अब नहीं होगी सेनिटाइजर की किल्लत, विवि और अन्य संस्थान आईं आगे, सेनिटाइजर निर्माण की पहल

अब नहीं होगी सेनिटाइजर की किल्लत, विवि और अन्य संस्थान आईं आगे, सेनिटाइजर निर्माण की पहल

जबलपुर. कोरोना वायरस से जंग में चिकित्सकों और प्रशासन के साथ विश्वविद्यालय और शिक्षण संस्थान भी कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहे हैं। कृषि विश्वविद्यालय ने हाईजीनिक और गुणवत्तायुक्त सेनिटाइजर का निमार्ण किया है। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी इस दिशा में पहल शुरू करने का निर्णय किया है। जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज (जेईसी) ऑनलाइन पढ़ाई कराने के साथ टीचिंग ऐप बना रहा है। कृषि विश्वविद्यालय के डॉ. एसएस शुक्ला, डॉ. एमआई खान, डॉ. एलपीएस राजपूत, प्रतिभा परिहार, डॉ. आलोक दुबे ने बायो लैब में 60 लीटर सेनेटाजर बनाया है। इसमें 98 प्रतिशत एथेनॉल, तीन प्रतिशत हाइड्रोजन पर ऑक्साइड, ग्लिसराल, और एसेंस का उपयोग किया गया है। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय प्रशासन भी डिजाइन एंड इनोवेशन सेंटर (डीआईसी) और बॉयो टेक्नोलॉजी विभाग के माध्यम से प्रयास करने जा रहा है।

ओएफके में बनेगा सैनिटाइजर
ऑर्डनेंस फैक्ट्री खमरिया में इसे तैयार करने का काम शुरू हो गया है। पहले दिन फिलिंग सेक्शन-2 में 100 लीटर सैनेटाइजर बनाया गया।

टीचिंग ऐप पर काम
ट्रिपल आईटीडीएम और जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज में 14 अप्रैल तक अवकाश रहेगा। इस लम्बे पीरियड को देखते हुए टीचिंग ऐप, ऑनलाइन टीचिंग मैथेडोलॉजी पर काम हो रहा है।

विभागीय स्टाफ के लिए सेनेटाइजर का निर्माण किया है। लॉकडाउन को देखते हुए कुछ अन्य चीजें बनाने में शुरुआत नहीं हो सकी है।
डॉ. आईएम खान, वरिष्ठ वैज्ञानिक

विवि प्रशासन भी इस दिशा में आवश्यक कदम उठा रहा है। बायो लैब और डीआईसी विभाग से चर्चा कर रहे हैं।
प्रो. कपिलेदव मिश्र, कुलपति रादुविवि

छात्र-छात्राओं से वर्क एट होम पर काम कराया जा रहा है। ऑनलाइन टीचिंग सुविधा उपलब्ध कराने पर भी विचार कर रहे हैं।
प्रो. प्रशांत जैन, प्रभारी आईटी सेल, जेईसी

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abhishek dixit Desk
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