बेकार बहस कर समय खराब करने से कोरोना के खिलाफ उठाए जा रहे कदम हो जाएंगे निष्फल

हाईकोर्ट ने कहा, याचिकाकर्ता पर लगाई बीस हजार रुपए कॉस्ट

By: prashant gadgil

Published: 19 Mar 2020, 08:56 PM IST

जबलपुर. मप्र हाईकोर्ट ने गुरुवार को कहा कि कोरोना के खतरे को देखते हुए कोर्ट केवल अर्जेंट मामलों की ही सुनवाई कर रही है, एेसे में बेवजह देर तक बहस कर अर्जेंट सुनवाई की जिद अनुचित है। वकील इसी तरह करेंगे तो हाईकोर्ट के इस दिशा में उठाए गए कदम निष्फल हो जाएंगे। यह कहते हुए जस्टिस सुबोध अभ्यंकर की सिंगल बेंच ने याचिकाकर्ता पर 20 हजार रुपए का जुर्माना (कॉस्ट) ठोंक दिया। भविष्य में ऐसी गलती न करने की चेतावनी भी दी गई। कटंगी निवासी मोहम्मद यासीन ने यह याचिका दायर कर दरगाह हजरत जिंदा शाह वली-ए-कामिल, कटंगी वक्फ की प्रबंध कमेटी के गठन को चुनौती दी थी। सुनवाई के दौरान मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड की ओर से अधिवक्ता मुकेश कुमार अग्रवाल व प्रबंध कमेटी की ओर से अधिवक्ता ब्रह्मदत्त सिंह, साजिद नवाज खान व मोहम्मद अमजद ने हाईकोर्ट का ध्यान इस दिशा में आकृष्ट कराया कि कोरोना वायरस के खतरे के कारण सिर्फ अर्जेंट केस सुने जाने की व्यवस्था दी गई है। इसके बावजूद याचिकाकर्ता मनमाने तरीके से अर्जेंट न होते हुए भी इस मामले की सुनवाई पर अड़ा है। जबकि उसने स्वयं याचिका दायर करने में 9 माह का विलंब कर दिया है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मोहम्मद अली ने मामले को अत्यावश्यक बताते हुए सुनवाई पर जोर दिया। इस पर कोर्ट ने 20 हजार रुपए कॉस्ट लगाते हुए दो सप्ताह में राशि मप्र विधिक सेवा समिति में जमा करने का निर्देश दिया। याचिका की सुनवाई ६ माह बाद की जाएगी।

prashant gadgil Desk
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