श्री श्री रविशंकर का एमपी के इस शहर से है खास नाता, खोलेंगे आश्रम

आर्ट ऑफ लिविंग को यूनिवर्सिटी के पाठ्यक्रम में शामिल किए जाने के मामले में दिया ये जवाब

By: Premshankar Tiwari

Published: 10 Mar 2018, 07:37 AM IST

जबलपुर। आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर शहर में अपना आश्रम खोलेंगे। इस बात के संकेत उन्होंने शुक्रवार को शहर प्रवास के दौरान दिए। पत्रिका से अनौपचारिक चर्चा में श्री श्री ने कहा कि यदि समाज के लोग और साधक यदि चाहेंगे तो संस्कारधानी में आर्ट लिविंग का आश्रम, संस्थान खोला जा सकता है। यदि जनता की आवाज आई तो निश्चित ही इस पर विचार किया जाएगा। आर्ट ऑफ लिविंग का आश्रम से शुरू होने से कई अध्यात्मिक केंद्रों के लिए पहचानी जाने वाली संस्कारधानी के साथ एक और महत्वपूर्ण संस्थान जुड़ जाएगा।

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नक्सलियों का हृदय परिवर्तन
श्री श्री ने कहा, आर्ट ऑफ लिविंग को विश्वविद्यालय के पाठयक्रम में शामिल किए जाने पर अभी विचार नहीं है। यदि मांग आती है तो इस पर पहल की जाएगी। उन्होंने अमरकंटक विवि में संत सम्मेलन आयोजित किए जाने पर विचार किए जाने की बात कही। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के सम्बंध में कहा कि आर्ट ऑफ लिविंग के माध्यम से नक्सलियों में भी हृदय परिवर्तन हुआ है। झारखंड जैसे नक्सल प्रभावित क्षेत्र में उनके द्वारा कार्यक्रम किए गए। लोगों के बीच गए और समझाया गया। वर्ष 2009 में 1100 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया।

इसलिए जबलपुर से खास नाता
श्री श्री रविशंकर का जबलपुर के साथ बेहद खास और पुराना नाता है। उनके गुरू की नगरी संस्कारधानी ही है। रविशंकर के महर्षि महेश योगी के शिष्य थे। श्री श्री के पिता ने उन्हें महेश योगी को सौंप दिया था। अपनी विद्वता के कारण रविशंकर महेश योगी के प्रिय शिष्य थे। संस्कारधानी महर्षि महेश योगी कर्मयोगी की कर्मभूमि रही है। अपने गुरू से खास रिश्तें के कारण श्री श्री के संस्कारधानी में आश्रम शुरू करने की संभावनाएं है।

 

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Premshankar Tiwari Desk
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