स्कूलों को 5 साल में लेनी होगी मान्यता

स्कूलों को 5 साल में लेनी होगी मान्यता

Sudarshan Kumar Ahirwar | Publish: Jul, 14 2018 07:30:00 AM (IST) Jabalpur, Madhya Pradesh, India

सीबीएसइ ने मान्यता संबंधी नियमों में किया बदलाव, अब स्थाई मान्यता नहीं मिलेगी

जबलपुर. अब सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) से स्कूलों को हर पांच साल में मान्यता लेने के लिए बोर्ड को आवेदन करना होगा। उन्हें पहले की तरह एक बार में स्थाई मान्यता नहीं मिलेगी। हाल ही में सीबीएसई ने मान्यता लेने की आवेदन प्रक्रिया में बदलाव किया है जिसको लेकर सभी स्कूलों को निर्देश जारी कर दिए हैं कि अब उन्हें स्थाई मान्यता नहीं मिलेगी, बल्कि उन्हें मान्यता लेने के लिए नए नियमों के तहत आवेदन करना होगा। शहर में सीबीएसई से संबंधित लगभग 80 स्कूल संचालित हैं। ऐसे में प्रत्येक स्कूल को 2019-2020 सेशन से नए नियमों के मुताबिक मान्यता के लिए आवेदन करना होगा। अभी तक 15 साल पुराने स्कूल को स्थाई मान्यता मिल जाती थी। इसको लेकर उन्हें बार-बार मान्यता के लिए आवेदन नहीं करना पड़ता था।

देनी होगी रिपोर्ट
मान्यता के नए नियम के तहत पहले स्कूल की एक रिपोर्ट बना कर बोर्ड को भेजनी होगी। इसमें स्कूल की इमारत की जानकारी, सुरक्षा मानक, बाउंड्रीवाल, इंटरनेट, क्लासरूम, स्टूडेंट्स और टीचर्स की संख्या, टीचर्स रेशियो, इंफ्रास्ट्रक्चर, स्पोट्र्स ग्राउंड, स्कूल एक्टिविटीज, स्कूल का रिजल्ट, टीचर्स की योग्यता, बस में सुरक्षा मानक, लैबोरेटरीज आदि बिंदुओं पर जानकारी देनी होगी। इस रिपोर्ट के आधार पर बोर्ड संबंधित स्कूल को मान्यता देगा।

एनसीइआरटी की गाइडलाइन, स्कूल की मासिक बैठक अनिवार्य
जबलपुर. स्कू लों की गुणवत्ता और शिक्षा स्तर को बेहतर बनाने के साथ-साथ परिसर में सहयोगी वातावरण बनाने के लिए एनसीइआरटी ने सभी स्कूल प्रबंधन समिति को सुझाव दिया है कि माह में एक बार बैठक आयोजित की जाए। इसके लिए अभिभावकों को बैठक के तीन दिन पहले लिखित में सूचना दी जाए। इसके अलावा स्कूल प्रबंधन समिति जरूरत पडने पर एक से अधिक बैठकें आयोजित कर सकती है।

एनसीईआरटी ने यह भी कहा कि बैठक में स्टूडेंट्स की नियमित उपस्थित को लेकर चर्चा की जानी चाहिए। नियमित उपस्थिति से जहां एक ओर शिक्षा की गुणवत्ता और बेहतर होगी। छात्रों को एनसीआरटी द्वारा फ्रेंडली माहौल भी उपलब्ध कराया जाए। यह निर्धारित किया जाए कि स्टूडेंट्स को शारीरिक दंड न दिया जाए। स्टूडेंट्स पर मेंटल हरेस्मेंट न किया जाए। मध्यान्ह भोजन, सामाजिक सर्वेक्षण, कैंपस वातावण पर भी चर्चा की जानी चाहिए।

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