स्ट्रीट वेंडर का दो साल का बेटा subglottic stenosis बीमारी से पीड़ित, कृत्रिम सांस के सहारे जीवित

-दुर्लभ बीमारी है subglottic stenosis

-इलाज के लिए चाहिए लाखों रुपये
-मदद की लगाई है गुहार

By: Ajay Chaturvedi

Updated: 16 Sep 2021, 11:33 AM IST

जबलपुर. जिले के स्ट्रीट वेंडर आकाश वथाव का दो साल का बेटा गंभीर बीमारी से जूझ रहा है। वह प्राकृतिक रूप से सांस नहीं ले सकता। लिहाजा श्वसन क्रिया के लिए बच्चे के गले के नीचे छेद कर नली डाली गई है जिसकी मदद से वो सांस ले पाता है। चिकित्सकों के मुताबिक बच्चा subglottic stenosis बीमारी से पीड़ित है। इसके इलाज के पर लाखों रुपये खर्च का अनुमान लगाया जा रहा है। लेकिन परिवार के पास इतने पैसे नहीं हैं कि वो समुचित इलाज करा सके। ऐसे में मासूम बच्चे के पिता ने शासन-प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है।

दुर्लभ बीमारी subglottic stenosis से पीड़ित रुद्रांश और माता-पिता, भाई

मासूम की जान बचाने के लिए डॉक्टरों ने उसके गले के नीचे एक छिद्र कर उसमें नली डाली है, जिसे ट्रेकीर्योस्टमी कहते हैं। इस नली के जरिए ही वह सांस ले पाता है। बच्चा कई दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहा। ऐसे में हर दिन का पांच हजार रुपए खर्च हो रहा था ऐसे में डॉक्टरों ने 12 लाख रुपए का इंतजाम करने की सलाह देते हुए बच्चे को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया। अब मासूम के पिता ने घर के ही एक कमरे को अस्पताल में तब्दील कर दिया है। मां संध्या वथाव बेटे की 24 घंटे देखभाल करती है। मासूम को समय-समय पर नेबुलाइजेशन करवाना और शरीर का तापमान मेंटेन करने के लिए हीटिंग मशीन से हीट कराना पड़ता है, ताकि वह अन्य संक्रमण से बचा रहे।

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जानकारी के मुताबिक जिले के संजय नगर आधारताल क्षेत्र निवासी आकाश वथाव के दो बच्चे हैं। इनमें छोटा बेटा रुद्रांश वथाव सबग्लोटिक स्टेनोसिस नामक दुर्लभ बीमारी से पीड़ित है। बेटे के इलाज के लिए पिता आकाश ने मुंबई के नारायण हेल्थ उपक्रम के हॉस्पिटल एसआरसी में बात की। वहां के डॉक्टरों ने रुद्रांश के इलाज पर 12 लाख रुपए का खर्च होना बताया है। लेकिन अब संकट ये कि एक स्ट्रीट वेंडर इतने पैसे लाए तो कहां से लाए। इस मंदी के दौर में बमुश्किल वो गृहस्थी चला पा रहा है।

गंभीर बीमारी से पीड़ित बच्चे के पिता आकाश वथाव का कहना है कि दो साल पहले रुद्रांश पैदा हुआ, 24 घंटे में ही उसके हाथ-पैर नीले पड़ गए। जांच हुई तो पता चला कि उसके दिल में छेद है। इस पर तत्काल एयर एंबुलेंस से उसे लेकर वह मुंबई पहुंचे। वहां 45 दिन तक वह वेंटिलेटर पर रहा। दिल का छेद तो भर गया, लेकिन उसकी सांस की नली अवरुद्ध हो गई। मेडिकल की भाषा में वह दुर्लभ सबग्लोटिक स्टेनोसिस नाम की बीमारी की चपेट में आ गया। सांस नली बंद होने के कारण वह बोल भी नहीं सकता, उसकी आवाज भी बंद हो गई है।

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