Independence day special : इस स्कूल के हर कोने में है आजादी के आंदोलन की खुशबू, देखें वीडियो

Independence day special : इस स्कूल के हर कोने में है आजादी के आंदोलन की खुशबू, देखें वीडियो

Prem Shankar Tiwari | Publish: Aug, 12 2018 09:44:31 PM (IST) Jabalpur, Madhya Pradesh, India

आजादी के आंदोलन की याद दिलाता अनूठा स्कूल

जबलपुर। आजादी के जश्न का अवसर आ रहा है। 15 अगस्त को पूरे देश में उत्सव के माहौल में तिरंगा फहराया जाएगा। आजादी के मतवालों के भावपूर्ण स्मरण के साथ स्वतंत्रता दिवस की खुशी में रंगारंग कार्यक्रम भी होंगे। इस बीच एक स्कूल में इस बार भी नजारा हटकर रहेगा। यहां पूरे विद्यार्थी गांधीजी जैसी वेशभूषा में पहुंचेंगे। बात हो रही है सिंहपुर बड़ा स्थित शासकीय स्कूल की। वैसे तो यहां बच्चे रोजाना ही सिर पर गांधी टोपी लगाकर स्कूल आते हैं, लेकिन स्वाधीनता दिवस पर नजारा कुछ हटकर होगा। यहां गांधी टोपी और वैसे ही लिबाज में आजादी के चतुर चितेरों को याद किया जाएगा। विद्यार्थियां के अनूठे अंदाज के कारण ही यह स्कूल प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश में फेमस है। स्वतंत्रता दिवस पर इस बार भी स्कूल में विशेष कार्यक्रम होगा, जिसमें आसपास के गांवों के लोग भारी संख्या में शामिल होंगे। कार्यक्रम की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

गांधी बाबा की देन
महात्मा गांधी के सम्मान में गांधी टोपी के उपयोग परम्परा को निभाने वाला गांव नरसिंहपुर से करीब 8 किलोमीटर दूर बसा है। सिंहपुर के नाम से प्रसिद्ध इस गांव के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में आज भी छात्र गांधी टोपी पहनते हैं। ये इनके स्कूल यूनिफॉर्म में ही शामिल है। जो कि सबसे अलग और आकर्षक है। यहां के छात्र इसे (गांधी बाबा) महात्मा गांधी की देन मानते हैं।

गांव आए थे बापू
शिक्षक एस के शर्मा ने बताया कि असहयोग आंदोलन के समय गांधीजी जब देशभ्रमण कर रहे थे, तब वे सिंहपुर गांव से भी गुजरे थे। उन्होंने गांव में स्वतंत्रता की अलख जगाई। गांधीजी की स्मृति को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए ग्रामीणों ने गांधी टोपी पहनना शुरु कर दिया और बाद में अपने बच्चों को टोपी पहनाकर ही स्कूल भेजने लगे। इस परंपरा ने स्कूल ही नहीं बल्कि पूरे गांव को अलग पहचान दी है।

चरखों में बसी यादें
वक्त की आंधी ने करवट बदली और गांधी टोपी का दौर लगभग खत्म हो गया। शिक्षित वर्ग कई बार इसे पहनना अजीब महसूस करता है। लेकिन इस स्कूल में बच्चों और शिक्षकों के लिए ये गौरवांवित करने वाला है। उनका कहना है इस तरह वे रोज ही बापू को याद करते हैं। गांधीजी की के सम्मान में स्कूल में कई सालों तक चरखा भी चलाया जाता रहा। यहां पुराने चरखे अभी भी रखे हैं।

ऐतिहासिक है स्कूल
बताया गया है कि सिंहपुर शासकीय स्कूल की स्थापना 1844 में हुई थी। 174 साल पुराने स्कूल में यहां की परंपरा नही बदली। यहां सब कुछ वैसा ही है जैसा स्थापना के समय था। स्वच्छता और शिक्षक व छात्रों का समर्पण लोगों को अभिभूत कर देता है। स्कूल में सन्1942 से लेकर आज तक गांधी टोपी पहनकर पढ़ाई करने की इस पंरपरा अनवरत जारी है। शिक्षकों का कहना है कि वे इस गौरव को सदा कायम रखेंगे।

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