मृतक के परिजन नहीं चाहते हैं निगम करे अंत्येष्टि

कोरोना संभावित और पॉजीटिव मृतकों की देह की अंत्येष्टि पर उठ रहे सवाल, श्मशान में व्यवस्थाएं ठप्प

By: manoj Verma

Published: 17 Sep 2020, 08:30 PM IST

जबलपुर. मेडिकल, विक्टोरिया व अन्य कोविड-19 सेंटर में कोरोना या संभावित मरीजों की मृत्यु होने पर उनके परिजन नहीं चाहते हैं कि अत्येष्टि नगर निगम के द्वारा की जाए। मृतक के परिजनों ने प्रशासन को पत्र दिया है, जिसमें स्पष्ट उल्लेख है कि अंत्येष्टि निगम के द्वारा नहीं बल्कि मोक्ष संस्था को करने दी जाए। हालत यह हो गई है कि अब निगम सिर्फ चंद लावारिस शवों की ही अंत्येष्टि कर रहा है, शेष अंत्येष्टि संस्था को सौंपी जा रही है। उधर, श्मशान में व्यवस्थाएं नहीं होने से लोगों की आस्था को ठेस पहुंच रही है।

कोविड-१९ के दौरान श्मशान में अंत्येष्टि पहले से अधिक हो रही है। शहर के तिलवारा, चौहानी, ग्वारीघाट, करियापाथर, रानीताल में व्यवस्थाएं ठप हो गई हैं। इन जगहों पर जैसे-तैसे काम चलाया जा रहा है। आलम यह है कि एक अंत्येष्टि हो जाने के बाद दूसरी अंत्येष्टि करने के लिए जगह ढूढ़ी जा रही है। श्मशान में न तो पेयजल है और न ही वहां सफाई हो पा रही है।

श्मशान में संक्रमण का खतरा
श्मशान में भीड़ होने की वजह से वहां कोरोना संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। अंत्येष्टि में शामिल होने वाला हर व्यक्ति पीपीई किट में नहीं रहता है। लोग दूर से खड़े होकर अंत्येष्टि में शामिल हो रहे हैं।

नगर निगम कर्मी नहीं बरत रहे सुरक्षा
तिलवारा, चौहानी आदि में यह देखने में आया है कि जिन मृतक देह की नगर निगम अंत्येष्टि कर रही है, उसमें निगम कर्मी सुरक्षा नहीं बरत रहे हैं, जिससे उनके भी संक्रमण होने की आशंका है। सूत्रों के मुताबिक इस कार्य में लगे नगर निगम के कर्मचारियों में दो लोग पॉजीटिव हो गए हैं लेकिन उसके बाद भी सुरक्षा नहीं बरती जा रही है।

ये है हालात
चौहानी : चौहानी श्मशान में अंत्येष्टि करने के लिए मात्र ७ फर्श हैं। इन जगहों पर मृतक देह को मुखाग्नि दी जाती है। ज्यादा देह आने पर फर्श के किनारे रखकर व्यवस्था की जाती है। यहां पेयजल की कोई व्यवस्था नहीं है। सफाई भी नियमित रूप से नहीं हो रही है।
रानीताल : यहां दो शेड में दस अंत्येष्टि एक समय में की जा सकती है। मौजूदा हालात में देह अधिक होने पर प्लेटफॉर्म के किनारे दाहसंस्कार किया जा रहा है। यहां अस्थिलॉकर है, जो अधिक अंत्येष्टि होने की वजह से लोगों को नहीं मिल पा रहा है। पेयजल के नाम से कोई व्यवस्था नहीं है।
ग्वारीघाट : यहां दो शेड हैं, जिसमें अंत्येष्टि की जाती हैं। इसके अलावा यहां घाट के किनारे भी मुखाग्नि दी जा रही है। यहां भी हालत यह हो गई है कि बारिश की वजह से घाट के किनारे मुखाग्नि नहीं दी जा रही है। शेड या फिर शेड के नीचे ही मुखाग्नि दी जा रही है।
तिलवारा : तिलवारा की हालत यह है कि यहां मात्र तीन अंत्येष्टि की जगह नहीं है। एक शेड टूटा हुआ है। एक निर्माणाधीन है। इससे यहां पांच-छह अंत्येष्टि की जा सकती है। घाट के किनारे बारिश को देखते हुए दाहक्रिया नहीं की जा रही है। यहां लकड़ी कई बार दो-दो दिन नहीं मिल रही है।
तिलवारा में जगह नहीं, चौहानी पहंच रहे शव : तिलवाराघाट में अंत्येष्टि करने वाले जगह नहीं होने की वजह से चौहानी श्मशान आ रहे हैं। हाल ही में एक शव को तिलवाराघाट ले जाया गया था, जहां व्यवस्थाएं नहीं होने से उसे वापस चौहानी में लाकर उसे दफनाया गया है।

कलेक्ट्रेट बैठक में नहंी निकला समाधान
कोविड-१९ संक्रमण को देखते हुए बुधवार को कलेक्टर ने विभिन्न संस्थाओं की बैठक ली थी। बैठक में संस्थाओं ने अपने सेवाकार्य बताए। बैठक में ग्वारीघाट में अंत्येष्टि करने में आने वाली समस्याओं का मुद्दा उठा था, जिस पर गोलमोल जवाब देकर मामला शांत करवा दिया गया।

- मृतक के परिजन हमारी संस्था से मदद मांगते हैं तो हम सहयोग कर रहे हैं। संस्था कोरोना पॉजीटिव और सम्भावित करीब आठ से दस मृत देह की अंत्येष्टि कर रही है।
आशीष ठाकुर, मोक्ष संस्था
- इस दौरान अंत्येष्टि बढ़ गई है। श्मशान में व्यवस्थाएं बनाई जा रही हैं। नगर निगम भी अंत्येष्टि कर रहा है। मोक्ष संस्था हमारी मदद करती है।
अनिल बारी, सहायक स्वास्थ्य अधिकारी, नगर निगम

manoj Verma Reporting
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