मौसम हुआ बेइमान, शरीर हजम नहीं कर पा रहा बदलाव

मौसम हुआ बेइमान, शरीर हजम नहीं कर पा रहा बदलाव

Shyam Bihari Singh | Publish: Jan, 19 2019 01:52:28 AM (IST) Jabalpur, Jabalpur, Madhya Pradesh, India

सुबह-रात के बीच तापमान में बड़े फर्क से हार्ट और ब्रेन स्ट्रोक का खतरा

जबलपुर। हवा के बदलते रुख से लगातार मौसम का मिजाज बदल रहा है। सुबह और रात के तापमान के बीच करीब 20 डिग्री सेल्सियस का अंतर बना हुआ है। जितना तेजी से तापमान में उतार-चढ़ाव हो रहा है, उसके अनुसार लोगों की बॉडी एडजस्ट नहीं हो पा रही है। नतीजतन लोग सर्दी, खांसी, सिर में जकडऩ से लेकर एलर्जी के शिकार हो रहे हैं। पहले से बीमार, बीपी के पीडि़त और कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोगों को अस्थमेटिक, हार्ट और ब्रेन स्ट्रोक का खतरा बढ़ गया है। ऐसे मरीजों की बीते कुछ दिनों से अस्पतालों की ओपीडी में संख्या तकरीबन दोगुनी हो गई है।
अभी खतरनाक स्थिति
विशेषज्ञों के अनुसार तापमान में 10 डिग्री से ज्यादा उतार-चढ़ाव शरीर पर असर डालता है। दिन में तापमान ज्यादा रहता है। जबकि, रात में बेहद कम। शाम को 5 बजे करीब डेढ़ से दो घंटे में तापमान में 5-6 डिग्री की गिरावट आ रही है। यह स्थिति खतरनाक है।
ये मर्ज बढ़ा
- सर्दी-खांसी, सांस लेने में परेशानी, गले में खराश, सिर में जकडऩ, आंख लाल होना, एलर्जी, अस्थमेटिक अटैक, ब्लड प्रेशर बढऩा, छाती में दर्द, लकवा, हार्ट अटैक।
ये करने की जरूरत
- तापमान के तेजी से बदलने के बीच ठंड से बचें।
- ठंडे पानी से न नहाएं। स्वीमिंग न करें।
- सुबह तापमान सामान्य होने के बाद कसरत करें।
- बिस्तर उठने के बाद गर्म कपड़े प हने बिना मूव न करें।
- बीपी शिकायत वाले लगातार जांच कराएं।

यह बदलाव पड़ता है भारी
ठंड के मौसम में तापमान के बार-बार बदलने से नसें सिकुड़ जाती हैं। बीपी की समस्या होती है। हृदय मांसपेशियों में रक्त का प्रवाह कम होने में दिल पर जोर पड़ता है। खून का गाढ़ापन बढ़ जाता है। खून की नसों के असामान्य व्यवहार केकारण ब्रेन और हार्ट स्ट्रोक हो सकता है।

वर्जन

तापमान में अंतर के कारण छाती में दबाव, भारीपन, जकडऩ और दर्द के मरीज बढ़े हैं। बीपी के मरीजों का डोज चेंज करना पड़ रहा है। इस मौसम में सावधानी रखें। बॉडी एक्सपोजर से बचना चाहिए। ठंड में हार्ट अटैक का खतरा रहता है।
- डॉ. आरएस शर्मा, हृदय रोग विशेषज्ञ
दिन और रात के तापमान में अधिक फर्क होने पर शरीर को एडजस्ट होने में समय लगता है। ठंड के सीधे सम्पर्क में आने पर ब्रेन स्ट्रोक का खतरा रहता है। ऐसे लक्षणों सहित सांस लेने में परेशानी के मरीज अभी बढ़ गए हैं।
- डॉ. विजय परिहार, न्यूरो सर्जन
ये है हाल
- 55 मरीज आ रहे हैं अभी सीने में दर्द, बीपी बढऩे की शिकायत लेकर। सामान्य दिन में 25-30 मरीज की ओपीडी।
- 20 से ज्यादा मरीज आ रहे हैं, लकवा जैसे लक्षणों के साथ। आमतौर पर 8-9 मरीज ही ओपीडी में हर दिन आते हैं।
- 25 के करीब मरीज आ रहे हैं सांस लेने में परेशानी की शिकायत लेकर। आम दिनों में 8-10 मरीज की ओपीडी।
(नोट: मेडिकल कॉलेज अस्पताल की ओपीडी में मरीज)

ऐसे आ रहा तापमान में फर्क

तिथि : अधिकतम तापमान : न्यूनतम तापमान
18 जनवरी : 23.9 : 7.4
17 जनवरी : 25.1 : 5.4
16 जनवरी : 23.9 : 5.2
15 जनवरी : 21.8 : 6.7
14 जनवरी : 23.0 : 10.7
13 जनवरी : 26.4 : 12.4
12 जनवरी : 24.6 : 8.6

11 जनवरी : 23.5 : 7.5

मौसम विशेषज्ञ का कहना है
मौसम विभाग में वैज्ञानिक सहायक देवेंद्र कुमार तिवारी के अनुसार अभी न्यूनतम और अधिकतम तापमान के बीच फर्क ज्यादा है। तापमान तेजी से बदलता है। इसके अनुसार बॉडी एडजस्ट होने में समय लगता है। इसलिए दिन में भी ठंड महसूस हो रही है। पश्चिम विक्षोभ का असर बढ़ा है। इस कारण अब धीरे-धीरे रात का तापमान बढऩे का अनुमान है। दिन का तापमान घटेगा। अंतर कम होने से ठंडक का अहसास अपेक्षाकृत कम होगा।

MP/CG लाइव टीवी

खबरें और लेख पड़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते है । हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते है ।
OK
Ad Block is Banned