एनआईसी वैज्ञानिक की एडमिनिस्ट्रेटर पद पर नहीं हो सकी नियुक्ति, लगी फटकार

व्यापमं के लिए गठित एसआईटी के सदस्य को डीमैट की कमान, 20 सितम्बर को प्रस्तावित है ऑनलाइन परीक्षा

जबलपुर। हाईकोर्ट ने बुधवार को डीमैट मामले की सुनवाई करते हुए 20 सितंबर को प्रस्तावित ऑनलाइन परीक्षा की देखरेख की कमान व्यापमं घोटाले की जांच के लिए गठित एसआईटी के सदस्य सीएल रेड्डी को सौंप दी है। रेड्डी को परीक्षा के पूर्ण तकनीकी नियंत्रण और मॉनीटरिंग का जिम्मा दिया गया है। इसके पहले चीफ जस्टिस एएम खानविलकर व  जस्टिस केके त्रिवेदी की विशेष खंडपीठ ने  एनआईसी (नेशनल इंफोरमेटिक्स सेंटर) के वैज्ञानिक की परीक्षा के डेटाबेस एडमिनिस्ट्रेटर पद पर नियुक्ति न कर पाने के मामले पर केंद्र सरकार को जमकर फटकार लगाई।
एपीडीएमसी ने रोया रोना
इसके पूर्व एपीडीएमसी (एसोसिएशन ऑफ प्राईवेट डेंटल एंड मेडिकल कॉलेजेस) की ओर से  कोर्ट को बताया गया कि ऑनलाइन डीमेट परीक्षा  की मॉनीटरिंग के लिए एनआईसी ने सी गे्रड वैज्ञानिक की नियुक्ति बतौर डेटाबेस एडमिनिस्ट्रेटर करने से इनकार कर दिया है। एनआईसी ने कहा है कि वह निजी संस्थाओं के लिए वैज्ञानिकों की सेवा उपलब्ध नहीं कराती। इस पर खंडपीठ ने केंद्र सरकार के असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल जेके जैन से कहा कि वे तत्काल एनआईसी से संपर्क करें। इसके बाद कोर्ट ने 10 मिनट का समय देते हुए सुनवाई स्थगित कर दी।
केंद्र का फटकार
पुन: जब कोर्ट में मामले की सुनवाई शुरू हुई तो केंद्र सरकार की ओर से असिस्टेंट सॉलिसिटर जैन ने इसके लिए और समय देने की याचना की। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की। कोर्ट ने उन्हें कहा कि 20 सितंबर को परीक्षा प्रस्तावित है।
कट ऑफ डेट पूरी होने समय नहीं बचा
 सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार प्रवेश परीक्षा के बाद 30 सितंबर तक प्रवेश प्रक्रिया पूरी कर ली जानी है। कट ऑफ डेट पूरी होने में ज्यादा समय नहीं बचा है। लिहाजा  वे नियुक्ति नहीं कर सकते तो खंंडपीठ स्वयं परीक्षा के लिए ऑब्जर्वर नियुक्त कर देगी। याचिकाकर्ता पारस सकचेला की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आदर्शमुनि त्रिवेदी ने कोर्ट के मत का समर्थन किया। कोर्ट ने केंद्र सरकार की लाचारी के मद्देनजर एनआईसी के पूर्व डायरेक्टर व व्यापमं घोटाले के लिए गठित एसआईटी के सदस्य सीएल रेड्डी को डीमेट परीक्षा का ऑब्जर्वर नियुक्त कर दिया। याचिकाकर्ता का पक्ष अधिवक्ता प्रशांत अवस्थी, आशीष त्रिवेदी, असीम त्रिवेदी, आनंद शुक्ला व एपीडीएमसी का पक्ष एपी श्रोती ने रखा। न्यायमित्र की भूमिका में  अधिवक्ता संजय वर्मा मौजूद रहे।
पांच छात्रों को राहत नहीं
इस के साथ ही अनंत कुमार, प्रशांत पचौरी, उमेश असाटी सहित 5 छात्रों की हस्तक्षेप याचिकाओं का भी कोर्ट ने यह कहते हुए निपटारा कर दिया कि परीक्षा की सभी औपचारिकताए पूरी हो चुकी हैं, लिहाजा उन्हें परीक्षा में शामिल किया जाना अब संभव नहीं है।  इन छात्रों ने याचिकाओं मंें कहा था कि हाईकोर्ट डीमेट परीक्षा की मॉनीटरिंग कर रही है, इसलिए उन्हें अब इस परीक्षा पर विश्वास हो गया है। वे पहले  इसमें शामिल होने के इच्छुक नहीं थे, लेकिन अब वे इसमें शामिल होना चाहते हैं। कोर्ट ने छात्रों की इस मांग को ठुकरा दिया।

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