बाल-बाल बची इस शानदार विश्वविद्यालय की जमीन

बाल-बाल बची इस शानदार विश्वविद्यालय की जमीन
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Shyam Bihari Singh | Updated: 11 Jul 2019, 07:09:01 PM (IST) Jabalpur, Jabalpur, Madhya Pradesh, India

50 साल में जमीन को बनाया सोना, कॉन्क्रीट सिटी की कर ली गई थी तैयारी

जबलपुर। देश में जबलपुर शहर को पहचान दिलाने की हैसियत यहां का जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय भी रखता है। इसने जमीन को बीजों को तैयार करने वाली नर्सरी के रूप में बदला, उसी जमीन पर कॉन्क्रीट सिटी तैयार करने की तैयारी हो गई थी। इसके तहत 200 एकड़ जमीन विश्वविद्यालय के अधिकार क्षेत्र से ली जानी थी। हालांकि, जिम्मेदारों को ऐनवक्त पर समझदारी आ गई। और मामला फिलहाल टाल दिया गया।
जेएनकेवि एक तरह से शहर के लिए शुद्ध हवा देने का एक स्टेशन के रूप में भी विख्यात है। विवि से जमीन जाने के साथ ही हजारों पेड़ पौधों के साथ कई बीज निर्माण प्रक्षेत्र, बगीचे एवं विभिन्न प्रजातियों के लहलहा रहे फलदार पेड़ भी हैं। दिल्ली में आइसीएआर, जयपुर में कृषि विवि के साथ ही नागपुर में कृषि विवि शहर के मध्य है।
943 एकड़ बची जमीन
कृषि विश्वविद्यालय के पास एक समय 2300 एकड़ जमीन थी। उसमें से 2206 एकड़ जमीन नए बने विवि में चली गई। अब विश्वविद्यालय के पास 943 एकड़ जमीन शेष बची है। यदि इसमें 200 एकड़ जमीन भी चली जाती, तो 743 एकड़ जमीन बचती।
सोयाबीन का जन्मदाता है विवि
देश में सोयाबीन का जन्मदाता जबलपुर का कृषि विश्वविद्यालय है। इसने जबलपुर का नाम दुनियाभर में फैलाया। आज सोयाबीन ने प्रदेश के किसानों को समृद्ध बनाया है। 60 फीसदी भूमि में सोयाबीन की खेती हो रही है। इस तरह दो दर्जन से अधिक प्रजातियों का प्रजनक बीजों का जनक भी विवि है। जमीन छिनने का अंदेशा होते ही विवि प्रबंधन ने अपनी तरफ से कोशिश शुरू की। जिला प्रशासन स्तर पर यह बात पहुंचाई गई कि जमीन कहीं और देखी जाए। कुछ संगठनों ने भी मोर्चा सम्भाला। राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर आपत्ति दर्ज कराई गई। मुख्यमंत्री को याद दिलया गया कि किसी तरह की टाउनशिप कृषि विवि की भूमि पर निर्माण करने के लिए उन्होंने नहीं कहा। इसके बाद विवि प्रबंधन की ओर से निंदा प्रस्ताव तक लाया गया। तब जाकर विवि की जमीन प्रस्तावित सेटेलाइट सिटी की योजना पर पुनरविचार की बात तय की गई। अब इसके लिए कहीं और जमीन तलाशी जाएगी।

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