50 हजार रुपए में नगरनिगम की नौकरी, जानिए कैसा है यह गोरखधंधा

50 हजार रुपए में नगरनिगम की नौकरी, जानिए कैसा है यह गोरखधंधा
Unemployment fraud in the municipal corporation

Balmeek Pandey | Updated: 19 May 2017, 04:59:00 PM (IST) Jabalpur, Madhya Pradesh, India

11 बेरोजगार को ठगों ने लगाया चूना, रुपए लेने के बाद थमाया नियुक्ति-पत्र 

जबलपुर। आप यदि बेरोजगार है तो आपके पास सुनहारा मौका है। आपको किसी प्रकार का इंटरव्यू नहीं देना है। आपको सिर्फ 50 हजार रुपए देने पड़ेंगे और घर बैठे नगर निगम में नौकरी पा जाएंगे। आप तक नियुक्ति पत्र पहुंच जाएगा...। ऐसा झांसा देकर शातिर गिरोह ने कई बेरोजगारों को चूना लगाया। इस गिरोह में कथिततौर पर नगर निगम के कर्मचारियों का शामिल होना बताया गया है। इस गिरोह के गुर्गे पहले निगम में नौकरी का लालच देते हैं फिर विश्वास जीतकर हजारों रुपए एेंठ लेते हैं। इस जालसाजी के शिकार हुए पीडि़त पैसा गंवाने के बाद अब नौकरी की आस में भटक रहे हैं लेकिन सामने आने से कतरा रहे हैं कि कहीं उनके हाथ से नौकरी का यह अवसर न छूट जाए।


छानबीन के बाद ये सामने आया सच
नगर निगम के कुछ कर्मचारी विभाग में नियुक्ति का लालच देकर युवाओं से ठगी कर रहे है। इसका खुलासा उस वक्त हुआ जब कुछ युवा जाली नियुक्ति पत्र लेकर नगर निगम के संभागीय कार्यालयों में पहुंचे। युवाओं द्वारा जब निगम में नियुक्ति के दस्तावेज दिखाएं गए तो छानबीन के बाद उनके के होश उड़ गए। गुपचुप तरीके से हुई जांच में युवाओं को पता चला कि उनके साथ जालसाजी हुई है। स्वयं को निगम कर्मी बताने वाले ने उनसे हजारों रुपए एेंठकर निगम में नियुक्ति के जाली आदेश थमा दिए गए है।

मंदिर में हुई थी मुलाकात
जालसाजी के शिकार युवकों के अनुसार उनकी मुलाकात कुछ माह पहले मां त्रिपुर सुंदरी मंदिर के साइकिल स्टैंड में एक युवक से हुई। मंदिर आते-जाते स्टैंड पर कई बार मुलाकात के बाद युवक से दोस्ती हो गई। उसने स्वयं को नगर निगम का कर्मचारी बताया। बातचीत के दौरान निगम अधिकारियों से सेटिंग होने की बात कही। 50 हजार रुपए देने पर निगम में नौकरी लगवाने की बात कही। इस वर्ष की शुरुआत में आरोपित निगम कर्मी को 50 हजार रुपए दिए। इसके बाद आरोपित ने कथित तौर पर युवक को अप्रैल माह में एक आदेश की कॉपी देकर निगम के संभागीय कार्यालय में ज्वाइन करने के लिए कहा। 

11 बेरोजगारों से धोखाधड़ी 
निगम के इस कथित कर्मचारी की जालसाजी के करीब 11 युवक शिकार हुए है। सूत्रों के अनुसार कथित निगम कर्मी ने युवा खिलाडि़यों के एक समूह को अपने विश्वास में लिया। समूह में 4 खिलाड़ी थी। इन्होंने सरकारी नौकरी मिलने की लालच में कथित निगम कर्मी को प्रति उम्मीदवार 50 हजार रुपए के अनुसार रकम दे दिए। इस बात की भनक जब उनके कुछ साथियों को लगी तो उन्होंने भी सरकारी नौकरी की उम्मीद में कथित निगम कर्मी से संपर्क भिड़ाया। इसके बाद करीब 7 युवाओं से कथित निगम कर्मी से नौकरी लगाने के नाम पर प्रति उम्मीदवार 50 हजार से 1 लाख रुपए तक की अवैध उगाही की है।

खुद को बाबू बताया, निकला चपरासी
निगम कर्मी ने युवाओं को बताया कि वह बाबू है। निगम की नियुक्ति संबंधी प्रक्रिया में उसका दखल है। अधिकारियों से बातचीत करके वह युवाओं की नौकरी की सेटिंग कर देगा। कथित कर्मी के बहकावे में आएं बेरोजगार युवाओं ने जब निगम मुख्यालय में पहुंचकर संबंधित कर्मचारी के बारे में पूछताछ कि तो उसके चतुर्थ श्रेणी के पद पर पदस्थ होने की सूचना दी गई। पता चला है कि वह निगम के एक संभागीय कार्यालय के अंतर्गत चपरासी है। 

पचा गए गड़बड़झाला  
बेरोजगार युवक जाली नियुक्ति पत्र लेकर ज्वाइन देने के लिए निगम के संभागीय कार्यालयों में पहुंचे। अलग-अलग कार्यालय में युवक उपस्थित होकर उन्हें मिले नियुक्ति पत्र दिखाएं। संबंधित कार्यालय के जिम्मेदारों ने नियुक्ति पत्र को फर्जी ठहराया। लेकिन इस फर्जीवाड़े की जांच में विभागीय स्तर पर कोई पहल नहीं की गई। व्यापक स्तर पर हुए गड़बड़झाले को जिम्मेदार पचा गए। 

मिलीभगत का खेल 
युवकों को सरकारी नौकरी का झांसा देकर लाखों रुपए एेंठने के मामले में निगम अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध हो गई है। युवकों को जारी किए गए जाली नियुक्ति पत्र नगर निगम के लैटर पैड पर है। इसमें नियुक्त कर्मचारी का पदनाम, पदस्थापना स्थल और कार्यालयीन समय दर्ज है। नियुक्ति पत्र में अपर आयुक्त के हस्ताक्षर दर्शाए गए है। संबंधित विभागों को प्रतिलिपि सूचनार्थ प्रेषित है। सूत्रों के अनुसार इस खेल में निगम के कुछ और कर्मचारी शामिल है। बिना मिलीभगत के निगम के लैटर पैड पर नियुक्ति पत्र की नकल करके जारी करना संभव नहीं है। जांच होने पर निगम में सक्रिय फर्जी भर्ती गिरोह सामने आ सकता है। 

11 बेरोजगार युवकों को नौकरी दिलाने ठगी 
50 हजार रुपए न्यूनतम राशि की प्रति युवक मांग
07 लाख रुपए के लगभग की बेरोजगारों से सौदेबाजी 

इनका कहना है
हां, हमारे पास इस मामले की शिकायत आई है लेकिन दोनों पक्षों में राजीनामा किया जा रहा है। दोनों पक्ष एक-दूसरे से परिचित हैं।
संजय भलावी, टीआई, संजीवनीनगर

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