विदिशा में खुलेगा पशु सहायता केन्द्र

वीयू का होगा विस्तार, बनेंगे नए सहायता केंद्र, आईसीएआर को भेजा प्रस्ताव, जबलपुर में भी दरकार

जबलपुर। गौ-संवर्धन एवं गौरक्षा की योजनाओं के बीच जबलपुर में कई बीमार पशुओं को इलाज नहीं मिल पा रहा। वेटरनरी विश्वविद्यालय और पशु चिकित्सा विभाग सुविधाओं के मामले में बौने साबित हो रहे हैं, लेकिन विदिशा के निवासियों के लिए यह खबर खुशी देने वाली है कि प्रदेश का पहला पशु सहायता केन्द्र विदिशा में खुलने जा रहा है। वेटरनरी यूनिवर्सिटी का यह उपक्रम प्रत्येक जिले में संचालित कृषि विज्ञान केंद्र की तरह कार्य करेंगे। किसान पशुपालकों को जोडऩे के लिए सहायता केंद्रों की स्थापना का वीयू ने खाका तैयार कर लिया है। इससे संबंधित प्रस्ताव भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) को भेजा गया है। प्रस्ताव के तहत पशुपालकों की सहायता और समस्याओं के निराकरण के लिए सागर और अनूपपुर जिले में भी पशु सहायता केंद्र खोलने की योजना है।
आईसीएआर ने कामधेनु विश्वविद्यालय के प्रस्ताव पर छत्तीसगढ़ में पहले पशु सहायता केंद्र को शुरू करने की अनुमति दी है। इससे प्रदेश में लंबे अरसे से लंबित कृषि विकास केंद्रों में पशुपालन से संबंधित परामर्श और सहायता उपलब्ध कराने की वीयू को योजना शुरू करने को बल मिला है। सूत्रों के अनुसार प्रदेश में हाल ही में हुए कृषि विज्ञान केंद्र की जोनल वर्कशॉप में पशु सहायता केंद्र के मसले पर भी चर्चा हुई।  
इसलिए ये 3 जिले चुने
विदिशा: जिले में संचालित कृषि विकास केंद्र बंद है। इस स्थान पर वीयू को बुनियादी सुविधा के लिए अधिक कवायद नहीं करनी होगी। स्थान और सुविधाओं का उपयोग हो सकेगा।
सागर : राज्य सरकार ने रतौना में तकरीबन 1150 एकड़ में कैटल फॉर्म बनाया है। इसकी भूमि से तकरीबन 50 एकड़ जमीन की मांग सहायता केंद्र के लिए की है।
अनूपपुर : जिले में फिलहाल कृषि विकास केंद्र नहीं है। पशु सहायता केंद्र की स्थापना से जिले के किसानों को पशुपालन संबंधित परामर्श और सहायता के लिए वैज्ञानिक उपलब्ध हो सकेंगे। 
हड़ताली शिक्षकों की मांगे औचित्यहीन
अध्यापकों द्वारा की जा रही हड़ताल को आयुक्त लोक शिक्षण ने अनुचित करार दिया है। आयुक्त डीडी अग्रवाल ने कहा कि एक दशक में अध्यापक संवर्ग के हित में शासन ने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। अध्यापकों द्वारा की जा रही हड़ताल न्यायोचित नहीं है। आजाद अध्यापक संघ के बैनर तले कतिपय अध्यापकों, संविदा शाला शिक्षकों द्वारा 13 सितंबर से मांगों के संबंध में जो धरना प्रदर्शन किया जा रहा है वह गलत है।
कब-कब दिया लाभ- वर्ष 2011 में संविदा शाला शिक्षकों के पारिश्रमिक को दोगुना किया गया। वर्ष 2013 में अध्यापक संवर्ग को शासन के नियमित शिक्षकों के समान नियमित वेतनमान 1.9.2017 से स्वीकृत करते हुए प्रतिवर्ष अंतरिम राहत की 4 किश्तें स्वीकृत की गईं।
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