डर के साए में ट्रेनों का सफर, यात्री मांगें सुरक्षा और सुविधा

- महामारी के दौर में दुविधा और सुविधा पर ‘पत्रिका’ की लाइव रिपोर्ट
- कुछ रेलवे की अनदेखी, बहुत हुए अपने आप लापरवाह

By: govind thakre

Published: 25 Sep 2021, 10:54 AM IST

जबलपुर. ‘दुख भरे दिन बीते रे भैया अब सुख आयो रे...’ अभी यह कहने का वक्त नहीं आया। खासकर, महामारी के दौर में ट्रेनों से परिवार के साथ सफर करने वाले यात्रियों के लिए तो कतई नहीं। यात्रियों के मन में कोरोना से बच्चों के बचाव को लेकर चिंता अधिक है। क्योंकि, अभी उनका वैक्सीनेशन नहीं हुआ है। वहीं, स्टेशन से लेकर बोगियों तक कोरोना गाइडलाइन टूट-बिखर रही है। स्टेशन पर कहने को तो इस आशय की उद्घोषणा होती रहती है, लेकिन अब रेलवे प्रशासन की ओर से पहले जैसी सख्ती नहीं होती। यही वजह है कि बहुत से यात्री बिना मास्क के दिख जाते हैं। इस्तेमाल करने वालों के चेहरे पर भी यह नाक और मुंह के नीचे लटकता रहता है। यात्री सुविधाओं को लेकर भी शिकायतें हैं। कई महत्वपूर्ण रूट पर अभी ट्रेनों का संचालन पर्याप्त नहीं है। उनकी प्लेटफॉर्म टिकट सस्ता करने से लेकर एसी बोगियों में चादर व कमबल उपलब्ध कराने की भी मांग है। कोरोना के पहले पश्चिम मध्य रेल में 790 ट्रेनों का संचालन होता था। इसमें से 720 ट्रेनें दोबारा शुरू हो चुकी हैं। पहले संचालित कुछ पैसेंजर ट्रेनें बंद हो गई हैं। इनकी जगह पर अब मेमू ट्रेन का संचालन हो रहा है।
‘पत्रिका’ टीम ने कुछ लम्बी और छोटी दूरी की ट्रेनों में सफर कर रहे यात्रियों से उनकी दुविधा और सुविधा के बारे में जानने का प्रयास किया। इंदौर से जबलपुर के लिए आइटी इंजीनियर विवेक गुप्ता डबल मास्क लगाकर इंटरसिटी में सवार हुए। कोरोना सम्बंधी आशंका के बारे में उनसे पूछा जाता, उससे पहले ही उन्होंने सवाल दाग दिया। पूछा कि कोरोना के जो आंकड़े इन दिनों जारी किए जा रहे हैं, क्या वे वास्तविक हैं? इसके बाद उन्होंने सिलसिलेवार तरीके से अपनी कई आशंकाएं व्यक्त कीं। वे कोरोना की दूसरी लहर में करीबी मित्रों को खोने के बाद काफी डरे हुए थे। तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए अतिरिक्त सावधानी बरत रहे हैं। रेलवे के ढुलमुल रवैए और लापरवाही बरतने वालों के प्रति उनके मन में झुंझलाहट दिखी।
मुकेश कुशवाहा ने बड़ी बहन मीरा कुशवाहा और जीजा उमेश कुशवाहा के साथ अम्बिकापुर से जबलपुर के लिए सफर के दौरान बताया कि वे दूसरी लहर के बाद तीसरी बार ट्रेन यात्रा कर रहे हैं। कुछ बड़े स्टेशनों को छोडकऱ रेलवे की ओर से जरूरी सावधानियां नहीं बरती जा रहीं। भीड़ नियंत्रित करने की पुख्ता व्यवस्था नहीं है। न कोई मास्क के बारे में पूछने वाला है, न वैक्सीनेशन के सम्बंध में। लम्बी दूरी की ट्रेनों में कोरोना गाइडलाइन का पालन बड़ी समस्या है। यात्री राजेश ग्वालानी का कहना है कि अभी कई रूट पर गाडिय़ां कम हैं। धीरे-धीरे उन्हें भी शुरू करने के साथ टिकट भी काउंटर से देना शुरू करना चाहिए। एमएसटी पर यात्रा भी शुरू की जााए। एसी बोगी में सफर करने वाले सिद्धार्थ गौतम का कहना था कि रेलवे ने यात्रियों की सुविधाओं के लिहाज से काफी कुछ खुद को अपग्रेड किया है। एसी कोच के यात्रियों को अब तकिया-चादर और कम्बल उपलब्ध कराए जाएं या कोई वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। अभी यात्रियों को काफी असुविधा होती है।
जबलपुर-कटनी-नरसिंहपुर रूट में ये परेशानियां
- जबलपुर-गोंदिया ब्रॉडगेज लाइन बनने के बाद भी अभी तक प्रतिदिन ट्रेन नहीं है। मजबूरी में जबलपुर से आगे का सफर सडक़ मार्ग से करना होता है।
- कटनी को केंद्र मानकर पैसेंजर ट्रेनों की टाइमिंग नहीं होने से व्यापारी वर्ग परेशान हैं। कटनी से पांच दिशाओं में ट्रेनें चलती हैं, लेकिन जबलपुर लाइन को छोड़ दें तो अन्य दिशा से आने वाली ट्रेनों की टाइमिंग अनुकूल नहीं है।
- नरसिंहपुर में अप और डाउन में 40 -40 गाडिय़ों का ठहराव है। लगभग सभी गाडिय़ां चालू है, लेकिन इटारसी से सतना फास्ट पैसेंजर की जगह आठ डिब्बे वाली मेमू यात्रियों के लिहाज से छोटी है। इसमें कोरोना का डर रहता है।
यात्री रेलवे का करें सहयोग
यात्रियों से लगातार आग्रह कर रहे है। प्लेटफॉर्म, ट्रेन में यात्रा के दौरान कोविड गाइडलाइन की पालना करें। जांच में बिना मास्क के पाए जाने वाले यात्रियों पर जुर्माना कार्रवाई भी की जा रही है। रेलवे की ओर से यात्री सुविधाओं को बेहतर बनाने लगातार प्रयास हो रहे हैं। यात्री भी रेलवे का सहयोग करें।
- राहुल जयपुरियार, मुख्य जनसंपर्क अधिकारी, पश्चिम मध्य रेल

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govind thakre Editorial Incharge
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