scriptshiv Aaradhna in Jabalpur | तंत्र साधना करने के लिए विख्यात है मंदिर | Patrika News

तंत्र साधना करने के लिए विख्यात है मंदिर

जिलहरीघाट: एक हजार वर्ष पुराना है कुशावर्तेश्वर मंदिर

जबलपुर

Published: July 31, 2022 06:10:13 pm

जबलपुर। शिव पुत्री कहलाने वाली नर्मदा के हर कंकड़ को शंकर कहा गया है। तभी तो अमरकंटक से लेकर भरूच तक इनके हर घाट पर महादेव विराजमान हैं। देश के सबसे प्रसिद्ध व प्राचीन शिवालय नर्मदा के किनारे ही स्थित हैं। ऐसा ही एक प्राचीन शिवालय नर्मदा तट जिलहरीघाट में स्थित है। इसे कुशवावर्तेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है। तंत्र साधना के लिए यह शिवालय प्रसिद्ध है, जहां दूर-दूर से तांत्रिक और साधक आते हैं। सावन में यहां शिवभक्तों का तांता लगता है।
एक हजार वर्ष से अधिक पुराना- इसके निर्माण के वास्तविक काल की जानकारी तो किसी के पास नहीं है, लेकिन मंदिर के बारे में वसंत चिटणीस मालगुजार सुहजनी वाले बताते हैं कि यह मंदिर लगभग 565 वर्षों से उनके परिवार के संरक्षण में हैं। इतिहासकार प्रो. आनन्द ङ्क्षसह राणा बताते हैं कि यह मंदिर जबलपुर में नर्मदा नदी के उत्तर तट पर स्थित सभी प्राचीन मंदिरों से भी प्राचीन है। इसका इतिहास लगभग एक हजार वर्ष पुराना है। यहां सावन में हर साल बड़ी संख्या में लोग भोलेनाथ का अभिषेक करने के लिए पहुंचते हैं।
नर्मदा का आकर्षक नजारा- महाराष्ट्र ब्रह्मवृन्द समाज के पदाधिकारियों ने बताया कि यह अत्यंत ख्याति प्राप्त मंदिर है। यहां दूर-दूर से भक्त आते हैं और महादेव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। यह प्रकृति की गोद में बसा अति मनोहर मंदिर है, मंदिर प्रांगण में भ्रमण की पर्याप्त व्यवस्था है और उसके सामने की ओर नर्मदा नदी का मनोरम तट इसकी सुंदरता को दोगुना कर देता है। यहां से मां नर्मदा का सौंदर्य भी आकर्षक दिखता है। यहां का वातावरण बहुत शांत है।
पहले था कुंड- यह स्वयंसिद्ध मंदिर है, जहां पर प्रारंभ में एक कुंड था। जिसमें शिवङ्क्षलग के नीचे जिलहरी ही स्थित थी। इसी कारण से नर्मदा नदी के इस घाट को जिलहरी घाट के नाम से जाना जाने लगा। कालांतर में इस कुंड को बंद करके उसी स्थान पर वर्तमान मंदिर का निर्माण किया गया।

जिलहरीघाट: एक हजार वर्ष पुराना है कुशावर्तेश्वर मंदिर
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