डॉक्टर प्रसूता को ऑपरेशन का डर दिखाते रहे और महिला के पेट से आधा बाहर निकल आया बच्चा, हैरान कर देगा अस्पताल का यह सच

deepankar roy

Publish: Oct, 13 2017 05:37:23 PM (IST)

Jabalpur, Madhya Pradesh, India
डॉक्टर प्रसूता को ऑपरेशन का डर दिखाते रहे और महिला के पेट से आधा बाहर निकल आया बच्चा, हैरान कर देगा अस्पताल का यह सच

प्रसव पीड़ा से तड़पती रही महिला, तुरंत पैसे नहीं जमा किए तो कर दिया रैफर, नवजात ने तोड़ा दम

जबलपुर। सरकार प्रसूताओं की पीड़ा कम करने के लिए तमाम सुविधाओं और योजनाओं का दावा करें लेकिन हकीकत यही है सरकारी अस्पतालों में तमाम योजनाएं सिर्फ कागजों पर दौड़ रही है। प्रसूताओं को प्रसव पीड़ा के साथ अस्पताल में डॉक्टरों की मनमर्नी का दर्द भी झेलना पड़ रहा है। एक ऐसा ही मामला गुरुवार को कटनी में आया। जिसमें पहले तो प्रसव पीड़ा होने पर एक प्रसूता के परिजनों को आशा कार्यकर्ताओं ने डर दिखा कर उसे निजी अस्पताल में भर्ती कराया। फिर ऑपरेशन से प्रसव के लिए दबाव बनाया। इधर, अस्पताल प्रबंधन प्रसूता के ऑपरेशन के लिए दबाव बना रहा था उसी दौरान महिला को प्रसव पीड़ा बढ़ गई और बच्च उसके पेट से आधा बाहर निकल आया।
नॉर्मल डिलेवरी की बात पर ड्रिप देकर चली गई डॉक्टर
संतनगर निवासी राहुल कुशवाहा के अनुसार 7-8 अक्टूबर की रात भाभी संगीता कुशवाहा को प्रसव पीड़ा हुई। दर्द बढऩे पर आशा कार्यकर्ता को बुलाया गया। उन्होंने हॉस्पिटल ले चलने के लिए कहा। रात में सरकारी अस्पताल में डॉक्टर उपलब्ध नहीं होने की बात कहते हुए उसने आदर्श कॉलोनी स्थित शारदा हॉस्पिटल लेकर चलने को कहा। परिजन आशा की बात मानकर प्रसूता को रात 2 बजे शारदा हॉस्पिटल लेकर पहुंचे। कुछ देर बाद डॉ. हर्षिता गुप्ता पहुंचीं। जांच करने के बाद ऑपरेशन करने के लिए कहा। परिजनों ने नॉर्मल डिलेवरी कराने की बात कही। इसके बाद डॉक्टर मरीज को ड्रिप देकर वहां से चली गईं।
दो घंटे तक इंतजार करते रहे डॉक्टर
ड्रिप देने के करीब एक घंटे बाद महिला की प्रसव पीड़ा बढ़ गई। इस पर महिला चिकित्सक को दोबारा कॉल किया गया। इस बीच अस्पताल प्रबंधन ने ऑपरेशन के लिए 22 हजार रुपए जमा करने के लिए कहा। परिजनों ने इससे इनकार कर दिया। फिर परिजन दो घंटे तक डॉ. का इंतजार करते रहे लेकिन वे नहीं पहुंचीं। इस दौरान नर्स डिलेवरी कराने की कोशिश करती रही। नवजात पेट से आधा बाहर आ गया था, तब जाकर डॉ. हर्षिता गुप्ता पहुंचीं और परिजनों को प्रसूता को जबलपुर मेडिकल कॉलेज ले जाने की सलाह देकर चली गईं।
जब तक दूसरे अस्पताल पहुंचे नवजात की थम गई सांस
डॉक्टर और अस्पताल प्रबंधन की मनमानी से परेशान परिजन माधवनगर स्थित दूसरे निजी नर्सिंग होम पहुंचे, जहां पर महिला चिकित्सक ने नॉर्मल डिलेवरी कराई लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। जब बच्चा जन्मा तो उसकी सांसें थम चुकी थीं। घटना के बाद आशा कार्यकर्ता अनीता साहू वहां से गायब हो गई। पीडि़त महिला के परिजनों ने डॉ. हर्षिता गुप्ता और शारदा नर्सिंग होम पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कलेक्टर से कार्रवाई की मांग की है।
ऑपरेशन की दी थी सलाह
शारदा नर्सिंग होम के संचालक अनुराग त्रिवेदी के अनुसार प्रसूता की स्थिति गंभीर थी। अस्पताल के डॉ. सहाय (एमएस), शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. राजीव बजाज सहित डॉ. हर्षिता गुप्ता को ओपीनियन के लिए बुलाया गया था। बच्चा उल्टा था। परिजनों को डॉक्टरों ने ऑपरेशन कराने की सलाह दी लेकिन परिजन नॉर्मल डिलेवरी कराने पर अड़े रहे। इसके बाद वे यहां से प्रसूता को लेकर चले गए।
बच्चा उलटा था
जिला अस्पताल में चिकित्सक डॉ. हर्षिता गुप्ता के अनुसार परिजनों द्वारा लगाए जा रहे आरोप निराधार हैं। एक बार पहले भी प्रसूता ने मुझे दिखाया था। रात में शारदा हॉस्पिटल ओपीनियन के लिए बुलाया गया। बच्चा उलटा था, जिससे नॉर्मल डिलेवरी घातक थी। परिजनों ने कहा कि हमारे यहां पहले भी उलटा बच्चे नॉर्मल पैदा हुए हैं। परिजन नहीं माने और वहां से कहीं और लेकर चले गए।

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