script UK पुलिस करेगी जबलपुर डिपो की सेल्फ लोडेड रायफल का इस्तेमाल, नहीं ली गई कोई रकम | Uttarakhand Police will be equipped with self loaded rifle of Jabalpur depot | Patrika News

UK पुलिस करेगी जबलपुर डिपो की सेल्फ लोडेड रायफल का इस्तेमाल, नहीं ली गई कोई रकम

locationजबलपुरPublished: Feb 05, 2024 09:44:48 am

Submitted by:

Ashtha Awasthi

- बिना कीमत लिए सीओडी ने सौंपी तीन हजार एसएलआर
- सेना के लिए खरीदी गई थी एसएलआर, डी कमीशन किए जाने से थी अनुपयोगी

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Jabalpur depot

जबलपुर। तीस वर्ष तक भारतीय थल सेना के प्रमुख हथियार में शामिल रही 7.62 एमएम सेल्फ लोडेड राइफल (एसएलआर) का इस्तेमाल उत्तराखंड पुलिस करेगी। सेंट्रल ऑर्डनेंस डिपो (सीओडी) में रखी तीन हजार रायफल को अपडेट कर राज्य पुलिस के सुपुर्द किया गया है। उत्तराखंड सरकार से इसके बदले कोई रकम नहीं ली गई है।

जानकारी के अनुसार सेना के लिए एसएलआर की आपूर्ति की गई थी। जिसे जबलपुर के ऑर्डनेंस डिपो में रखा गया था। सेना ने उन्नत आम्र्स को अपनाया तो यह अनुपयोगी हो गई। जिससे हजारों एसएलआर का जखीरा डिपो में जमा हो गया। जो कबाड़ बनता जा रहा था। इन्हें उपयोगी बनाए रखने के लिए राज्यों की पुलिस को दिए जाने का निर्णय लिया गया। साथ ही प्रस्ताव दिया गया कि रक्षा विभाग उन्हें अपडेट करके राज्यों के पुलिस बल को मुफ्त में उपलब्ध कराएगा। इस प्रस्ताव पर उत्तराखंड सरकार ने पुलिस के लिए तीन हजार एसएलआर की मांग रखी। जिसे स्वीकार कर सीओडी में रखे रायफलों के जखीरे में से तीन हजार रायफल को अपडेट कर उत्तराखंड के गृह विभाग को सौंपा गया।

सेना में अत्याधुनिक राइफल का इस्तेमाल

वर्ष 1988 तक सेना में एसएलआर का इस्तेमाल होता था। फिर इसकी जगह 5.56 एमएम इंसास राइफल ने ले ली। अभी इंसास के अलावा अमेरिका में बनी अत्याधुनिक सिग सॉयर 716 असॉल्ट राइफल का इस्तेमाल किया जाता है। वहीं मशीन गन इजराइल से मंगाई जाती है। हालांकि मजबूत बॉडी, डिजाइन, मारक क्षमता और कम मेंटीनेंस की विशेषता के कारण एसएलआर की राज्य पुलिस में मांग है। कई राज्यों ने इसकी खरीदी की है। हालांकि सेना राज्यों से इसके लिए कोई राशि नहीं लेने का निर्णय लिया है।

कमांडेंट ने सौंपा कंसाइनमेंट

सीओडी के कमांडेंट ब्रिगेडियर वसंत कुमार ने उत्तराखंड पुलिस बल को 3 हजार 7.62 एमएम सेल्फ लोडेड राइफल (एसएलआर) को सौंपा। इसे राज्य के सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने की दिशा में मजबूत कदम बताया गया। जल्द ही इन राइफल को दूसरे राज्यों को भी उपलब्ध कराया जाएगा।

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