बिगड़ी लाइफ स्टाइल बन रही थायराइड मरीज बढऩे का कारण

बिगड़ी लाइफ स्टाइल बन रही थायराइड मरीज बढऩे का कारण
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Sanjay Umrey | Updated: 25 May 2019, 11:00:00 AM (IST) Jabalpur, Jabalpur, Madhya Pradesh, India

शहर के अस्पतालों में हर दिन मिल रहे सौ से ज्यादा नए पीडि़त

जबलपुर। अनियमित दिनचर्या और असंतुलित खान-पान के कारण लोग मोटापे, डायबिटीज और हाइपरटेंशन से पीडि़त हो रहे हैं। इसके कारण लोगों को एक और खतरनाक बीमारी दबे पांव अपना शिकार बना रही है, यह है थायराइड। एक शोध के अनुसार देश में 11 प्रतिशत आबादी में थायराइड के लक्षण हंै। चिकित्सकों की मानें तो थायराइड पीडि़तों का प्रतिशत और अधिक हो सकता है। शहर की अस्पतालों की ओपीडी में आने वाले मरीजों में हर दिन सौ से अधिक लोग थायराइड पीडि़त मिल रहे हैं। हर वर्ष 10-20 फीसदी तक मरीज बढ़ रहे हंै। हैरानी वाली बात ये है कि तेजी से फैल रही बीमारी को लेकर अभी भी पचास प्रतिशत से अधिक आबादी जागरूक नहीं है। पीडि़तों को कैंसर से लेकर महिलाओं में बांझपन की समस्या बढ़ रही है।
मेटाबॉलिज्म पर कंट्रोल
थायराइड एक तरह की ग्रंथि होती है जो गले में बिल्कुल सामने की ओर तितली के आकार में होती है। यह ग्रंथि शरीर के मेटाबॉल्जिम को नियंत्रण करती है। ग्रहण किए गए खाने को ऊर्जा में बदलने का काम करती है। हृदय, मांसपेशियों, हड्डियों और कोलेस्ट्रोल को भी प्रभावित करती है।
बांझपन की शिकार महिलाएं
पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में थायराइड की बीमारी अधिक होती है। गर्भवती महिलाओं में हाइपोथायराइड की बीमारी सामान्य है। यह बांझपन का मुख्य कारण है। स्त्री एवं बांझपन रोग विशेषज्ञ डॉ. जिज्ञासा डेंगरा के अनुसार गर्भावस्था में थायराइड नियंत्रित नहीं होने पर गर्भपात की आशंका बढ़ जाती है। बीमारी के नुकसान से बचने के लिए गर्भावस्था के साथ ही 35 वर्ष की आयु के बाद महिलाओं को प्रति पांच वर्ष में एक बार थायराइड जांच जरूर कराना चाहिए।
कम उम्र के मरीज
शहर में थायराइड के कई नए मरीज कम उम्र में मिले हैं। चिकित्सकों के अनुसार फास्ट फूड सहित असंतुलित खान-पान से बच्चे मोटापे के शिकार हो रहे हैं। मोटापा थायराइड समस्या का प्रमुख कारण हो सकता है। यही वजह है कि 14-16 वर्ष की उम्र में थायराइड के शिकार हो रहे हैं।
यह है स्थिति
-11 प्रतिशत लोग देश में थायराइड से पीडि़त
-02 प्रतिशत भारतीय ही इसमें इलाज करा रहे
-09 प्रतिशत इस बीमारी से अनभिज्ञ
-01 सौ से अधिक मरीज हर दिन शहर में नए
-20 फीसदी तक पीडि़त हर साल शहर में बढ़ रहे
-08 गुना ज्यादा पीडि़त पुरुषों की तुलना में महिलाएं
-25 प्रतिशत डायबिटीज के मरीज को थायराइड
-34 प्रतिशत हाइपर टेंशन के मरीज थायराइड से पीडि़त
(नोट- आंकड़े एक रिसर्च एवं शहर में चिकित्सकों की जानकारी पर आधारित)
कारण
-आयोडीन की कमी
-वंशानुगत
-तनाव, अनिद्रा
-मोनोपॉज, प्रेग्नेंसी
-विकिरण थैरेपी
-दवाओं का अधिक सेवन
लक्षण
-वजन कम होना
-पेट में समस्या
-चिड़चिड़ापन
-कंपकंपी आना
-घबराहट, थकान
-गर्मी बर्दाश्त न होना
-थॉयरायड ग्रंथि का बढऩा
थायराइड के लक्षण एकदम से समझ में नहीं आते हैं, लेकिन पीडि़त होने पर अंदर ही अंदर यह बीमारी सेहत को नुकसान पहुंचाती है। इससे बचाव के लिए समय-समय पर जांच कराना ही उपाय है। घर से बाहर और तला भोजन का उपभोग कम करना चाहिए।
डॉ. पंकज बुधौलिया, विक्टोरिया अस्पताल

थायराइड की बीमारी को लेकर अभी भी जागरुकता की कमी है। अधिकतर पीडि़त बीमारी के लक्षण को नजरअंदाज करते हैं। समय पर उपचार नहीं मिलने से समस्या बढ़ जाती है। इससे थायराइड ग्रंथी की हाइपोथायरॉइडीजम, हाइपरथयारॉईडीजम, थायरॉडईटीस, गॉयटर, नोड्यूल, थाईराई कैंसर का खतरा होता है। बचाव के लिए समय-समय पर जांच कराना बेहद जरूरी है।
डॉ. आशीष डेंगरा, मोटापा एवं थायराइड विशेषज्ञ

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