
sc st act big judgement by high court
जबलपुर. मप्र हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि एससीएसटी एट्रोसिटी एक्ट के मामलों पर संज्ञान लेने का अधिकार केवल इस एक्ट के तहत गठित विशेष न्यायालयों को है। प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी (जेएमएफसी) इस अधिनियम के तहत दर्ज मामलों पर संज्ञान नहीं ले सकते। जस्टिस एसके पालो की कोर्ट ने याचिकाकर्ता पर बालाघाट अनुसूचित जाति, जनजाति थाने में एससीएसटी एट्रोसिटी एक्ट के तहत दर्ज प्रकरण पर रोक लगा दी।
news fact- प्रकरण पर जेएमएफसी कोर्ट नहीं ले सकती संज्ञान
हाईकोर्ट का अहम निर्देश
बालाघाट निवासी मौसम हरिनखेड़े ने याचिका दायर कर कहा था कि उसके खिलाफ बालाघाट अजाक थाने में 22 फरवरी 2015 को शारदा मेश्राम नामक महिला ने मारपीट व गालीगलौज की शिकायत देकर याचिकाकर्ता पर एसएसीएसटी एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज करने का आग्रह किया। इस पर 23 फरवरी 2015 को अजाक थाना प्रभारी ने एसपी बालाघाट को रिपोर्ट भेजकर बताया कि शारदा मेश्राम का आरोप बेबुनियाद है। इसके बाद शिकायतकर्ता ने जिला अदालत में परिवाद दायर किया।
जेएमएफसी कोर्ट ने याचिकाकर्ता पर धारा 323,341 के तहत केस दर्ज कर लिया। इस आदेश को शिकायतकर्ता ने एडीजे कोर्ट में अपील के जरिए चुनौती दी। 25 मई 2018 को एडीजे कोर्ट ने जेएमएफसी कोर्ट का आदेश निरस्त कर दिया। कोर्ट को निर्देश दिए गए कि शिकायतकर्ता के कथनानुसार याचिकाककर्ता पर एससीएसटी एट्रोसिटी एक्ट 1989 की धारा 3 (1 )( 10) के तहत प्रकरण दर्ज किया जाए। जेएमएफसी कोर्ट ने याचिकाकर्ता पर इस अधिनियम के तहत प्रकरण पंजीबद्ध फिर कर लिया। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता संजय अग्रवाल व स्वप्निल गांगुली ने कोर्ट को बताया कि जेएमएफसी को यह अधिकार नहीं है।
Published on:
12 Aug 2018 12:00 pm
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