यह शहर करता है  7000 इंजीनियरों को पैदा

दो बड़े संस्थान के साथ एक दर्जन तकनीकी कॉलेज, किसी भी दूसरे शहर से नहीं कमत्तर

 

By: Mayank Kumar Sahu

Published: 15 Sep 2020, 11:12 PM IST

फैक्ट फाइल :
2 उच्च तकनीकी संस्थान
1 ट्रिपल आईटी डीएम
1 जेईसी संस्थान
12 इंजीनियरिंग कॉलेज
9 हजार छात्र अध्ययनरत

जबलपुर।
संस्कारधानी के रूप में पहचाने जाने वाला यह शहर तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में भी पीछे नहीं है। यह शहर हर साल 7000 इंजीनियरों को पैदा करता है। यहां दो बड़े उच्च संस्थान हैं तो वही कई बेहतरीन तकनीकी शिक्षासंस्थान। एक तरह से यदि देखा जाए तो जबलपुर किसी अन्य शहर से भी कमतर नहीं है। यहां से निकलने वाले 55 फीसदी छात्र पढ़ाई के दौरान ही पैरों पर खड़े हो जाते हैं। शहर में ट्रिपल आईटीडीएम जैसा तकनीकी संस्थान है तो वहीं प्रदेश का सबसे पुराना जबलपुर इंजीनियर कॉलेज शहर की शान है। इसके साथ ही शहर के कई बेहतरीन तकनीकी शिक्षा कॉलेज ने भी देश प्रदेश में अपनी पहचान कायम कर रखी है। जबकि 25 फ़ीसदी छात्र उच्च डिग्री के लिए चले जाते हैं। जबकि 20 फीसदी ऐसे होते हैं जो पानी की पढ़ाई के लिए या तो विदेश चले जाते हैं या कहीं और पढऩे के लिए।

कम्प्यूटर साइंस के प्रति बढ़ा रूझान
पिछले कुछ सालों से आईटी सेक्टर में आए बूम के कारण इंजीनियरिंग के छात्रो में कम्प्यूटर और आईटी के क्षेत्र में रूझान बढ़ा है। सर्वाधिक 30 फीसदी छात्र इस सेक्टर में पढ़ाई के लिए अपनी ब्रांच को चुन रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मैन्यूफैक्चिरिंग की अपेक्षा आईटी फील्ड में तेजी से विस्तार होने की वजह रहा है जिसके चलते छात्रों ने इसे पसंद किया है।

मेक इन इंडिया से मिलेगी गति
विशेषज्ञों के अनुसार प्रधानमंत्री के मेक इन इंडिया और स्किल डिव्लपमें, स्मॉल स्केल इंडस्ट्री जैसी योजनाओं को बढ़ावा दिए जाने के कारण आने वाले समय में मैन्यूफैक्चिरिंग इंजीनियिरंग की दिशा में बूम आएगा। भारतीय अर्थव्यवस्था कुछ गिरने के साथ ही कोरोना के चलते यह सेक्टर गति नहीं पकड़ पाया था।

कंपनियों के भारत आने से बढ़ेगी मांग
जानकारों का कहना है कि वर्तमान हालातों और चायना से गिरते भरोसे को देखते हुए कई विदेशी कंपनियां अपना कारोबार समेटकर इंडिया आ रही हैं। कोराना खत्म होने के बाद परिस्थितियां तेजी से बदलेंगी। ऐसे में इंडस्ट्री बेस युवाओं की मांग में भी इजाफा होगा। आने वाले समय में यह सेक्टर युवाओं के लिए भी रोजगार का एक बड़ा केंद्र बनेगा।

क्या कहतें है हमारे एक्सपर्ट

-वर्तमान समय में कम्प्यूटर साइंस के प्रति युवाओं का रूझान है। मेक इन इंडिया प्रोग्राम की लांचिंग के बाद मैन्यूफैक्चिरिंग सेक्टर में इंजीनियरों की डिमांड बढ़ेगी। चायना से कंपनियों के विश्वास खोने और इंडिया की और रुख करने से यह सेक्टर युवाओं के लिए रोजगार का बड़ा केंद्र बनेगा।
-डॉ.पंकज गोयल, ज्ञान गंगा इंजी. कॉलेज

-इस फील्ड में बड़ी संभावनाएं हैं। हर साल हजारों की संख्या में युवा इंजीनियरिंग की डिग्री लेकर निकलते हैं। युवाओं को बाजार के हिसाब से भी स्किल्ड होना पड़ेगा। सात हजार युवा इंजीनियरिंग की डिग्री लेकर निकलते हैं।
-डॉ.प्रशांत जैन, जबलपुर इंजी. कॉलेज

-हर ब्रांच में स्कोप है। कंपनियों के साथ अब हमें भी खुद इम्पालयमेंट जनरेट करने होंगे। जरूरी नहीं है कि नौकरी ही करें। इंजीनियरिंग के युवा आज खुद स्टार्टअप कर रहे हैं। सरकार भी इस दिशा में प्रयास कर रही है।
-डॉ.शैलेष गुप्ता, हितकारिणी इंजी. कॉलेज

Mayank Kumar Sahu Reporting
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