corona- कोरोना जैसे-जैसे बेकाबू हो रहा, यहां के लोग उतने ही बेपरवाह होते जा रहे हैं!

जबलपुर शहर में सात दिन में मिल गए हजार कोरोना केस, पाबंदियां हटी, दौड़ा शहर, फिर भी जागरुकता नहीं

 

By: shyam bihari

Updated: 07 Sep 2020, 08:28 PM IST

जबलपुर। कोरोना जितनी तेजी से जबलपुर शहर में बेकाबू हो रहा, यहां के लोग उतने ही बेपरवाह होते जा रहे हैं। शहर के बाजारों में भीड़ उमडऩे लगी है। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कम किया जा रहा है। लोग मास्क लगाने से भी बच रहे हैं। अब तक सबसे कम सात दिन में एक हजार नए कोविड मरीज मिले हैं। संक्रमितों का आंकड़ा पांच हजार पार कर गया है। अभी तक जिले में अस्सी हजार से ज्यादा लोगों की जांच हो चुकी है। कोरोना से जान गंवाने वाले मरीजों का आंकड़ा भी शतक की कगार पर है। कोरोना के बढ़ते खतरे के बीच कई तरह के प्रतिबंध प्रशासन ने हटा दिए हैं। परिवहन सेवा शुरूहो गई है। बाजारों में भीड़ बढ़ गई है। ऐसे में जरूरी हो गया है कि सम्भलकर चलें। रोजमर्रा की जिंदगी में संक्रमण से बचाव एवं सावधानियों को शामिल करें। शहर में अनलॉक के बाद से कोरोना केस तेेजी से बढ़े हैं। कोरोना से बचाव के लिए आवश्यक प्रारम्भिक सुरक्षात्मक उपाय अपनाने में भी लोग ढुलमुल रवैया अपना रहे है। प्रशासन की घर-घर से संदिग्धों का पता करके संक्रमण के रोकथाम की कवायद भी थम गई है। लोग बिना मास्क या असुरक्षित मास्क पहनकर घूम रहे हैं। भीड़ में मास्क पहनने, दो गज की दूरी रखने और सेनेटाइजेशन सम्बंधी व्यवस्था की भी जिम्मेदार अनदेखी कर रहे हैं।

यह बातें जानना जरूरी
-यदि आप और आपके साथ में बात करने वाले, किसी भी एक को संक्रमण है और दोनों ने मास्क नहीं लगाया है, तो सामने वाले को 100 प्रतिशत बीमारी के पकड़ में आने की आशंका है।
-अगर दोनों में से किसी एक ने सही तरीके से मास्क लगाया है, तो यह आशंका 10 प्रतिशत हो जाती है। दोनों ने मास्क लगाया है, तब यह आशंका सिर्फ एक प्रतिशत रह जाती है।
- बाजार में कई तरह के फैंसी मास्क उपलब्ध हैं, लेकिन मोटे सूती कपड़े का मास्क जिसके आर-पार रोशनी ना दिखती हो वह सबसे उपयुक्तहै। वह अगर 2-3 परतों वाला हो तो सबसे अच्छा है।
- एन-95 मास्क मरीजों, उनकी देखरेख करने वालों व स्वास्थ्य कर्मियों के लिए ही जरूरी है। जिन मास्क में हवा बाहर जाने देने के लिए एक प्लास्टिक वाल्व लगा होता है, उन मास्क का उपयोग कतई ना करें।
- मास्क लगाने के साथ ही एक-दूसरे के बीच दो गज की दूरी रखना भी अहम है। व्यापारिक प्रतिष्ठान, कार्यालय और हर सार्वजनिक स्थान पर सोशल डिस्टेसिंग रखकर संक्रमण से बचाव सम्भव है।
- समय-समय पर साबुन से हाथ धोना या सेनेटाइजर से साफ करें। बाहर से घर आने पर हाथ अच्छे से धोकर ही किसी वस्तु को छुएं। प्रतिष्ठानों को भी बाहर सेनेटाइजर रखना चाहिए।

मेडिकल कॉलेज के प्राध्यापक डॉ. जितेंद्र भार्गव का कहना है कि कोरोना संक्रमण के साथ ही अभी कुछ समय तक हमें जीना है। संक्रमण से बचे रहें और जिंदगी भी रफ्तार से चलती रहे, इसके लिए सुरक्षात्मक उपायों को लेकर सतर्क होना होगा। रोजमर्रा की कामकाजी आदतों को बदलकर सुरक्षात्मक रुख अपनाना होगा। अब बाजार पूरी तरह खुल चुके हैं। इसमें सोशल डिस्टेंसिंग को बरकरार रखना होगा। बाजार करने के तरीके, अपने काम को सुरक्षित रूप से करने के विकल्प तलाशने के साथ ही खान-पान भी ऐसा रखना होगा कि रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर बनी रहे। साफ-सफाई और शुद्धता का विशेष ध्यान रखना होगा। आदतें बदलकर और सावधानियों को दिनचर्या में शामिल करके ही संक्रमण से सुरक्षित रह सकेंगे। संदिग्ध लक्षण महसूस होता है, तो उसके सम्बंध में चिकित्सक या नजदीकी अस्पताल से सम्पर्क करके तुरंत परामर्श करें। वहीं, नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज के प्राध्यापक डॉ. सचिन कुचया ने बताया कि घर से बाहर निकलने पर सामाजिक दूरी बनाए रखनी है। घर से बाहर निकलते समय सही तरीके से लगाया हुआ फेस मास्क चाहिए, एवं समय-समय पर अपने हाथों को साबुन पानी से या सेनेटाइजर से साफ करना चाहिए। इससे ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि जो लोग ऐसा नहीं कर रहे हैं, उन्हें भी रोकना चाहिए-टोकना चाहिए। यदि डॉक्टर और शासन के दिशा-निर्देश का अच्छे से पालन करेंगे तो अपने घर के अंदर ही कोरोना संक्रमण का फैलाव 10 प्रतिशत तक रोका जा सकता है। घर में अगर किसी को कोविड-19 हो जाता है, ऐसे समय में अगर हम सुरक्षा के उपायों को अच्छे से फॉलो करेंगे तो यह दूसरे परिजनों को होने की आशंका 10 व्यक्तियों के परिवार में घटकर किसी एक को होने की रह जाती है। निर्देशित सुरक्षा उपायों और व्यवहारों के साथ में हम अपनी बस ट्रेन में भी सुरक्षित रूप से यात्रा कर सकते हैं।

shyam bihari Desk
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