scriptSweetest pea of MP, now there will be logo on the branding bag | मप्र के इस शहर में होता है सबसे मीठा मटर, अब होगी ब्रांडिंग थैले पर लगेगा लोगो | Patrika News

मप्र के इस शहर में होता है सबसे मीठा मटर, अब होगी ब्रांडिंग थैले पर लगेगा लोगो

मप्र के इस शहर में होता है सबसे मीठा मटर, अब होगी ब्रांडिंग थैले पर लगेगा लोगो

 

जबलपुर

Published: October 26, 2021 01:45:51 pm

जबलपुर। जिले के हरे मटर की ब्रॉन्डिंग के लिए उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग रजिस्टे्रशन करवा रहा है। ‘जबलपुरी मटर’ के नाम से इसका लोगो भी तैयार किया गया है, जो यहां से सप्लाई होने वाली मटर के बैग पर लगाया जाएगा। जल्द ही इसे तैयार कर उन व्यापारियों को दिया जाएगा, जो किसानों से मटर की खरीदी कर उसे देश के विभिन्न हिस्सों में भेजते हैं। अब इसकी एक पहचान होगी। जिले में हर साल करीब 30 हजार हेक्टेयर रकबे में मटर की खेती होती है। दो लाख 40 हजार मीट्रिक टन से ज्यादा का उत्पादन एवं 400 करोड़ का कारोबार होता है।

green peas
green peas

‘एक जिला-एक उत्पाद’ के तहत मिलेगी नई पहचान
‘मां नर्मदा के पवित्र जल से सिंचित जबलपुरी मटर’ की होगी ब्रॉन्डिंग

हरे मटर की व्यापक पैमाने पर पैदावार जबलपुर जिले की कुछ तहसील क्षेत्रों में होती है। इसकी बिक्री देश के कई राज्यों में होती है, लेकिन इसकी कोई पहचान नहीं रहती। यह बोरियों में पैक होकर शहर से बाहर चली जाती है। वहां से मंडियों में पहुंचकर बाजारों में जाती है। इसलिए नई पहचान दिलाने के लिए कवायद की जा रही है।
मां नर्मदा के नाम से अपील- आत्म निर्भर मध्यप्रदेश के तहत एक जिला एक उत्पाद के तहत हरे मटर का चयन जिला प्रशासन ने किया है। इसी के तहत इसकी ब्रॉन्डिंग की जाएगी। तैयार किए जा रहे लोगो में अपील के रूप में मां नर्मदा का उल्लेख किया जाएगा। अपील की लाइन ‘मां नर्मदा के पवित्र जल से सिंचित जबलपुरी मटर’ होगी। इसमें हरी मटर की फल्ली भी रहेगी।

matar.jpg

400 करोड़ से ज्यादा का टर्नओवर- जिले में कम समय में ज्यादा मुनाफा वाली इस उपज का इंतजार किसानों को होता है। बरसात में कई किसान एक से दो महीने तक अपने खेतों को खाली रखते हैं। जिले में करीब 30 हजार हेक्टेयर में इसका उत्पादन होता है। हर साल करीब 400 करोड़ रुपए की हरी मटर कि सान बेचते हैं। इसकी आपूर्ति मध्यप्रदेश के कई जिले के साथ महाराष्ट्र, दिल्ली, गुजरात व दक्षिण भारत के कई राज्यों में होती है। प्रसंस्क रण के बाद इसका निर्यात प्रमुख देशों में किया जाता है।


यह है स्थिति
जिले में 30 हजार हेक्टेयर में हरे मटर की पैदावार।
दो लाख 40 हजार मीट्रिक टन से ज्यादा का उत्पादन।
हर साल 400 करोड़ रुपए से ज्यादा के मटर का विक्रय।
पनागर, शहपुरा, मझौली व शहपुरा में में बड़ा रकबा।
80 प्रतिशत मटर शहर के अलावा बाहरी राज्यों में जाता है।
देश के आधा दर्जन के लगभग राज्यों में होती है सप्लाई।
विदेशों में जापान और सिंगापुर में व्यंजनों के लिए निर्यात।
एक बड़ी व दूसरी छोटी प्रसंस्करण इकाई की है स्थापना।
6 से 8 हजार मीट्रिक टन मटर की जिले में होती है प्रोसेसिंग।
सहजपुर, सम्भागीय और स्थानीय मंडियों से होता है विक्रय।
कई व्यापारी किसान के खेतों से सीधे करते हैं खरीदी।


एक जिला एक उत्पाद के तहत हरे मटर की ब्रॉन्डिंग के लिए रजिस्टे्रशन करवाया जा रहा है। इसका एक टे्रडमार्क होगा। मटर के बैग में यह टैग के रूप में लगाया जाएगा। इस प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
डॉ. नेहा पटेल, उप संचालक, उद्यानिकी विभाग, जबलपुर

सबसे लोकप्रिय

शानदार खबरें

Newsletters

epatrikaGet the daily edition

Follow Us

epatrikaepatrikaepatrikaepatrikaepatrika

Download Partika Apps

epatrikaepatrika

Trending Stories

Cash Limit in Bank: बैंक में ज्यादा पैसा रखें या नहीं, जानिए क्या हो सकती है दिक्कतहो जाइये तैयार! आ रही हैं Tata की ये 3 सस्ती इलेक्ट्रिक कारें, शानदार रेंज के साथ कीमत होगी 10 लाख से कमइन 4 राशि वाले लड़कों की सबसे ज्यादा दीवानी होती हैं लड़कियां, पत्नी के दिल पर करते हैं राजमां लक्ष्मी का रूप मानी जाती हैं इन नाम वाली लड़कियां, चमका देती हैं ससुराल वालों की किस्मतShani: मिथुन, तुला और धनु वालों को कब मिलेगी शनि के दशा से मुक्ति, जानिए डेटइन नाम वाली लड़कियां चमका सकती हैं ससुराल वालों की किस्मत, होती हैं भाग्यशालीराजस्थान में आज भी बरसात के आसार, शीतलहर के साथ फिर लौटेगी कड़ाके की ठंडPost Office FD Scheme: डाकघर की इस स्कीम में केवल एक साल के लिए करें निवेश, मिलेगा अच्छा रिटर्न

बड़ी खबरें

Copyright © 2021 Patrika Group. All Rights Reserved.