साइबर अपराधियों के पैंतरों के आगे लाचार

गम्भीर अपराधों की विवेचना के लिए मैन पावर और तकनीकी विशेषज्ञ नहीं, कई बड़े मामले अनसुलझे

By: santosh singh

Published: 10 Mar 2019, 11:18 PM IST

जबलपुर. तकनीक बढऩे के साथ ही साइबर अपराधों के मामले भी बढ़ रहे हैं। कभी एटीएम कोड पूछकर ऑनलाइन खरीदी कर ली जाती है, तो कभी किसी के इ-मेल, सोशल वेबसाइट का पासवर्ड हैक कर परेशान किया जाता है। सोशल नेटवर्क और लेन-देन के ऑनलाइन व एप आधारित तरीके बढऩे के साथ ही ऑनलाइन फ्रॉड के पैंतरे भी बदल रहे हैं। जालसाजों की बातों में फंसकर पढ़े-लिखे लोग भी ठगे जा रहे हैं।

केस-1
जीवनसाथी डॉट कॉम पर बनाई गई प्रोफाइल पर मैक्स नाम के विदेशी युवक ने शहर की एक महिला प्रोफेसर से दोस्ती की। खुद को लंदन का रहने वाला बताकर भारत भ्रमण पर आया। कस्टम मेें पकड़े जाने का हवाला देकर प्रोफेसर से 16.26 लाख रुपए ऐंठ लिए। सिर्फ 4.50 लाख ही फ्रीज कराए जा सके हैं। प्रकरण में पांच आरोपी कानपुर निवासी हरेंद्र सिंह, सिद्धार्थ शर्मा, शिवम गुप्ता, बद्री चौरसिया और नाइजीरिया निवासी जान अनुबिरी दबोचे गए। गिरोह के अन्य गुर्गे और ठगी की रकम अब तक नहीं मिल सकी है।
केस-दो
गोरखपुर थाना क्षेत्र निवासी हाईप्रोफाइल परिवार की महिला से शादी डॉट कॉम प्रोफाइल पर डॉक्टर राहुल पाठक बनकर शादी के लिए चर्चा की। फिर साइबर ऐप और मोबाइल नम्बरों पर सम्पर्क कर अलग-अलग खातों में 10.20 लाख रुपए जमा कराए। मामले की जांच में सभी खाते फर्जी निकले। मोबाइल भी फर्जी पते पर मिला। साइबर सेल टीम केवल प्रदीप नाम के एक एजेंट को दबोच सकी, जिसने मुनाफे के लिए फर्जी पते पर एक गिरोह को 700 सिम जारी किए थे।
केस-तीन
शहर के एक प्रतिष्ठित डॉक्टर को जेल में बंद एक अपराधी के नाम पर सोशल साइट्स पर गोली मारने की धमकी देते हुए 10 लाख रुपए की डिमांड की गई। मदनमहल थाने में प्रकरण दर्ज किया गया है। साइबर सेल भी मामले पर नजर रखे हुए है। अभी तक सोशल साइट्स के हेडक्वार्टर से टीम को डाटा नहीं मिला है। इससे आरोपी अब तक पुलिस की पकड़ से दूर हैं।
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हर माह 50 से अधिक मामले
स्टेट साइबर सेल में हर महीने 80- 100 शिकायतें पहुंचती हैं। इसमें गम्भीर अपराध पांच से आठ होते हैं। अन्य शिकायतें एटीएम ठगी, सोशल साइट्स के दुरुपयोग की होती हैं। स्टेट साइबर सेल गम्भीर अपराधों की विवेचना के बजाय सोशल साइट्स के दुरुपयोग वाली शिकायतों में उलझी हुई है। महिलाओं से जुड़ी शिकायत होने की वजह से स्टेट साइबर सेल की भी केस रजिस्टर्ड करने की मजबूरी होती है। बाद में शिकायतकर्ता और आरोपी के बीच समझौता हो जाता है।
इन शिकायतों में ट्रेंड नहीं अमला
ट्रोजन हमला, वायरस और कृमि का हमला, जालसाजी, आइपीआर उल्लंघन, साइबर आतंकवाद, बैंकिंग-क्रेडिट कार्ड संबंधित अपराध, इ-कॉमर्स/निवेश धोखाधड़ी, साइबर स्टैकिंग, डेटा चोरी, स्रोत कोड चोरी, कम्प्यूटर स्रोत दस्तावेजों से छेड़छाड़, सोशल मीडिया का दुरुपयोग, स्मार्ट फोन से जटिल साइबर अपराध के अंतर्गत अश्लील तस्वीरें भेजना, गोपनीयता और अन्य कम्प्यूटर संबंधी अपराध, इ-मेल स्पैमिंग, इ-मेल बमबारी, इ-मेल भेजने की धमकी देने आदि प्रकरण।
इन शिकायतों में उलझी स्टेट साइबर सेल
- सोशल नेटवर्किंग साइट की हैकिंग
- फर्जी सोशल नेटवर्किंग साइट बनाने
- सोशल नेटवर्र्किंग साइट पर आपत्तिजनक मैसेज भेजने
- मोबाइल फोन गुमने, चोरी और लूट
- आरोपियों की लोकेशन पता करने में
- आरोपियों की कॉल डिटेल पता करने में
- बैंक अधिकारी बनकर फोन पर ठगी
- अनजान नम्बर से फोन कॉल आने के
- सोशल नेटवर्र्किंग साइट पर मैसेज भेजने
- अश्लील वीडियो और फोटो भेजने
- पोर्न वेबसाइट के लिंक भेजने
ये तरीके आजमाएं
- अपरिचित को नहीं दें मोबाइल नम्बर
- सोशल नेटवर्किंग साइट पर लॉक कोड का इस्तेमाल करें
- अनजान फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार न करें
- सोशल नेटवर्किंग साइट पर ब्लॉक करने के ऑप्शन का उपयोग करें
- एकाउंट नंबर, पासवर्ड किसी को न बताएं
- ठगी का शिकार होने पर पुलिस से करें सम्पर्क
...वर्जन...
साइबर क्राइम की विवेचना में सबसे बड़ी अड़चन यह है कि एक भी सोशल नेटवर्क का डाटा देश में उपलब्ध नहीं है। विदेशों से समय पर सभी डाटा नहीं मिल पाते। जिस तेजी से साइबर क्राइम बढ़ रहे हैं, उसके अनुरूप प्रशिक्षित कर्मियों की भी कमी है।
अंकित शुक्ला, एएसपी, स्टेट साइबर सेल जबलपुर

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