यहां आसमानी आग को औकात बता रहे हैं आंगन में लगे पेड़

पुराने घरों में लगे हैं पेड़, गर्मी से मिलती है राहत

By: shyam bihari

Published: 19 May 2019, 08:00 AM IST

जबलपुर। गर्मी की तपिश शहरवासियों को बेहाल कर रही है। गर्म हवा के थपेड़े सुबह नौ बजे से ही झुलसाने लगते हैं। दोपहर में तो मानो आग बरसने लगती है। इस दौरान के चार से पांच घंटे बिताना जंग लडऩे जैसा हो रहा है। ऐसे में पुराने व्यवस्थित स्वरूप में बने घरों के आंगन में लगे पेड़ गर्मी की तपिश से राहत दिला रहे हैं। राइट टाउन, नेपियर टाउन के घरों में सबसे ज्यादा पेड़ लगे हैं। बड़ी संख्या में घरों के आंगन में कई पेड़ लगे हैं। ऐसे रहवासी परिसर में तापमान शहर के अन्य क्षेत्रों के मुकाबले कम महसूस हो रहा है। मौसम वैज्ञानिकों का भी मानना है कि रिहायशी परिसर में पेड़ लगे होने पर तापमान दो से तीन डिग्री तक कम महसूस होता है। शहर के बाकी हिस्सों में भी पेड़ों को सहेजने का चलन शुरू हो जाए, तो हरियाली अपने आप लौट आएगी।
ऐसे नियंत्रित होता है तापमान
आंगन में लगे बड़े छायादार पेड़ सीधे तौर पर भवन में धूप नहीं पडऩे देते। इतना ही नहीं पेड़ों से वाष्पन भी होता रहता है। जिसके कारण तापमान काफी हद तक नियंत्रित रहता है। हवा चलने ठंडक का भी अहसास होता है। खास बात तो ये कि दोपहर के वक्त बिजली गुल होने और कूलर, पंखा एसी के बंद होने पर ये हरे-भरे पेड़ सबसे बड़ा सहारा बनकर सामने आते हैं।
पुरानी कॉलोनियों में प्लानिंग से लगे हैं पेड़
शहर की पुरानी कॉलोनियों व अन्य रिहायशी क्षेत्रों में पूरी प्लानिंग के साथ व्यवस्थित तरीके से पेड़ लगाए गए हैं। लेकिन अब नगर में विकसित हो रही ज्यादातर टाउनशिप से लेकर नई कॉलोनियों में से ज्यादातर जगह पौधरोपण के लिए जगह ही नहीं छोड़ी जा रही है।

रिहायशी परिसर में पेड़ लगे होने यानी होम स्टेक प्लांटेशन होने पर वे कार्बन डाई ऑक्साइड अवशोषित करते हैं। ऑक्सीजन छोड़ते हैं। लगातार वाष्पन के जरिए माइक्रो क्लाइमेट बनता है पेड़ उस पूरे परिसर में तापमान को नियंत्रित रखते हैं। इतना ही कूलर व एसी से बाहर निकली गर्म हवा को भी ठंडा करते हैं।
डॉ. अविनाश जैन, वैज्ञानिक, क्लाइमेट चेंज, टीएफआरआइ

shyam bihari Desk
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