लोकसभा चुनाव में महिला सुरक्षा भी होगा बड़ा मुद्दा, आधी आबादी की सरकार चुनने में होगी अहम भूमिका

मुद्दा : बेटियों की सुरक्षा के लिए सरकार करे उपाय, छात्राओं की सुरक्षा हो बेहतर, घर से निकल सकें निडर होकर

By: abhishek dixit

Published: 29 Mar 2019, 12:57 PM IST

जबलपुर. कॉलेज या स्कूल आने-जाने वाली छात्राओं की सुरक्षा के माकूल इंतजाम नहीं हैं। छात्राएं, युवतियां कहीं न कहीं सुरक्षा के प्रति चितिंत रहती हैं। आरक्षण आर्थिक आधार पर दिया जाना चाहिए। छात्राओं, महिलाओं को अधिक से अधिक रोजगार के अवसर सरकार को बढ़ाए जाने चाहिए। कॉलेजों में मूलभूत सुविधाओं में भी सुधार किए जाने की आवश्यकता है। कुछ ऐसे ही विचार शासकीय मानकुंवर बाई महिला महाविद्यालय की छात्राओं ने 'पत्रिका मुद्दा' के माध्यम से अपनी बात रखी।

बेरोजगारों की फौज, नौकरियां कम
छात्रा इंसा जैतिमा ने कहा कि कॉलेजों से पढ़कर निकलने वाले युवाओं की फौज बढ़ती जा रही है, उसके अनुसार रोजगार के अवसर नहीं हैं। यूपीएससी की परीक्षा में 896 पद निकाले गए लेकिन आवेदकों की संख्या 12 लाख है।

आने जाने में लगता है डर
छात्रा मोहम्मदी नाहे नूरू, साक्षी अहिरवार, त्राशि प्रजापति ने कहा कि आज लड़कियां सुरक्षित नहीं हैं। घर से बाहर निकलते ही मनचलों की निगाहें उन्हें घूरती रहती हैं। रेड कोड जैसी व्यवस्था संचालित है, लेकिन ये भी अपने कर्तव्यों के प्रति जिम्मेदार नहीं हैं। छात्राओं, महिलाओं को हमेशा असुरक्षा का डर सताता है।

बेटियां रहें सुरक्षित
छात्रा नंदी पाटकर ने कहा कि बेटियों के प्रति लगातार बढ़ रही असुरक्षा से अभिभावक भी सहमे हैं। हालात ये हैं कि लोग बेटी के पैदा होते ही उसके बड़ी होने तक डर सताया रहता है। बेटियों को जन्म देना नहीं चाहते। इस विषय पर सरकार को कोई ठोस प्रयास करने की जरूरत है, ताकि बेटियां सुरक्षित रहें।

आरक्षण आर्थिक आधार पर हो
शिल्पी शुक्ला, अनामिका कामाख्या, सोनम रजक आदि छात्राओं ने कहा कि आरक्षण का क्राइटेरिया डिसाइड नहीं है। जबकि, आरक्षण आर्थिक आधार पर होना चाहिए न कि जातिगत आधार पर। इससे छात्र छात्राओं में हीन भावना न रहे। कॉलेजों में मूलभूत सुविधाओं को बढ़ाया जाए। प्रथम वर्ष में प्रवेश लेने वाली छात्राओं को कॅरियर संवारने की दिशा में प्रयास किए जाएं ताकि वे अपने पैरों पर खड़ी हो सकें।

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