बर्फी, मावा, दाल में क्या मिला रहे दुकानदार जो बन गईं जहरीली?

खाद्य विभाग की जांच में अमानक मिले बर्फी, दाल, पाव व मावा

By: deepak deewan

Published: 04 Jan 2018, 08:52 AM IST

जबलपुर . मिठाई के नाम पर जो बर्फी हम स्वाद ले-लेकर खा रहे हैं वह जीभ को भले ही अच्छी लगे पर शरीर के अन्य अंगों के लिए यह बेहद नुकसानदेह साबित हो रही है। मिलावट के कारण मिठाइयों से लेकर मावा, पाव और यहां तक कि दाल भी जहरीली बन रही है। खाद्य विभाग की जांच में भी यह सिद्ध हो गया है कि शहर में मिलावटखोर हमारे स्वास्थ्य के साथ कितना खतरनाक खिलवाड़ कर रहे हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा लिए गए बर्फी, मावा, मिठाईयों के नमूने जांच में अमानक पाए गए हैं। इन खाद्य पदार्थो को जांच में अखाद्य श्रेणी में रखा गया है। रिपोर्ट आने के बाद विभाग द्वारा सम्बन्धित दुकानदारों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा रही है।

मिलावट का दौर जारी
खाने-पीने की वस्तुओं में मिलावट का दौर जारी है। ऐसे कारोबारी भ्रामक प्रचार कर खाद्य सामग्री बेचने में सफल हो ही जाते हैं।। खाद्य एवं औषधि विभाग द्वारा लिए गए सैम्पलों की जांच रिपोर्ट भी यह सिद्ध करती है कि मिलावटखोरी जमकर चल रही है। विभाग ने बीते दिनों जिले के विभिन्न स्थानों पर छापामार कार्रवाई करते हुए खाद्य विक्रेताओं के यहां जांच की थी। जांच में कुछ खाने की वस्तुओं पर मिलावट व निम्न गुणवत्ता की होने का संदेह होने पर विभाग के अधिकारियों द्वारा नमूने एकत्र कर, इनके परीक्षण के लिए भोपाल स्थित प्रयोगशाला भेजे थे। इन्हीं सैम्पलों की जांच रिपोर्ट गत दिवस विभाग के पास पहुंची है। बताया जाता है कि जांच में तीन सैम्पल फेल हो गए हैं। खाद्य सुरक्षा अधिकारी अम्बरीश दुबे ने बताया कि ओम साई ब्रेकर्स गोसलपुर के मावा टोस्ट और बाम्बे पाव को मिथ्याछाप पाया गया है। बुढ़ागर में पंडित की दुकान से लिए गए मसूर दाल के सेम्पल में मिलावट की पुष्टि हुई है। कृष्णा रेस्टोरेंट सगड़ा में बर्फी के सेम्पल की रिपोर्ट अमानक पाई गई है। इसमें फैट की मात्रा अधिक मिली है। इन प्रतिष्ठानों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है।

मसूर दाल में भी मिली मिलावट
जांच में मसूर दाल भी मानक स्तर की नहीं पाई गई है। मसूर में कचरा या अन्य सामग्री की मिलावट कर इसे निम्न गुणवत्ता का बना दिया गया है। गौरतलब हैं कि मिलावटी सामग्री बेचने पर कड़ी सजा का प्रावधान है। इसमेंं 5 लाख रुपए तक का अर्थदण्ड लगाया जा सकता है फिर भी मिलावटखोर अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं।

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