इस शहर को लगी पेड़ों के कत्लेआम की नजर

इस शहर को लगी पेड़ों के कत्लेआम की नजर
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Shyam Bihari Singh | Publish: Jun, 11 2019 08:00:00 AM (IST) Jabalpur, Jabalpur, Madhya Pradesh, India

हवा में पीएम 10 के कण बढ़े, देश के सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल हुआ जबलपुर

यह है स्थिति
-225 से ज्यादा क्रशर मानेगांव में संचालित
-120 क्रशर अमझर में संचालित
पीसीबी की मौजूदा रिपोर्ट के अनुसार एयर क्वालिटी इंडेक्स में जबलपुर में पीएम 10 की स्थिति
-100.67
ऐसे समझें एक्यूआइ
इंडेक्स, के टेगरी
-401-500, जीवों के लिए नुकसान दायक
-301-400, वेरी पुअर
-201-300, पुअर
-101-200, मध्यम
-51-100, संतोषजनक
-0-50, अच्छा
जबलपुर। क्रशर की धुंध नगर के एंट्री प्वाइंट पर आसमान में छाई है। मानेगांव व अमझर में मुंह पर कपड़ा बांधे बगैर बाइक से चलना मुश्किल है। पेड़ों पर लगातार कुल्हाड़ी चलने से शहर की ज्यादातर सड़कों पर धूल का गुबार छाया रहता है। इससे आबोहवा दूषित हो रही है। हवा में पीएम 10 के कणों की संख्या निर्धारित मानकों से ज्यादा बढ़ गई है। तीन साल के आंकड़ों के निष्कर्ष को आधार बनाकर राष्ट्रीय स्तर पर जारी ताजा रिपोर्ट में जबलपुर देश के सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल हो गया है। पर्यावरणविदें की मानें, तो प्रकृति से खिलवाड़ का नतीजा है कि सबसे खुशनुमा आबोहवा के लिए देशभर में अलग पहचान रखने वाले जबलपुर में वायु प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ रहा है।
छह फीसदी घटी हरियाली
पिछले वर्षों में पेड़ों पर खूब कुल्हाड़ी चली है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार जिले में पिछले एक दशक में लगभग छह फीसदी हरियाली घट गई। जिन स्थलों पर पौधे रोपे गए, तो उन्हें बचाने के प्रयास नहीं हुए।
-05 हजार पेड़ पांच साल में निगम सीमा में काटे
-1500 पेड़ कटंगा ग्वारीघाट मार्ग में काटे
-1400 पेड़ सिविल लाइन क्षेत्र में काटे
-900 पेड़ छोटी लाइन फाटक-तिलवाराघाट मार्ग पर काटे
-800 पेड़ दमोहनाका से पाटन मार्ग में काटे
-600 पेड़ सगड़ा से धुआंधार मार्ग पर काटे
-40 पेड़ हाल ही मदनमहल स्टेशन लिंक रोड पर काट डाले
-06 फीसदी घटी दस साल में हरियाली
-16 लाख से ज्यादा की आबादी वाले शहर में महज सवा तीन सौ उद्यान
-05 हजार से ज्यादा की आबादी पर एक उद्यान

हाईवे पर भी कटे पेड़
-55 किमी जिले में एनएच 12 की सीमा
-38 गांव जिले शामिल
-5200 से ज्यादा पेड़ काटे गए सड़क के दोनों ओर काटे
-06 हजार कुल पेड़ काटे जाने हैं जिले की सीमा में
-07 साल पहले प्रोजेक्ट की हुई थी शुरुआत
-100 से 150 साल तक पुराने पेड़ काटे गए

शहर समेत जिलेभर में पिछले एक दशक में जिस अनुपात में पेड़ काटे गए उसके मुकाबले पौधरोपण नहीं किया गया, जहां पेड़ लगाए भी तो उनके संरक्षण के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं हुए, ये वायु प्रदूषण बढऩे का बड़ा कारण है।
एबी मिश्रा, पर्यावरण विद्

क्रशर में पानी का छिड़काव के साथ ही प्लांट के चारों ओर बाउंड्रीवॉल बनाई जाना चाहिए। ऐसा नहीं होने पर हवा में प्रदूषण बढ़ता है। इसके साथ ही वृहद स्तर पर पेड़ों की कटाई भी वायु प्रदूषण बढऩे का कारण है।
पीआर देव, वैज्ञानिक

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