
garment industry
Readymade clothes made in the city are now adorning the showrooms and shops of the metros.
जबलपुर शहर गारमेंट इंडस्ट्री के रूप में स्थापित है। यहां के सलवार सूट दक्षिण भारत के अलावा कई राज्यों में प्रसिद्ध हैं। अब नई पीढ़ी सलवार सूट के अलावा होजरी और दूसरे वस्त्रों को तैयार करने में रुचि ले रही है। इसलिए इन कपड़ों की खपत जबलपुर के अलावा बड़े-बड़े शहरों में होने लगी है। शर्ट के कई ब्रॉन्ड चल रहे हैं। ऑफलाइन से लेकर ऑनलाइन बाजार में भी इनकी जबर्दस्त पूछपरख और खपत है। इसलिए कारखानों में उत्पादन दोगुना हो गया है।
बाहरी निर्भरता में आई कमी

थोक व्यापारियों की कुछ वस्त्रों को लेकर दूसरे प्रदेश व शहरों पर निर्भरता में थोड़ी कमी आई है। रेडीमेड गारमेंट क्लस्टर में कारखाना संचालक शुभम जैन ने बताया कि लोवर, कैफरी, निक्कर तथा स्पोट्र्स वेयर की बात करें तो इसमें बाहर से आने वाले माल में कमी आई है। लोवर व्यापक पैमाने पर यहां पर बनाया जा रहा है। 250 से ज्यादा कारखानों में यह काम हो रहा है। पहले दिल्ली और नागपुर से यह माल आता था, अब उल्टा इन्हीं शहरों में जबलपुर से लोवर जा रहे हैं। शिवांशु श्रीवास्तव का कहना है कि हमने ब्रॉन्ड पर ज्यादा ध्यान दिया है। इसलिए दूसरे शहरों में अपनी पहचान बना पाए हैं। ज्यादातर युवा इस व्यवसाय से जुड़ रहे हैं। वे नई सोच एवं तकनीक के साथ इस क्षेत्र में उतरे हैं।
यह है स्थिति
- जिले में 500 से अधिक छोटे-बड़े कारखाने।

- 300 करोड़ रुपए से ज्यादा वार्षिक टर्नओवर।

- 125 से ज्यादा में शर्ट और लोवर का काम।

- 20 से अधिक कारखानों में बनते हैं पेंट-शर्ट।
- 15 से अधिक में बच्चों के सूट व अन्य कपड़े।

-70-80 में सिर्फ बन रहे मास्क व पीपीई किट।

देशभर में जबलपुर के गारमेंट इंडस्ट्री की चमकयह हैं नए गारमेंट

बच्चों के इंडो वेस्टर्न सूट, कोट सूट, ब्लेजर, शर्ट, कैफरी, नैक्कर, लोवर, कुर्ता पैजामा, कोटी, शेरवानी आदि के कई कारखाने हो गए हैं। महिलाओं के लिए कुर्तियां, सलवार सूट, लैंगिंग्स एवं प्लाजो तैयार किया जा रहा है।
नई तकनीक आई

गारमेंट इंडस्ट्री के कारण कई युवाओं ने इनसे जुड़ी मशीनरी को स्थापित किया है। जींस पेंट और शर्ट के अलावा टी-शर्ट में मल्टीकलर प्रिटिंग, छोटे डाइंग एवं वाशिंग प्लांट, कटिंग की आधुनिक मशीने भी स्थापित हो गई हैं।
कोरोना काल में मास्क का कारोबार

कोरोनाकाल में यहां की कई इंडस्ट्री को नया काम मिल गया। उन्होंने परंपरागत वस्त्रों को छोडकऱ मास्क और पीपीई किट तैयार की। यहां बने रंग-बिरंगे मास्क की खपत पूरे देश में हैं। कई राज्यों के व्यापारी यहां आकर हजारों पीस मास्क एवं पीपीई किट ले जाते हैं। सूती, नेट और सिंथेटिक कपड़ों से बने मास्क खूब बिकते हैं। गारमेंट इंडस्ट्री से जुड़े लोगों ने बताया कि 70 से 80 कारखानों में अब केवल मास्क बन रहे हैं।

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