600 करोड़ के घोटाले की जांच के लिए बनी समिति भी लापरवाह!

मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी का मामला

जबलपुर. मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी में 600 करोड़ रुपए घोटाला उजागर होने पर कम्पनी ने जांच समिति का गठन किया। समिति ने भी जांच में गड़बड़ी की। जांच समिति ने कम्पनी के सीजीएम अजय शर्मा पर लगाए गए आरोपों का भौतिक सत्यापन नहीं किया। समिति सदस्य मौके पर भी नहीं पहुंचे। कम्पनी ने भी स्वीकार किया है कि भौतिक सत्यापन किए बिना जांच पूरी कर ली गई। लेकिन, इतने बड़े मामले में लापरवाही बरतने और मनमानी करने वाली समिति के खिलाफ न तो कोई जांच हुई और न ही कार्रवाई की गई।
ये है मामला
लोकायुक्त में दर्ज शिकायत के अनुसार पूर्व क्षेत्र कम्पनी ने पायलट प्रोजेक्ट के तहत अलग-अलग योजनाओं में लाइन लॉस कम करने के लिए 142 शहरों का चयन किया था। 600 करोड़ के इस प्रोजेक्ट में सब स्टेशनों का निर्माण, केबलीकरण, अविद्युतकृत घरों को कनेक्शन देने, बिजली के पोल लगाने, घरों में मीटर लगाने, ट्रांसफॉर्मर्स की क्षमता बढ़ाने और उच्च क्षमता के नए ट्रांसफॉर्मर लगाना शामिल था। योजना पर अमल होने से सिर्फ जबलपुर सिटी सर्किल में हर महीने पांच करोड़ रुपए की बचत होती।
ये आरोप लगाए गए थे
- मई 2009 में लाइन लॉस कम करने का का ठेका ए-टू-जेड कम्पनी को दिया गया। कम्पनी काम नहीं कर पाई तो विजय माल्या की कम्पनी यूबी इंजीनियरिंग को 152 करोड़ रुपए में ठेका दिया गया। यह कम्पनी भी भाग गई। इसके बाद गुडग़ांव की स्टेप-अप कम्पनी को 116 करोड़ रुपए में ठेका दिया गया।
- ए-टू-जेड कम्पनी 30 प्रतिशत काम कर पाई थी, लेकिन उसे 70 प्रतिशत भुगतान किया गया।
- विजय माल्या की कम्पनी ने भी 35 प्रतिशत काम किया था, उसे पूरा भुगतान कर दिया गया। मेंटेनेंस के लिए 12 करोड़ रुपए अलग से दिए गए। ठेका 2012 में समाप्त होना था, लेकिन 31 महीने बाद भी काम पूरा नहीं हो सका। उस वक्त सीई अजय शर्मा थे।
- कम्पनी ने यूबी इंजीनियरिंग कम्पनी के जो मटेरियल सीज किए थे, उनकी गुणवत्ता ठीक नहीं थी।
विधानसभा में उठा था मामला
विधानसभा में भी इस मामले को उठाया गया था। विधानसभा से कम्पनी से सवाल पूछा गया था कि लोकायुक्त में दर्ज प्रकरण क्रमांक 550/17 में उल्लेखित अनियमितताओं का भौतिक सत्यापन किया गया या नहीं? कम्पनी की ओर से जानकारी भेजी गई कि भौतिक सत्यापन नहीं किया गया।
वर्जन
विधानसभा में जो रिपोर्ट भेजी गई थी, उसमें जानकारी दी गई कि जांच में भौतिक सत्यापन नहीं हुआ था।
वी. किरण गोपाल, एमडी, मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी

virendra rajak
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