इन रईसों का अजब है हाल, ऐसे खर्च कर देते हैं करोड़ों रुपए

खर्च कर देते हैं करोड़ों रुपए

By: deepak deewan

Published: 24 Jul 2018, 02:20 PM IST

जबलपुर. ये लोग शहर के जाने-माने रईस हैं। ये इतने मालदार हैं कि सरकारी खजाने में करोड़ों रुपए जमा कर रहे हैं। इन्हीं के कारण आयकर से सरकार का खजाना भरने में शहर का योगदान बढ़ रहा है। राजस्व का आंकड़ा बढ़ाने में आधुनिक तकनीक, निगरानी और विभाग की दबाव की नीति भी कारगर साबित हुई है।

सरकार का खजाना भर रहा शहर, 4.23 लाख करदाता, दो हजार करोड़ आयकर

50 साल पहले आयकर चौराहे पर बनी सेंट्रल रेवेन्यू (सीआर) बिल्डिंग में जबलपुर व आस-पास के 18 जिले और अविभाजित छत्तीसगढ़ के 16 जिलों से कुछ करोड़ आयकर वसूलने वाला जबलपुर आयुक्तालय अब तीन हजार करोड़ से ज्यादा कर संग्रहीत कर रहा है। यह प्रदेश का तीसरा सबसे ज्यादा राजस्व वाला आयुक्तालय है। जबलपुर प्रधान आयकर आयुक्त के अंतर्गत 18 जिले हैं। इनमें केंद्र एवं राज्य सरकार के अलावा निजी उद्यम भी चल रहे हैं। व्यक्तिगत करदाता की संख्या भी कम नहीं है। अब आयकरदाताओं की संख्या चार लाख 23 हजार से ज्यादा हो गई है। करदाताओं की संख्या बढऩे से करसंग्रह बढ़ा है। बीते दस साल के आंकडों की बात की जाए, तो यह 14 सौ से तीन हजार करोड़ के बीच रहा।


ऐसे बढ़ी तकनीक
आयकर संग्रह में वर्ष 2006-07 में शुरू ऑनलाइन रिटर्न फाइल प्रणाली का व्यापक असर दिखा। शुरू में यह कंपनियों के लिए था, बाद में व्यक्तिगत मामलों में भी लागू कर दिया गया। अब केवल सीनियर सिटीजन और जिनका रिफंड बेहद कम है, उनके लिए ही यह अनिवार्य नहीं है। इसी तरह विभाग ने अब पहले की तुलना में ज्यादा तकनीकी दक्षता हासिल की है। अलग-अलग संस्थाओं से लोगों की आय का आकलन, बार-बार नोटिस देना, लोगों की आर्थिक गतिविधियों पर निगरानी और कुछ साल से
शुरू जागरुकता अभियान का असर कर आंकड़ा बढ़ाने में कारगर साबित हुआ।


पांच साल में करदाता
2013-14 1,61,279
2014-15 2,26,980
2015-16 2,57,512
2016-17 3,62,643
2017-18 4,23,501
यह है स्थिति
1967 में सीआर बिल्डिंग का निर्माण, 1968 में कार्य की शुरूआत।
1968 तक कोई कमिश्नर नहीं था। आइएसी ही होते थे सर्वेसर्वा।
1969 से 1973 तक कमिश्नर नागपुर और विदर्भ के पास यहां का प्रभार।
1980 अगस्त में जबलपुर में आयुक्त कार्यालय की स्थापना।
1982 में पहले आयुक्त (अपील) एसपी पांडे की नियुक्ति यहां की गई।
2012-13 में एके पंडा अंतिम और 10वें आयकर आयुक्त थे।
2015 में केआर मीणा पहले प्रधान आयकर आयुक्त की पदोन्नति जबलपुर में।
1999 में एनेक्सी बिल्डिंग बनी। शहर में कई स्थानों पर संचालित था आयकर भवन।

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