कबाड़ में रखी सब्जियां, दौड़ रहे थे कीड़े, चूहे-बिल्लियां

देश के नवोदित खिलाडिय़ों की सेहत से खिलवाड़, दीमक लगे कबाड़ कमरें में रखी गई थी सब्जियां, राष्ट्रीय कराते खेल प्रतियोगिताओं के दौरान दिखी अराजक व्यवस्था

 

मयंक साहू @ जबलपुर.

जबलपुर को राष्ट्रीय खेल आयोजन की मेजबानी का मौका मिला। राष्ट्रीय स्तर की कराते प्रतियोगिता में देश के कोने-कोने से खिलाड़ी शहर में जमा हुए हैं। खिलाडि़यों के लिए सबसे जरूरी अच्छी सेहत होती है। लेकिन खेल विभाग एवं प्रशासन के जिम्मेदार अफसर खिलाडिय़ों की सेहत से खिलवाड़ करते हुए नजर आ रहे हैं। राष्ट्रीय प्रतियोगिता के पहले ही दिन व्यवस्थाओं के नाम पर तैयारियों ने पोल खोल दी। खिलाडि़यों के लिए तैयार होने वाला भोजन सामग्री को जिस कमरे में स्टोर करके रखा था वह कमरा रुह कंपा देने वाला था। इस कमरे में कबाड़ भरा था दीमक, कीड़े के साथ चूहे-बिल्ली की धमचौकड़ी मची थी। इसी कबाड़ में हरी सब्जियां, मिर्ची, प्याज-टमाटर, आलू-प्याज काटने के लिए खुले में रखे गए थे। इस खाद्य सामग्री पर चूहे-बिल्ली खा रहे थे। एेसे में दूषित सामग्री खिलाडि़यों की सेहत को बिगाड़ भी सकती थी।
गौरतलब है कि 1 दिसंबर से आयोजित होने जा रही राष्ट्रीय कराते प्रतियोगिता में देशभर से करीब 14०० खिलाड़ी शिरकत कर रहे हैं। नजर न जाए, कमरा किया बंद इस कमरे को बाहर से बंद करके रखा गया था ताकि किसी की नजर न पड़े। हमने दरवाजे को खोलकर जब मुआयना किया तो अव्यवस्थाओं को देखकर दंग रह गए। जब कबाड़ को ध्यान से देखा तो इसमें कीड़े भी चल रहे थे। दूषित सामग्री के सेवन से खिलाडि़यों की सेहत पर भी असर पड़ सकता था।

खिलाडि़यों ने दर्ज की आपत्ति
खाने को लेकर बाहर से आए कोच एवं खिलाडि़यों ने आपत्ति दर्ज कि २४० रुपए के कूपन रखा गया है लेकिन थाली में मटर की सब्जी में पनीर ढूढंना पड़ रहा था तो वहीं दाल भी पतली थी। गल्र्स टायलेट की छत खुली दिल्ली से आए खिलाडि़यों के करीब ७५ सदस्यीय दल को समदडि़या स्कूल में रुकवाया गया था। स्टेशन से एमएलबी स्कूल तक तो बस आ गए लेकिन यहां से स्कूल तक जाने में परदेशी मेहमानों को खासा परेशान होना पड़ा।

खुद ऑटो से आनाजाना पड़ा
सदस्य पवन कुमार ने बताया कि सुबह से चाय नाश्ता तक नहीं मिला। शौचालय भी बेहद सीमित थे।
कन्या शौचालय ऊपर से खुले हुए थे जिससे वे अपने आपको असहज महसूस कर रही थी। स्कूल से स्टेडियम के बीच लंबी दूरी और अव्यवस्थाओं से परेशान होकर टीम के सदस्यों ने अपने पैसों से दूसरी होटल में रुकने की व्यवस्था की।

किस बात की समितियां
राष्ट्रीय कराते प्रतियोगिता में व्यवस्थाओं के लिए प्राचार्य स्तर की समितियां बनाई गई हैं। जिन्हें देखरेख की जवाबदारी सौंपी गई है। लेकिन समितियों के जिम्मेदारों ने भी मौके पर मौजूद होकर यह देखने सुनने की जेहमत नहीं ली। आवास, परिवहन एवं खानपान व्यवस्था बिगड़ी रही। आवागमन एवं आवास स्थल तक जाने अथवा होटल पहुंचने के लिए उन्हें कोई कुछ बता नहीं रहा था।

-हम खिलाडि़यों को लेकर सुबह दिल्ली पहुंचे छोटी बस मे बड़ी मुश्किल से स्कूल पहुंचे। यहां से खुद आटो करके आवास स्थल पहुंचना पड़ा। छात्राओं के टायलेट में उपर छत तक नहीं थे। चाय नाश्ता तक नहीं मिला। पूरे बच्चे सुबह से परेशान होते रहे लेकिन कोई देखने सुनने वाला नहीं था।
-रविंद्र शोकी, कोच दिल्ली

-आयोजन का पूरा जिम्मा संभागीय संयुक्त संचालक और उनके दल का है। यह अधिकारियों का दायित्व है कि वह नजर रखें। अव्यवस्थाओं की जांच कराई जाएगी
-भरत यादव, कलेक्टर

Mayank Kumar Sahu
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