जिम्मेदारों ने लापरवाही की, इसलिए फूटने लगा कोरोना बम

जबलपुर में जांच में लेटलतीफी से खतरनाक हुआ संक्रमण

 

By: shyam bihari

Published: 04 Aug 2020, 09:02 PM IST

जबलपुर। कोरोना से युद्ध के मोर्चे पर जबलपुर शहर में जिम्मेदारों की ढिलाई भारी पड़ रही है। होम क्वारंटीन और आइसोलेशन में निगरानी और सावधानी बरतने में लापरवाही से संक्रमितों की चेन लंबी हुई है। एक पखवाड़े में संक्रमण दर इतनी बढ़ गई है कि प्रत्येक दो दिन में औसतन सौ नए कोविड-19 पॉजिटिव केस मिल रहे हैं। संक्रमण का दायरा बढऩे के बीच संदिग्धों के नमूने की जांच में लेटलतीफी रोकथाम के प्रयासों में रोड़ा बन रही है। जांच रिपोर्ट आने में पांच से आठ दिन तक का समय लगने से कई संक्रमितों का समय पर उपचार शुरू नहीं हो रही है। उनके सम्पर्क में आकर अन्य लोग भी कोरोना की चपेट में आ रहे हैं। पहले तीन माह में कोरोना से जहां 14 मौतें हुई थी वहां उसके बाद प्रत्येक दो दिन में एक कोरोना संक्रमित दम तोड़ रहे हैं।

ऐसी ढिलाई हुई और बिगड़ी स्थिति
- पॉजिटिव आने पर करमचंद चौक के पास एक व्यक्ति को घर पर ही आइसोलेट किया गया। स्वास्थ्य विभाग की निगरानी में चूक और संक्रमित ने सावधानी में लापरवाही बरती। परिवार के दूसरे सदस्यों के साथ संक्रमित मिलता रहा। इससे परिवार के तीन और सदस्य कोरोना पॉजिटिव हो गए।
- हाईप्रोफाइल शादी-पार्टी में शामिल कई लोग मेजबान के कोरोना पॉजिटिव आने के बाद भी क्वारंटीन नहीं हुए। एक थाना प्रभारी ड्यूटी पर जाते रहे। उनके पॉजिटिव मिलने पर सम्पर्क में आए करीब 10 पुलिस कर्मियों के जरिए परिजन और आस-पड़ोस तक कोरोना संक्रमण फैल गया।
- अनलॉक के बाद सड़क, बाजार, अस्पताल में भीड़ बढ़ती चली गई। सोशल डिस्टेसिंग टूट गई। मास्क, सेनेटाइजेशन जैसी सावधानी बरते नहीं जाने और संदिग्धों के घूमने-फिरने से सम्पर्क में आकर कई लोग कोरोना की चपेट में आ गए। अस्पताल के स्टाफ तक संक्रमण पहुंच गया।
- बिना अनुमति नगर निगम के एक अधिकारी के पारिवारिक कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग शामिल होने और पार्टी का आयोजन करने वाले होटल संचालक के विरुद्ध कार्रवाई में नरमी हुई। इससे पार्टी करने वाले दूसरे लोग भी बेपरवाह हुई।

नमूने देने के बाद घूम रहे लोग
पॉजीटिव केस के सम्पर्क में आए व्यक्तियों और अन्य संदिग्धों की कोरोना टेस्ट रिपोर्ट काफी देर से मिल रही है। कई संदिग्ध नमूने देने के बाद रिपोर्ट नहीं आने तक क्वारंटीन होने के बजाय घूम-फिर रहे हैं। ऐसे में बाद में जब वे पॉजिटिव पाए जा रहे है तो उनके सम्पर्क में आकर संदिग्धों और संक्रमितों की संख्या बढ़ती जा रही है। अब बाहर से आने वाले लोग भी क्वारंटीन नहीं हो रहे है। लोगों ने कंट्रोल रूम में सूचना देना भी बंद कर दिया है।

बिना जांच बता दिए स्वस्थ
कोरोना के एक्टिव केस बढऩे और कुछ प्रभावशाली लोगों के संक्रमित मिलने के बाद होम आइसोलेशन पर कुछ मरीज रखे गए हैं। बिना लक्षण वाले कोरोना संक्रमितों को ही होम आइसोलेट किया जा रहा है। कोरोना से स्वस्थ्य हो चुके कुछ लोगों ने बताया कि होम आइसोलेशन के दौरान उनकी नियमित जांच और निगरानी नहीं हुई। 7-10 दिन में दो बार ही कोरोना कंट्रोल रुम से कॉल आया। अवधी पूरी हुई तो फोन पर डॉक्टरों ने स्वास्थ की जानकारी लेकर स्वस्थ बता दिया। डिस्चार्ज कर दिया। कोरोना से लड़ाई में भी आम और खास का फर्क उभरकर सामने आया है। सूत्रों के अनुसार प्रभावशाली लोगों के कोरोना संदिग्ध होने पर नमूने की जांच प्राथमिकता के आधार पर हो रही है। बीते दिनों एक संस्थान विशेष में एक अधिकारी के संक्रमित मिलने के बाद संबंधित संस्थान के लोगों के नमूने बड़ी संख्या में लिए गए। पुराने नमूनों की जांच रोक-कर इनके नमूनों की जांच प्राथमिकता के आधार पर की गई। इससे नमूनों की जांच का क्रम गड़बड़ा गया है। कई संदिग्धों की रिपोर्ट 5-8 दिन मिल रही है।

shyam bihari Desk
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned