बरकतउल्ला विवि के असिस्टेंट प्रोफेसरों को राहत

हटाने का आदेश हाइकोर्ट ने किया निरस्त

By: prashant gadgil

Published: 10 May 2020, 12:01 PM IST

जबलपुर. मप्र हाइकोर्ट से भोपाल के बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के दर्जन भर असिस्टेंट प्रोफेसरों को राहत मिली। जस्टिस संजय द्विवेदी की सिंगल बेंच ने सभी की याचिकाएं स्वीकृत कर लीं। 12 फरवरी को सुरक्षित किया गया फैसला सुनाते हुए बेंच ने याचिकाकर्ताओं को हटाने का आदेश निरस्त कर दिया। भोपाल के पीयूष जायसवाल, जय नारायण ठाकरे, एस अलमेलु, कविता रावत सहित 12 असिस्टेंट प्रोफेसरों ने याचिकाएं दायर की थीं। अधिवक्ता संजय के अग्रवाल व स्वप्निल गांगुली ने कोर्ट को बताया कि 27 नवम्बर 2015 को भोपाल के बरकतउल्ला विवि ने असिस्टेंट प्रोफेसरों की संविदा पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किया। इसके परिप्रेक्ष्य में याचिकाकर्ताओं ने आवेदन दिए। सभी को योग्य पाकर संविदा के रूप में असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर विभिन्न विषयों के लिए नियुक्त कर लिया गया। तर्क दिया गया विज्ञापन की शर्तों के अनुसार ये नियुक्तियां 6 माह के लिए संविदा पर की गई थीं। शर्तों के अनुसार सफलता पूर्वक कार्य करते हुए यह अवधि पूरी करने पर संविदा अधिकतम 3 वर्ष के लिए बढ़ाई जा सकती थी। इसके अनुसार ही समय समय पर याचिकाकर्ताओं का कार्यकाल बढ़ाया जाता रहा। सभी का कार्यकाल समाप्त होने को था, उसके पूर्व विवि ने याचिकाकर्ताओं का कार्यकाल आगे बढ़ाने, न बढ़ाने पर विचार करने के लिए कमेटी बना दी। 18 दिसम्बर 2016 को कमेटी की बैठक में याचिकाकर्ताओं को हटाने का फैसला लिया गया। 21 दिसम्बर 2016 को याचिकाकर्ताओं को हटाने का आदेश जारी कर दिया गया। इसी आदेश को चुनौती देकर तर्क दिया गया कि 26 दिसम्बर 2016 को याचिकाकर्ताओं को आगामी नियुक्तियां होने तक अतिथि विद्वान के रूप में कार्य करने के लिए आमंत्रित किया गया। अधिवक्ताद्वय ने तर्क दिया कि विवि की निकास नीति के तहत जब तक विवि में सम्बंधित कोर्स संचालित हैं, तब तक संविदा पर नियुक्त किये गए असिस्टेंट प्रोफेसरों को हटाया नही जा सकता। तर्क से सहमत होकर कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को हटाने का आदेश खारिज कर दिया।

prashant gadgil Desk
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