एमपी के इस शहर में रोड कांग्रेस के मानक ध्वस्त, स्पीड ब्रेकर हुए खूनी

शहर की सडक़ों पर बेतरतीब ढंग से बनाए गए स्पीड ब्रेकर हादसों का कारण बन गए हैं। इनमें उछलकर आए दिन वाहन सवार घायल हो रहे हैं। सडक़ निर्माण एजेंसियों की लापरवाही और रसूखदारों की मनमानी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता कि मुख्य सडक़ों से लेकर मोहल्लों की गलियों में डेढ़-डेढ़ फीट ऊंचे स्पीड ब्रेकर बना दिए गए हैं। नगर निगम व ट्रैफिक पुलिस रोड कांग्रेस के मानकों व हाईकोर्ट के दिशानिर्देशों का भी पालन नही कर रहे हैं।

जबलपुर। शहर की सडक़ों पर बेतरतीब ढंग से बनाए गए स्पीड ब्रेकर हादसों का कारण बन गए हैं। इनमें उछलकर आए दिन वाहन सवार घायल हो रहे हैं। सडक़ निर्माण एजेंसियों की लापरवाही और रसूखदारों की मनमानी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता कि मुख्य सडक़ों से लेकर मोहल्लों की गलियों में डेढ़-डेढ़ फीट ऊंचे स्पीड ब्रेकर बना दिए गए हैं। कई तो इतने ऊंचे हैं कि इनमें वाहन का निचला हिस्सा तक टकरा जाता है। नगर निगम व ट्रैफिक पुलिस रोड कांग्रेस के मानकों व हाईकोर्ट के दिशानिर्देशों का भी पालन नही कर रहे हैं।

हाईकोर्ट का निर्देश

1983 में जबलपुर के अधिवक्ता स्व. जेपी संघी ने बेतरतीब ढंग से बनाए गए स्पीड ब्रेकर्स को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। कोर्ट ने यह कहते हुए याचिका का निराकरण किया था कि सरकार स्पीड ब्रेकर्स के लिए नियम बनाएगी। कोर्ट ने निर्देश दिए थे कि स्पीड ब्रेकर बनाए जाएं, उस स्थान से पहले सडक़ पर स्पष्ट संकेतक के जरिए सूचना प्रदर्शित करनी होगी। सडक़ पर भी सांकेतिक लाइनों के जरिए इसे दर्शाया जाना चाहिए।

रोड कांग्रेस के मानक और हकीकत

- ऊंचाई: आदर्श स्पीड ब्रेकर की ऊंचाई 10 सेंटीमीटर हो
हकीकत : एक से डेढ़ फीट है ऊंचाई।

- लंबाई: 3.5 मीटर व वृत्ताकार क्षेत्र यानी कर्वेचर रेडियस 17 मीटर होना चाहिए।

- संकेतक: ड्राइवर को सचेत करने के लिए स्पीड ब्रेकर आने से 40 मीटर पहले चेतावनी बोर्ड जरूरी।
हकीकत: गिने-चुने स्थान पर बोर्ड लगे हैं। उनमें भी विज्ञापन के पोस्टर चस्पा हैं।

- रफ्तार: स्पीड ब्रेकर का मकसद वाहनों की रफ्तार को 20-30 किमी प्रति घंटा तक कर हादसों की आशंका को कम करना है।
हकीकत: संकेतक बोर्ड नहीं होने से वाहन चालक को ब्रेकर नजर नहीं आता। रफ्तार अधिक होने से हादसे होते हैं।

- थर्मोप्लास्टिक पेंट की पट्टियां : स्पीड ब्रेकर पर थर्मोप्लास्टिक पेंट से पट्टियां बनाई जानी चाहिए, जिससे रात में वे ड्राइवरों की नजरों से न चूकें।
हकीकत: शहर की चार-पांच सडक़ों को छोड़ कहीं भी थर्मोप्लास्टिक पेंट की पट्ट नहीं लगाई गई।

- यहां बनाए जा सकते हैं : चौराहा, अस्पताल या स्कूल, रिहाइशी इलाकों में हर 80 से 110 मीटर की दूरी पर
हकीकत : किसी मानक का पालन नहीं हो रहा

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praveen chaturvedi Desk
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