मेडिकल में हड़ताल : पैथोलॉजी और रूटीन जांच के लिए भी तरस गए मरीज

हड़ताल से व्यवस्थाएं ठप

By: deepankar roy

Published: 24 Jul 2018, 02:58 PM IST

जबलपुर। नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में जूनियर डॉक्टरों, नर्सेज तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की हड़ताल मंगलवार को भी जारी रही । मंगलवार हड़ताल के दूसरे दिन कर्मचारी और नर्सेज दिन कार्यालय के समक्ष धरने पर बैठे रहे। वही राज्य सरकार द्वारा चिकित्सा शिक्षा विभाग की सेवाओं में एस्मा लागू किए जाने का असर भी पड़ा है। चतुर्थ श्रेणी के कई कर्मचारी और तृतीय श्रेणी के भी कुछ कर्मचारी मंगलवार को कामकाज पर लौट आएं ।अस्पताल में कर्मचारियों की वापसी से अस्पताल की व्यवस्थाओं को सहारा मिला है मंगलवार को रूटीन जांचें जारी रहे । हालांकि ऑपरेशन से मर्जी केसेस में ही हो पाए । कैरोटीन ऑपरेशन मंगलवार को भी टाल दिए गए वहीं पैरामेडिकल स्टाफ के हड़ताल पर रहने के कारण पैथोलॉजी जांच सहित अन्य प्रकार की जांच प्रभावित है। इस बीच हड़ताल को अवैध घोषित किए जाने के बाद जूनियर डॉक्टर के विरुद्ध पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई गई है। इधर आइए ने भी हड़ताल को समर्थन दिया है।


ठप हो गई हैं व्यवस्थाएं
नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में जूनियर डॉक्टर्स, नर्सेज और कर्मचारियों के एक साथ हड़ताल पर चले जाने से व्यवस्थाएं तकरीबन ठप हो गई। सोमवार को मरीज इलाज, जांच और दवा के लिए दिन भर भटकते रहे। कोबाल्ट मशीन रूम का दरवाजा नहीं खुलने के कारण कैंसर के मरीजों की सिकाई नहीं हो सकी। कोई रूटीन सर्जरी नहीं हुई। पैथोलॉजी लैब पर ताला लटका रहने के कारण अस्पताल में भर्ती मरीजों की जांच भी नहीं हो पाई। सौ से डेढ़ सौ किलोमीटर दूर से उपचार के लिए आए कई मरीज घंटों भटकने के बाद मायूस होकर लौट गए। इधर, हड़ताल के पहले ही दिन चरमराई व्यवस्थाओं के बाद सरकार सख्त हो गई है। एस्मा लागू कर हड़ताल को अवैध घोषित कर दिया गया है।


धरने पर डटे रहे
हड़ताल के पहले दिन कर्मचारी और नर्सेज डीन कार्यालय के समक्ष धरने पर डटे रहे। जूनियर डॉक्टर्स ने कैजुअल्टी के सामने तंबू गाड़ा। प्रदर्शनकारियों ने डीन कार्याल के पोर्च के नीचे ही डेरा डाला। हड़ताली कर्मचारी और नर्सेज सातवां वेतनमान 1 जनवरी, 2016 से लागू किए जाने और समयमान-वेतनमान का लाभ दिए जाने की मांग कर रहे है। जूडॉ स्टायपेंड में 20 हजार रुपए प्रतिमाह वृद्धि की मांग कर रहे हैं।

वार्ता फेल हो गई है
मेडिकल कॉलेजों के हड़ताली कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों और चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों के बीच सोमवार को वार्ता फेल हो गई। प्रमुख सचिव ने हड़ताल तुरंत वापस लेने और मांगों पर सात दिन बाद चर्चा करने की बात कहकर वार्ता से इनकार दिया। तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ के नेता वीरेंद्र तिवारी, लघु वेतन कर्मचारी संघ के अजय दुबे ने मांग पूरी नहीं होने तक हड़ताल जारी रखने की घोषणा की है। जूडॉ एसासिएशन के अमरेंद्र वर्मा, देवेंद्र खरे, अंबर मित्तल और नर्सों ने भी आंदोलन वापस लेने से इनकार कर दिया है। चिकित्सा शिक्षा विभाग ने हड़ताल अवैध घोषित करने के साथ ही स्वशासी समितियों के अंतर्गत कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों के तीन माह तक अवकाश पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसके बाद कॉलेज प्रबंधन ने हड़ताली कर्मचारियों के विरुद्ध एफआइआर दर्ज कराने के निर्देश जारी किए।

ये हैं हड़ताल पर
400 के लगभग जूनियर डॉक्टर
600 के करीब तृतीय, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी
400 के लगभग स्वशासी अंतर्गत नर्सेज


ये रही स्थिति
384 मरीजों के रजिस्ट्रेशन हुए ओपीडी में सोमवार को
900 सामान्य दिनों में ओपीडी पंजीयन
50 से अधिक ऑपरेशन कंसल्टेंट्स की कमी से टले

एस्मा लागू किया है
चिकित्सा शिक्षा विभाग ने एस्मा लागू किया है। कानून का उल्लंघन करने और सोमवार को कार्यालय में अनुपस्थित समस्त कर्मचारियों के विरुद्ध पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है।
डॉ. नवनीत सक्सेना, डीन, एनएससीबी मेडिकल कॉलेज

deepankar roy Reporting
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