scriptSoil fertile-weather friendly, yet there is a crisis of land | मिट्टी उपजाऊ-मौसम अनुकूल, फिर भी जैविक खेती की ट्रेनिंग के लिए 30 साल से जमीन का संंकट | Patrika News

मिट्टी उपजाऊ-मौसम अनुकूल, फिर भी जैविक खेती की ट्रेनिंग के लिए 30 साल से जमीन का संंकट

जबलपुर में जैविक खेती के प्रति बढ़ रहा रुझान, स्ट्राबेरी और सेब जैसी खेती की बढ़ीं उम्मीदें, जरूरत प्रशिक्षण और प्रोत्साहन की है

 

जबलपुर

Published: April 09, 2022 07:46:00 pm

श्याम बिहारी सिंह @ जबलपुर। शहर स्थिति कृषि विवि के वैज्ञानिक जैविक खेती को बढ़ावा देने के साथ स्ट्राबेरी और सेब की खेती करने की कोशिश में लगे हैं। उनका प्रयास है कि किसान जैविक खेती की ओर बढ़ें। साथ में ऐसी खेती का रिस्क लें, जो अभी तक यहां नहीं होती। वैज्ञानिकों का मानना है कि जिले की मिट्टी और मौसम स्ट्राबेरी ओर सेब की खेती के अनुकूल है। किसानों को जैविक खेती के साथ इन फसलों के प्रति प्रोत्साहित करना चाहिए। लेकिन, जैविक खेती के प्रशिक्षण केंद्र को बीते 30 साल से जमीन नहीं मुहैया हो पाई। इस केंद्र को यहां से नागपुर भेजने की भी तैयारी हो गई थी। फिलहाल आश्वासन मिला है कि केंद्र जबलपुर में ही रहेगा।

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बजट का रोना

कहने को तो मप्र में जैविक खेती को बढ़ावा के लिए सरकार कई योजनाओं पर काम करने का दावा कर रही है। लेकिन, जबलपुर के किसानों को 30 साल से जैविक खेती का प्रशिक्षण देने वाले के लिए केंद्र बनाने के लिए जमीन नहीं मिल पाई। शहर के विजय नगर में किराए के भवन में चले रहे क्षेत्रीय जैविक खाद संस्थान 'रीजनल सेंटर ऑफ आर्गेनिक फार्मिंगÓ का फायदा अभी तक खास नहीं दिख रहा। फिर भी यह क्षेत्र के लिए जरूरी है। यह मप्र का अकेला जैविक खाद प्रशिक्षण संस्थान है। इसे जमीन आवंटित नहीं होने के चलते नागपुर शिफ्ट करने की तैयारी कर ली गई थी। हालांकि, विरोध होने पर मामला टाल दिया गया है। इसके पहले राष्ट्रीय जैविक एवं प्राकृतिक खेती केंद्र ने 11 मार्च 2022 को आदेश जारी कर जबलपुर के सेंटर को नागपुर के रीजनल सेंटर ऑफ आर्गेनिक फार्मिंग में समायोजित करने के लिए कहा था। इसका विरोध हुआ तो मुद्दा राजनीतिक बन गया। सांसद राकेश सिंह ने जानकारी दी कि उक्त केंद्र को नागपुर शिफ्ट नहीं किया जाएगा।

सेब के पौधों में खिले फूल तो बढ़ा उत्साह

14 महीने पहले प्रयोग के रूप में शहर के कृषि विश्वद्यिालय परिसर में सेब के पौधे रोपे गए थे। इनमें फूल खिले, तो कृषि वैज्ञानिकों का उत्साह बढ़ा है। इनमें फल आ गए, तो जिले के लिए बड़ी बात होगी। बताया गया कि शिमला से सेब के 10 पौधे मंगवाए थे। इनमें से सात पौधों का अच्छा विकास हुआ है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार जबलपुर का मौसम सेब के लिए अनुकूल दिख रहा है। यहां पूरे साल धूप होती है। मिट्टी भी अनुकूल है। यदि कृषि विवि परिसर में रोपे गए सेब के पौधों में फल आ गए, तो यह प्रयोग सफल हो जाएगा। यह किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।

नकदी फसल को बढ़ावा

जबलुपर जिले के ज्यादातर किसान अभी भी परम्परागत तरीके से खेती करते हैं। ऐसे में उन्हें मेहनत के हिसाब से हमेशा कीमत नहीं मिल पाती। इस बात को ध्यान में रखते हुए कृषि विवि में कोशिश की जा रही है कि स्ट्राबेरी को नकदी फसल के रूप में बढ़ावा दिया जाए। अभी विवि परिसर में तो इस पर योजनाबद्ध तरीके से काम नहीं शुरू किया गया है। लेकिन, कृषि विवि से सेवानिवृत्त एक वैज्ञानिक ने जबलपुर में स्ट्रॉबेरी की खेती की शुरुआत है। उनका कहना है कि अभी तक इसका परिणाम संतोषजनक है। उन्होंने टिश्यू कल्चर के पौध रोपे थे। बाकी किसान भी उनसे सम्पर्क कर रहे हैं।

वर्जनअभी तक हमारे पास कोई प्रपोजन नहीं आया है। यदि जैविक खेती सम्बंधी केंद्र के लिए जमीन की मांग का प्रपोजल आएगा, तो जरूरी प्रक्रिया तुरंत की जाएगी।

डॉ. इलैयाराजा टी, कलेक्टर

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