अनलॉक को समझ लिया खत्म हो गया कोरोना संक्रमण, हर जगह केवल भीड़

-सोशल डिस्टेंसिंग का नहीं हो रहा पालन
-मास्क तक नहीं लगा रहे लोग
-कोरोना संक्रमण में लगातार हो रही वृद्धि

By: Ajay Chaturvedi

Published: 30 Jun 2020, 02:51 PM IST

जबलपुर. एक तरफ पूरे देश में कोरोना संक्रमण का कहर बढता जा रहा है। हजारों की तादाद में लोग रोजाना संक्रमित हो रहे हैं। लेकिन सरकार ने अनलॉक के नाम पर रियायत क्या दी आम आदमी ने मान लिया कि कोरोना संक्रमण खत्म हो गया। बाजार हों या सड़कें आम दिनों की तरह भीड़ नजर आने लगी है। लोग एक दूसरे को धकियाते हुए चले जा रहे हैं। कई तो ऐसे भी सड़कों पर नजर आ रहे हैं जिन्होंने मास्क तक नहीं लगाया है। इस घोर लापरवाही का ही नतीजा है कि कोरोना का संक्रमण तेजी से फैल रहा है। कहीं न कहीं हम खुद खतरे को दावत देते नजर आ रहे हैं।

लॉकडाउन में जब सब कुछ बंद था तो हर किसी को परेशानी होने लगी। जरूरत के सामान नहीं मिल रहे थे। काम-काज ठप हो गया था। लोगों की आर्थिक स्थिति बिगड़ने लगी थी। आम आदमी की माली हालत बिगड़ी तो सरकार की वित्तीय स्थिति भला कैसे दुरुस्त रहती। लिहाजा धीरे-धीरे जीवन को पटरी पर लाने के लिए अनलॉक का सहारा लिया गया। लेकिन अनलॉक-1 के अनुभव को उचित नहीं कहा जा सकता।

हाल ये है कि बाजार खुल गया तो दुकानों में भीड़ लगने लगी। शराब दुकानें खुल गई तो पीने के शौकीन मस्त हो गए। ऑटो रिक्शा चलने की इजाजत मिली तो चालकों ने पहले की तरह सवारियों को ठूंसना शुरू कर दिया। हर कोई बेपरवाह नजर आने लगा। ये हाल तब है जब संक्रमण का खतरा ज्यादा बढ़ गया है। सिर्फ जबलपुर की ही बात करें तो संक्रमितों का आंकड़ा 4 सौ के पार पहुंच गया है। लेकिन सावधानी गायब हो गई है। ऐसे में दुर्घटना के मौके बढ़ गए हैं।

अब संक्रमण बढ़ रहे हैं तो कुछ लोग इसका ठीकरा प्रशासन पर फोड़ने से बाज नहीं आ रहे। उन्हें अपनी असावधानी से सरोकार नहीं। वो ये समझ ही नहीं पा रहे कि सड़कों पर देह से देह की दूरी का पालन करना, घर से निकलते वक्त मास्क पहनना अनिवार्य इसलिए है कि इससे हमारा जीवन ही सुरक्षित रहेगा।

लेकिन अब जिला प्रशासन ने भी कोरोना वायरस की चेन को तोड़ने के लिए नियमावली तैयार की है। बताया गया है कि कोरोना से बचने के लिए चार पाहिया वाहन में तीन से अधिक लोग नहीं बैठ सकेंगे। दोपहिया वाहन पर सिर्फ एक व्यक्ति ही चल सकेगा। ऑटो में दो सवारी से ज्यादा नहीं बैठाई जा सकती। लेकिन इसका पालन करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है, जबकि बाकायदा चालान भी हो रहे हैं। लेकिन लोग हैं कि उन्हें चालान भरने में मजा आ रहा है। इसमें भी रईसी नजर आ रही है। शराब दुकानें पहले ही खोल दी गईं तो यहां भी नियम टूटते नजर आ रहे हैं।

अब दमोहनाका चौक, ब्लूम चौक, तीन पत्ती, पुराना रोडवेज इलाके में रेड सिग्नल के साथ ही वाहनों की लंबी कतार लग जाती है। इस दौरान लाउडस्पीकर पर सोशल डिस्टेंसिंग का सबक भी सिखाया जाता है। सीसीटीवी के जरिए यह नजारा पुलिस कंट्रोल-रूम में पहुंचता है और कोविड-19 के लिए बनाए गई मॉनीटरिंग एंड कंवेन्शन रूम में भी। लेकिन सारा सिस्टम होते हुए भी प्रशासन पंगु सा बना दिखाई दे रहा है।
इस सिस्टम के टूटने में ट्रैफिक पुलिस कहीं न कहीं तो जिम्मेदार है, आखिर जब सिग्नल तोड़ने वाले वाहनों का नंबर देखकर चालकों को चालान भेजा जा सकता है तो ऑटो रिक्शा, कार, बाइक,स्कूटर की ओवर लोडिंग पर भी वैसा ही किया जा सकता है। पर नहीं।

लंबे चले लॉकडाउन के बाद बाजार और दुकानों को इसी शर्त पर खोलने की परमीशन दी गई थी कि दुकानों के सामने गोले बनाए जाएंगे। ग्राहकों के बीच सोशल डिस्टेंसिंग बनी रहेगी। दुकान में सेनिटाइजर रखना होगा। दुकानदार और ग्राहकों को मास्क पहनना होगा। लेकिन अनलॉक-1 में शहर के किसी भी क्षेत्र में जाएं दुकानों में प्रोटोकॉल का कहीं पालन नहीं हो रहा। दुकान के अंदर लोगों की भीड़ रहती है। सेनिटाइजर रहता नहीं है, अगर कहीं रखा भी है तो सिर्फ दिखावे के लिए उसका उपयोग नहीं होता है। ऐसे में कोई संक्रमित ग्राहक पहुंच गया तो कितने लोगों के बीच संक्रमण फैलाएगा इसकी चिंता न दुकानदार को है न ग्राहक को।

अब सरकार एक जिले से दूसरे जिलों के लिए बसें चलाने की तैयारी कर रही है। हालांकि अभी सवारियों की संख्या को लेकर बहस छिड़ी है, लेकिन आने वाले समय में नियमों का पालन कैसे होगा इसकी चिंता नहीं। अभी शहर में जो ऑटो चल रहे हैं उन्हें दो सवारियों के साथ ही ऑटो चलाना है, लेकिन ऑटो में आठ से दस लोग बैठाए जा रहे हैं।

कोट

"नियम तोड़ने वालों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही हैं। लेकिन लोगों को खुद भी सावधानी बरतनी है। एक दूसरे को टोकना भी है कि वे मास्क लगाएं और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें। कोरोना वायरस का खतरा कम नहीं हुआ है लेकिन आर्थिक गतिविधियों को सुचारु रूप से चलाने को बाजार और दुकानें खोली गई हैं।" - भरत यादव, कलेक्टर

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