यह शहर ऊपर से धार्मिक आस्थाओं से ओपप्रोत दिखता है, लेकिन हर साल तैयार होते हैं 7000 इंजीनियर

ट्रिपल आईटीडीएम और प्रदेश का सबसे पुराना जबलपुर इंजीनियर कॉलेज है जबलपुर शहर की शान

 

 

By: shyam bihari

Published: 15 Sep 2020, 07:37 PM IST

 

शहर में कॉलेज

1 ट्रिपल आईटी डीएम
1 जेईसी संस्थान
12 इंजीनियरिंग कॉलेज
9 हजार छात्र अध्ययनरत

यह है रुझान
30 फीसदी कंप्यूटर साइंस
30 फीसदी आईटी
20 फीसदी इलेक्ट्रॉनिक्स
10 मेकेनिकल और सिविल
05 इंडस्ट्री
05 फीसदी अन्य

जबलपुर। संस्कारधानी के रूप में पहचाने जाने वाला यह शहर तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में भी पीछे नहीं है। शहर से हर साल 7000 इंजीनियर निकलते हैं। यहां से निकलने वाले 55 फीसदी छात्र पढ़ाई के दौरान ही नौकरी को पा लेते हैं। ट्रिपल आईटीडीएम और प्रदेश का सबसे पुराना जबलपुर इंजीनियर कॉलेज शहर की शान है। इसके साथ ही शहर के कई तकनीकी शिक्षा कॉलेज ने भी देश-प्रदेश में अपनी पहचान कायम कर रखी है। 25 फीसदी छात्र उच्च डिग्री के लिए चले जाते हैं।
कम्प्यूटर साइंस के प्रति बढ़ा रुझान
पिछले कुछ सालों से आईटी सेक्टर में आए बूम के कारण इंजीनियरिंग के छात्रो में कम्प्यूटर और आईटी के क्षेत्र में रूझान बढ़ा है। सर्वाधिक 30 फीसदी छात्र इस सेक्टर में पढ़ाई के लिए आ रहे हैं। इन इंडिया और स्किल डेव्लपमेंट, स्मॉल स्केल इंडस्ट्री जैसी योजनाओं को बढ़ावा दिए जाने के कारण आने वाले समय में मैन्यूफैक्चिरिंग इंजीनियिरंग की दिशा में बूम आएगा। जानकारों का कहना है कि कई विदेशी कंपनियां चीन से अपना कारोबार समेटकर इंडिया आ रही हैं। कोराना खत्म होने के बाद परिस्थितियां तेजी से बदलेंगी। ऐसे में इंडस्ट्री बेस युवाओं की मांग में भी इजाफा होगा। आने वाले समय में यह सेक्टर युवाओं के लिए भी रोजगार का एक बड़ा केंद्र बनेगा।

आईटी विशेषज्ञ डॉ. पंकज गोयल का कहना है कि वर्तमान समय में कम्प्यूटर साइंस के प्रति युवाओं का रुझान है। मेक इन इंडिया प्रोग्राम की लांचिंग के बाद मैन्यूफैक्चिरिंग सेक्टर में इंजीनियरों की डिमांड बढ़ेगी। चीन से कंपनियों के विश्वास खोने और भारत की और रुख करने से यह सेक्टर युवाओं के लिए रोजगार का बड़ा केंद्र बनेगा। जेईसी एक्सपर्ट डॉ. प्रशांत जैन मानते हैं कि इस फील्ड में बड़ी संभावनाएं हैं। हर साल हजारों की संख्या में युवा इंजीनियरिंग की डिग्री लेकर निकलते हैं। युवाओं को बाजार के हिसाब से भी स्किल्ड होना पड़ेगा। सात हजार युवा इंजीनियरिंग की डिग्री लेकर निकलते हैं। विशेषज्ञ डॉ. शैलेष गुप्ता ने कहा कि हर ब्रांच में स्कोप है। कंपनियों के साथ अब हमें भी खुद इम्पालयमेंट जनरेट करने होंगे। जरूरी नहीं है कि नौकरी ही करें। इंजीनियरिंग के युवा आज खुद स्टार्टअप कर रहे हैं। सरकार भी इस दिशा में प्रयास कर रही है।

shyam bihari Desk
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