इस शहर की कुंडली में ही लिख उठा सरकार का सौतेला व्यवहार !

मप्र हाइकोर्ट ने कई बार की तल्ख टिप्पण्ी, सख्त रुख के बावजूद जबलपुर में विकास की रफ्तार सुस्त

By: shyam bihari

Published: 07 Jul 2020, 09:27 PM IST

जबलपुर। विकास के मामले में जबलपुर शहर के साथ मप्र सरकार न्याय नहीं कर रही है, इसका अंदाजा आमजन से लेकर खास तक को भी है। बड़ी बात यह है कि राज्य सरकार की उपेक्षा को लेकर मप्र हाइकोर्ट भी कई बार चिंता जता चुका है। जबलपुर में प्रदेश के अन्य महानगरों की तुलना में अधोसंरचना व मूलभूत सुविधाओं की कमी को लेकर कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी भी की थी। इसके बावजूद सरकार का जबलपुर के साथ सौतेले व्यवहार का रवैया लगातार जारी है। कभी स्थानीय नेताओं की राजनीतिक इच्छाशक्ति कमजोर पड़ जाती है। कभी अफसरों की अनदेखी शहर का नुकसान करा जाती है। समीक्षकों की नजर से देखें तो साफ दिखता है कि जबलपुर शहर के साथ सौतेला व्यवहार यहां के नेताओं की आपसी खींचतान के चलते भी होता आया है।

हाईकोर्ट ने दो जुलाई 2020 को जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि जलनिकासी के मामले में इस शहर की स्थिति भोपाल और इंदौर के मुकाबले ठीक नहीं है। चीफ जस्टिस अजय कुमार मित्तल और जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की युगलपीठ ने नगर निगम को स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए। याचिका में कहा गया कि बीते कुछ साल में शहर में मकानों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि तो हुई, लेकिन उनसे निकलने वाले पानी की निकासी को लेकर ठोस उपाय नहीं किए गए। शहर के ओमती नाले को बड़ा करने के बजाय उसे और संकरा व अंडरग्राउंड कर दिया गया। इसके कारण उसकी सही ढंग से सफाई नहीं हो पाती। इसी नाले के कारण थोड़ी सी बारिश में ही शहर के कई स्थानों पर जलप्लावन की स्थिति बन जाती है। नाले का पानी कॉलोनियों व घरों में भी घुस जाता है।
23 नवम्बर 2019 को तल्ख लहजे में टिप्पणी कर चीफ जस्टिस मित्तल व जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की डिवीजन बेंच ने कहा, 'मध्यप्रदेश में जबलपुर के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। ऐसा नहीं होना चाहिए। इस शहर को इसकी जगह मिलनी चाहिए। भोपाल और इंदौर में जिस तरह का इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा हो रहा है, वैसा इंफ्रास्ट्रक्चर जबलपुर में भी खड़ा करना सरकार की जिम्मेदारी है।Ó बेंच ने नगर निगम को सीवर लाइन, हर घर में बायो टॉयलेट व वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के बारे में रिपोर्ट व एक्शन प्लान पेश करने को कहा।

17 फरवरी 2015 को हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा था कि सफाई के मसले में जबलपुर देश के अन्य महानगरों से आखिर क्यों पिछड़ा है? बदबू व कीटाणु बीमारियों का सबब बन रहे हैं। ऐसे में जबलपुर आने वाले विदेशी नागरिक इस शहर की क्या छवि लेकर जाएंगे? इस सवाल पर नगर निगम को गम्भीरता से विचार करना चाहिए। उसे केरल से सबक लेना होगा, जहां साफ-सफाई देखते ही बनती है। वहां प्रत्येक घर से कचरा उठाया जाता है। इसके लिए मोहल्ला समितियां बनाई गई हैं। स्थानीय स्वशासन नगर निगम की जिम्मेदारी है कि वह इस दिशा में पूरी तत्परता व गम्भीरता से ध्यान दे।
ये निर्देश भी बेअसर
-अप्रैल, 2010 में हाईकोर्ट ने जनहित याचिका का फैसला करते हुए खुले में मांस-मछली विक्रय पर प्रतिबंध लगाया। कोर्ट ने कहा कि मांस-मछली विक्रय धार्मिक स्थलों के समीप व खुला रख कर न किया जाए। इनके लिए नगर निगम व प्रशासन अलग मार्केट की व्यवस्था करें। मांस-मछली विक्रेताओं को लाइसेंस लेना अनिवार्य किया जाए। लेकिन, हर इलाके में खुले में मांस-मछली का कारोबार देखा जा सकता है। मंदिरों व अन्य धर्मस्थलों के पास खुलेआम मांस-मछली बिक रही है। नगर निगम ने पर्याप्त मार्केट नहीं बनाए।
-मई, 2014 में सड़क व सरकारी जमीन से अतिक्रमण के मसले पर हाईकोर्ट ने तत्कालीन कलेक्टर विवेक पोरवाल को तलब किया था। कोर्ट ने नगर निगम, प्रशासन को सख्ती के साथ अतिक्रमण हटाने व कब्जा करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए थे। हटाने के बाद दोबारा अतिक्रमण न हो, इसकी निगरानी होनी थी। लेकिन सड़कों व सरकारी जमीन पर अभी भी बड़ी संख्या में अवैध निर्माण बाकी हैं। अतिक्रमणकारियों के खिलाफ रिपीट कार्रवाई कहीं नहीं हो रही। सामान जब्ती व प्रकरण दर्ज करने का नामोनिशान नहीं हैं। कुछ दिन बाद ही फिर कब्जे हो जाते हैं।
-अक्टूबर, 2014 में हाइकोर्ट ने आवारा मवेशियों, सुअरों व कुत्तों की बढ़ती संख्या व इनके हमलों से घायल होने की रोकथाम के लिए समुचित कदम उठाने के लिए निगम व जिला प्रशासन को निर्देशित किया गया। सरकारी अस्पतालों में रैबीज के टीके हर समय पर्याप्त संख्या में उपलब्ध रखने, कुत्तों के बधियाकरण व आवारा मवेशियों को शहर से बाहर करने के निर्देश दिए गए। लेकिन हकीकत एकदम उलट है। शहर की हर गली, हर मोहल्ले में आवारा कुत्ते आतंक का सबब बन चुके हैं। आवारा सांडों की धमाचौकड़ी के चलते लोग जान तक गंवा चुके हैं।

shyam bihari Desk
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned