MP के कॉलेजों में पढऩे वाली हर 17 वीं लडक़ी को हुई ये गंभीर बीमारी

MP के कॉलेजों में पढऩे वाली हर 17 वीं लडक़ी को हुई ये गंभीर बीमारी
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Deepankar Roy | Updated: 06 Jan 2019, 10:48:01 PM (IST) Jabalpur, Jabalpur, Madhya Pradesh, India

मेडिकल यूनिवर्सिटी की २६ जिलों में जांच में खुलासा

जबलपुर. प्रदेश के कॉलेजों में पढ़ रहीं सौ में से करीब 17 छात्राएं एक बीमारी से जूझ रही है। चार जिलों में तो इस बीमारी से पीडि़त छात्राओं की संख्या 30 प्रतिशत से भी अधिक है। यह जानकारी मप्र आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय की ओर से चलाए गए स्वस्थ नारी स्वस्थ्य प्रदेश अभियान में सामने आई है। अभियान के तहत प्रदेश के 26 जिलों में अलग-अलग कॉलेजों की 18 से 25 वर्ष की छात्र-छात्राओं के खून के नमूने लेकर उसमें हीमोग्लोबिन की मात्रा की जांच की गई। करीब 93 हजार छात्राओं का परीक्षण किया है। इसमें १६.६९ प्रतिशत एनीमिया से पीडि़त मिली है। कुछ छात्राओं में तो हीमोग्लोबिन की मात्रा खतरनाक स्तर तक कम मिली है।

एेसे की चली जांच

विवि की निगरानी में विशेषज्ञ चिकित्सक और पैरामेडिकल स्टाफ ने कॉलेजों में १८ से २५ वर्ष की अध्ययनरत छात्राओं के खून के नमूने लिए। हीमोग्लोबिन के स्तर का परीक्षण किया गया। इसे तीन वर्ग में बांटा गया। १० प्रतिशत से अधिक हीमोग्लोबिन की मात्रा पर सामान्य माना गया। १० से सात प्रतिशत के बीच एचबी होने पर एनीमिक और सात से कम हीमोग्लोबिन की मात्रा पर छात्रा को सीवर एनीमिक श्रेणी में रखा है।

फास्ट फूड बड़ी वजह

छात्राओं के होमीग्लोबिन परीक्षण शिविर के दौरान बातचीत में यह सामने आया है कि अधिकतर छात्राएं पौष्टिक खानपान को लेकर जागरूक नहीं हैं। विकृत जीवन शैली और खान-पान में अनियमितता के कारण छात्राओं पर्याप्त पोषक तत्व प्राप्त नहीं हो रहे है। महानगरों में एनीमिक छात्राओं में अधिकांश फास्ट फूड लवर्स मिली है।

बाकी जिलों में भी होगी जांच
राज्यपाल आनंदी बेन पटेल के निर्देश पर विवि की ओर से स्वस्थ्य नारी स्वस्थ्य प्रदेश अभियान की शुरुआत की गई। राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने मैटरनल मोर्टिलिटी रेट को लेकर चिंता जताते हुए विवि को छात्राओं के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए कहा था। संतुलित आहार की जानकारी देकर बेहतर सेहत और मातृत्व मृत्यु दर कम करने की मंशा जताई थी। इसके तहत ३१ अगस्त से एक नवम्बर, २०१८ के बीच कॉलेजों में जांच की गई। राज्यपाल ने अभियान की समयावधि बढ़ा दी है।

प्रमुख महानगर में

शहर - एनीमिया (प्रतिशत में)
जबलपुर - १६.३५

भोपाल - १६.०८
ग्वालियर - १७.१०

इंदौर - १३.३३

यहां सबसे कम एनीमिक

विदिशा - २.७०
झाबुआ - ३.७६

छतरपुर - ८.१६
रीवा - १०.१३

इन जिले में सबसे अधिक

सिवनी - ३७.१४
सतना - ३५.९३

रतलाम - ३३.०९
छिंदवाड़ा - ३१.८२

नोट: जिनका हीमोग्लोबिन १० से ७ प्रतिशत के बीच है।
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- २६ जिले अभियान में शामिल

- ९८ कॉलेजों में जांच शिविर
- ९३३४० छात्राओं का परीक्षण

- १६.६९ प्रतिशत एनीमिक मिली
- १४९९० छात्राएं एनीमिया पीडि़त

- ५५३ छात्राएं इसमें सीवर एनीमिक
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वर्जन
एमपीएमएसयू में विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी डॉ. तृप्ति गुप्ता के अनुसार अभियान में २६ जिलों में छात्राओं के हीमोग्लोबिन की मात्रा जांची गई है। १६ प्रतिशत से अधिक छात्राएं एनीमिक मिली है। कुछ सीवर एनीमिया की शिकार है। इनका उपचार किया जा रहा है।

मप्र आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय में कुलपति डॉ. आरएस शर्मा के अनुसार राज्यपाल के निर्देश पर छात्राओं को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के लिए यह अभियान चलाया गया है। इसमें छात्राओं में हीमोग्लोबिन की मात्रा जांची जा रही है। एनीमिया से पीडि़त मिल रही छात्राओं को संतुलित आहार की जानकारी भी दी जा रही है।

 

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