वैशाख पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं ने लगाई पुण्य की डुबकी, नर्मदा तट पर पहुंचे भक्त

सुबह ही नर्मदा तट पर हुआ स्नान-दान, अनुष्ठान, भेड़ाघाट में निकाली गई नर्मदा पंचकोसी परिक्रमा

By: abhishek dixit

Published: 18 May 2019, 08:53 PM IST

जबलपुर. वैशाख पूर्णिमा शनिवार को श्रद्धालुओं ने नर्मदा तीर्थ में पुण्य की डुबकी लगाई। सूर्योदय के पहले ही श्रद्धालुओं ने नर्मदा जल में स्नान, तर्पण और तट पर अनुष्ठान प्रारंभ किया। जैसे जैसे उजाला हुआ, वैसे ही ग्वारीघाट, तिलवाराघाट, भेड़ाघाट स्थित सरस्वतीघाट एवं लम्हेटाघाट में मेले जैसा दृश्य हो गया। तीर्थ पुरोहितों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अनुष्ठान कराए।

नर्मदा तट ग्वारीघाट में सुबह सिद्धघाट से उमाघाट और नाव घाट तक लोग ही लोग दिख रहे थे। स्थानीय श्रद्धालुओं के अलावा दूर दराज से श्रद्धालुओं ने नर्मदा तट पर ही रात्रि विश्राम किया। भोर में ही ढोल-मजीरा, हारमोनियम की मधुर धुन और भक्तिमय मधुर गीतों की धुन से नर्मदा तट गुलजार हो गया। सुबह 11 बजे स्नान-दान करने वालों का तांता लगा रहा।जबकि, दोपहर में श्रद्धालुओं की संख्या कुछ कम हो गई। शाम होते ही नर्मदा दर्शन, दीपदान करने वाले लोग पहुंचने लगे। उमाघाट में आयोजित होने वाली नर्मदा महाआरती में काफी संख्या में लोगों प्रार्थना की। नर्मदा महाआरती समिति के संयोजक ओंकार दुबे ने बताया, वैशाख पूर्णिमा में हर साल की तरह इस बार भी वैशाख पूर्णिमा में महाआरती में आस्था का सैलाब उमड़ा। तीर्थ पुरोहित अभिषेक मिश्रा ने बताया, वैशाख पूर्णिमा को श्री सत्य नारायण व्रत कथा, श्री विष्णु सहस्त्रनाम पाठ एवं नर्मदा तट पर भगवान शिव का अभिषेक हुआ। तिलवाराघाट में श्रद्धालुओं के दल आए और स्नान-दान के बाद आहार ग्रहण किया। सरस्वती घाट में सुबह से ही स्नान दान शुरू हो गया। सुबह 9 बजे नर्मदा परिक्रमा करने वाले श्रद्धालु वापस आए तो मेले जैसा दृश्य बन गया। ज्योतिर्विद जनार्दन शुक्ला के अनुसार सनातन धर्म के अनुसार वैशाख माह का धार्मिक दृष्टि से महत्व है और इस महीने की पूर्णिमा के दिन किए गए स्नान-दान और अनुष्ठान पुण्यकारी होते हैं।

वैशाख पूर्णिमा को हरे कृष्णा आश्रम भेड़ाघाट से सुबह 5.30 बजे नर्मदा पंचकोसी परिक्रमा निकाली गई। हरिनाम संकीर्तन और मां नर्मदे हर के जयघोष के साथ काफी श्रद्धालुओं ने सूरज की किरणें तेज होने से पहले नंगे पांव परिक्रमा पूरी कर ली। श्रद्धालुओं ने लम्हेटाघाट और सस्वतीघाट में नाव से नर्मदा पार किया। इस मौके पर संत नारायण स्वरूप, साध्वी सिद्धन माता व सर्व मंगला ने नशा मुक्ति का संकल्प दिलाई।

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